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बिना इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क के फोन पर देख सकेंगे लाइव TV, सरकार जल्द देगी तोहफा

D2M तकनीक से मोबाइल फोन पर बिना इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क के लाइव टीवी देखा जा सकेगा। जानिए Direct-to-Mobile कैसे काम करता है और भारत में कब शुरू हो सकती है सुविधा।

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हर मोबाइल में अभी नहीं चलेगा D2M/Photo-AI

भारत में जल्द ही मोबाइल फोन पर बिना इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क के लाइव टीवी देखने की सुविधा मिल सकती है। सार्वजनिक प्रसारक प्रसार भारती Direct-to-Mobile यानी D2M तकनीक के व्यावसायिक रोलआउट की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रसार भारती अगले महीने इस तकनीक के कमर्शियल रोलआउट के लिए Request for Proposal यानी RFP जारी कर सकता है। हालांकि, इसकी आधिकारिक समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं है। D2M तकनीक के जरिए मोबाइल फोन पर टीवी चैनल, ऑडियो, न्यूज अपडेट और इमरजेंसी अलर्ट सीधे प्रसारित किए जा सकते हैं। इसके लिए मोबाइल डेटा या सेलुलर नेटवर्क की जरूरत नहीं होगी।

क्या है Direct-to-Mobile यानी D2M तकनीक?

D2M एक ऐसी ब्रॉडकास्टिंग तकनीक है, जिसमें टीवी और दूसरे मल्टीमीडिया कंटेंट को सीधे मोबाइल डिवाइस तक पहुंचाया जाता है। यह सामान्य मोबाइल नेटवर्क की तरह इंटरनेट या टेलीकॉम नेटवर्क पर निर्भर नहीं करती। इसे आसान भाषा में ऐसे समझ सकते हैं कि जैसे स्मार्टफोन में FM रेडियो के लिए फोन का रिसीवर रेडियो फ्रीक्वेंसी पकड़ता है, उसी तरह D2M में मोबाइल डिवाइस ब्रॉडकास्ट सिग्नल प्राप्त करेगा। इसके लिए डिवाइस में जरूरी हार्डवेयर सपोर्ट होना आवश्यक है।

इंटरनेट बंद हो तब भी मिल सकता है TV सिग्नल

D2M का सबसे बड़ा फायदा उन इलाकों में हो सकता है, जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर है। क्योंकि इसमें मोबाइल डेटा का इस्तेमाल नहीं होगा, इसलिए यूजर के मोबाइल डेटा प्लान से डेटा खर्च नहीं होगा। इस तकनीक का इस्तेमाल सिर्फ लाइव टीवी तक सीमित नहीं रहेगा। इसके जरिए न्यूज, स्पोर्ट्स, ऑडियो, मल्टीमीडिया कंटेंट और आपातकालीन अलर्ट भी मोबाइल फोन तक पहुंचाए जा सकते हैं।

मोबाइल नेटवर्क पर भी कम होगा दबाव

अगर बड़ी संख्या में लोग लाइव वीडियो या टीवी कंटेंट मोबाइल इंटरनेट के जरिए देखते हैं, तो इससे मोबाइल नेटवर्क पर काफी ट्रैफिक बढ़ता है। D2M में ब्रॉडकास्टिंग के जरिए एक ही कंटेंट को बड़ी संख्या में डिवाइस तक पहुंचाया जा सकता है।

इससे संभावित रूप से मोबाइल डेटा नेटवर्क पर वीडियो ट्रैफिक का दबाव कम किया जा सकता है। हालांकि, D2M के कमर्शियल इस्तेमाल को लेकर टेलीकॉम कंपनियों ने अपनी चिंताएं भी जाहिर की हैं, क्योंकि इसका असर उनके डेटा कारोबार पर पड़ सकता है।

19 से ज्यादा शहरों में हो चुके हैं ट्रायल

प्रसार भारती ने IIT कानपुर और Saankhya Labs के साथ मिलकर D2M तकनीक के ट्रायल किए हैं। Saankhya Labs अब Tejas Networks का हिस्सा है। देश के 19 से ज्यादा शहरों में इस तकनीक का परीक्षण किया जा चुका है।

दिल्ली और बेंगलुरु में पहले किए गए Proof of Concept परीक्षणों में मोबाइल डिवाइस पर सीधे मल्टीमीडिया कंटेंट पहुंचाने की क्षमता का प्रदर्शन भी किया गया था। अब Tejas Networks द्वारा विकसित उपकरणों से जुड़े तकनीकी वैलिडेशन टेस्ट के बाद कमर्शियल रोलआउट की दिशा में आगे बढ़ने की तैयारी है।

IIT कानपुर की स्टडी में क्या सामने आया?

प्रसार भारती की ओर से कराए गए अध्ययनों में IIT कानपुर ने D2M के लिए 470-582 MHz बैंड में तकनीक का परीक्षण किया। स्टडी के मुताबिक, इस व्यवस्था से सेलुलर नेटवर्क में हानिकारक इंटरफेरेंस या स्मार्टफोन में असामान्य गर्म होने जैसी समस्या नहीं पाई गई। हालांकि, देशभर में बड़े स्तर पर D2M लागू करने के लिए अभी कई तकनीकी और इंफ्रास्ट्रक्चर चुनौतियां मौजूद हैं।

हर मोबाइल में अभी नहीं चलेगा D2M

D2M को लागू करने में सबसे बड़ी चुनौती मोबाइल डिवाइस का हार्डवेयर सपोर्ट है। IIT कानपुर के 2022 रोडमैप पेपर के मुताबिक, मौजूदा समय में उपलब्ध ज्यादातर मोबाइल फोन D2M को सपोर्ट नहीं करते। इस तकनीक के लिए मोबाइल में ATSC 3.0 स्टैंडर्ड के अनुरूप अलग बेसबैंड प्रोसेसिंग यूनिट, एंटीना, लो-नॉइज एम्पलीफायर, बेसबैंड फिल्टर और रिसीवर जैसे हार्डवेयर की जरूरत पड़ सकती है। इसका मतलब है कि केवल सॉफ्टवेयर अपडेट करके मौजूदा हर स्मार्टफोन को D2M-सक्षम बनाना संभव नहीं होगा।

टावरों का नेटवर्क भी करना होगा मजबूत

मोबाइल फोन तक बड़े स्तर पर D2M सिग्नल पहुंचाने के लिए मौजूदा ब्रॉडकास्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मजबूत करना होगा। बड़े पैमाने पर सेवा शुरू करने के लिए ज्यादा घने टेरेस्ट्रियल टावर नेटवर्क की जरूरत पड़ सकती है। यानी सरकार के सामने सिर्फ मोबाइल कंपनियों और डिवाइस निर्माताओं के साथ काम करने की चुनौती नहीं है, बल्कि D2M सिग्नल के लिए जरूरी ब्रॉडकास्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना भी अहम होगा।

करीब 9 करोड़ घरों तक पहुंच बनाने का लक्ष्य

सरकार D2M को देश में टीवी की पहुंच बढ़ाने के संभावित माध्यम के तौर पर भी देख रही है। आधिकारिक अनुमानों के मुताबिक भारत में करीब 28 करोड़ परिवार हैं, जिनमें लगभग 19 करोड़ परिवारों तक टीवी सेवाओं की पहुंच है। यानी करीब 9 करोड़ परिवार ऐसे हैं जिनके पास टीवी सेवा की पहुंच नहीं है।

भारत में मोबाइल फोन का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होने के कारण D2M इस अंतर को कम करने में मदद कर सकता है। अगर कमर्शियल रोलआउट सफल होता है, तो मोबाइल फोन के जरिए उन लोगों तक भी लाइव टीवी और दूसरे ब्रॉडकास्ट कंटेंट पहुंचाए जा सकते हैं, जहां पारंपरिक टीवी या तेज इंटरनेट की पहुंच सीमित है।

RFP के बाद क्या बदलेगा?

प्रसार भारती की ओर से प्रस्तावित RFP D2M को ट्रायल से कमर्शियल इस्तेमाल की दिशा में ले जाने वाला अहम कदम होगा। इसके बाद तकनीक, उपकरण, इंफ्रास्ट्रक्चर और रोलआउट मॉडल से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

Pradeep Pandey
प्रदीप पाण्डेयauthor

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिया को समझने और उसे आम पाठकों तक सरल व उपयोगी रूप में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। प्रदीप अब तक 11,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। वह गैजेट रिव्यू, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक टिप्स और नवीनतम टेक इनोवेशन पर लगातार काम करते हैं। एआई टूल्स पर एक्सपेरिमेंट करना, नए ऐप्स टेस्ट करना और टेक से जुड़े प्रैक्टिकल सॉल्यूशंस खोजने में उनकी खास रुचि है।

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