Travel Trend: पहले के समय में जब भी कोई छुट्टी प्लान करता था, तो ज्यादातर फोकस कहां- कहां घूमना है और कितनी जगहें कवर करनी हैं इस पर ही होता था। मतलब छुट्टी का मतलब भी एक तरह का प्रोजेक्ट ही बन गया था। लेकिन अब घुमक्कड़ लोगों खासकर Gen Z की सोच इसमें काफी बदल गई है। छुट्टी का मतलब अब भागदौड़ नहीं बल्कि रुकना और आराम करना हो गया है। इसी सोच से एक नया ट्रेंड सामने आया है जिसे लोग प्यार से रूम रॉटिंग (Room Rotting) कहने लगे हैं। इसका मतलब है किसी अच्छी जगह पर जाकर ज्यादातर समय अपने कमरे, होटल या Airbnb में ही बिताना और बस रिलैक्स करना।
Room Rotting आखिर होता क्या है?
रूम रॉटिंग शब्द सुनकर आपको थोड़ा अजीब लग सकता है लेकिन, Gen Z के बीच ये शब्द तेजी से पॉपुलर हो रहा है। यह कोई आलसीपन वाली चीज नहीं है लेकिन असल में यह एक तरह का आराम है जिसमें पूरा फोकस कुछ करने पर नहीं बल्कि कुछ ना करने पर होता है। इसमें लोग-
- होटल या Airbnb में आराम करते हैं
- बाहर घूमने का दबाव नहीं लेते
- देर तक बिना किसी तनाव के सोते हैं
- बिना प्लान के दिन बिताते हैं
- हल्की-फुल्की बातें करते हैं
- खाना ऑर्डर करते हैं
बदल रही है Gen Z की सोच
आज की युवा पीढ़ी बहुत तनाव वाली लाइफ जी रही है इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है। पढ़ाई, नौकरी, सोशल मीडिया, करियर हर जगह पर परफॉर्म करने का दबाव होता है। ऐसे में जब छुट्टी मिलती है तो वे और ज्यादा थकाने वाली ट्रिप की बजाए आराम करने को प्राथमिकता देते हैं।
Gen Z ट्रैवल को एक चेकलिस्ट की तरह नहीं देखते, बल्कि एक मेंटल ब्रेक की तरह देख रहे हैं। SQB कंपनी के युवा संस्थापक शुभम शाह ने बताया, 'हर पल को भरना जरूरी नहीं है। हर जगह भागने से अच्छा है थोड़ा रुकना। अगर छुट्टी है तो सच में आराम होना चाहिए।'
रूम रॉटिंग ट्रेंड हो रहा है पॉपुलर (फोटो: Canva)
मानसिक स्वास्थ्य सबसे बड़ा कारण
रूम रॉटिंग ट्रेंड के पीछे सबसे बड़ा कारण मानसिक स्वास्थ्य है। आज के युवा बहुत स्ट्रेस, एंग्जायटी और बर्नआउट से गुजर रहे हैं। ऐसे में वे छुट्टी को रिकवरी टाइम की तरह इस्तेमाल करते हैं। उनके लिए ट्रैवल का मतलब अब 10 जगहें घूमना, सुबह से शाम तक दौड़ना और हर जगह फोटो डालना नहीं है। बल्कि उनके लिए ट्रैवल का मतलब है-
- दिमाग को शांत करना
- फोन से दूरी बनाना
- खुद के साथ समय बिताना
- बिना किसी दबाव के जीना
सोशल मीडिया से दूरी भी एक कारण है
एक और बड़ा बदलाव ये है कि कई युवा अब ट्रिप को सोशल मीडिया मोमेंट नहीं बनाना चाहते। पहले लोग हर चीज फोटो और रील के लिए करते थे, लेकिन अब-फोन कम इस्तेमाल करना, डिजिटल डिटॉक्स करना और असली पल को जीना ज्यादा जरूरी हो गया है।
एक लक्जरी बन गया है कुछ ना करना
पहले अगर कोई पूरी छुट्टी कमरे में बिताता था तो लोग उसे आलसी समझते थे। लेकिन अब सोच बदल रही है। Gen Z के लिए कुछ ना करना भी एक लक्जरी बन गया है। वे समझ चुके हैं कि- हमेशा एक्टिव रहना जरूरी नहीं और आराम भी उतना ही जरूरी है जितना काम। इसलिए वे जानबूझकर अपने ट्रिप में खाली समय छोड़ते हैं।
Gen Z को पसंद आ रहा है रूम रॉटिंग ट्रेंड (फोटो: Canva)
अनप्लान्ड पल क्यों है खास ?
एक दिलचस्प बात ये है कि इस ट्रेंड में सबसे ज्यादा यादगार पल वही होते हैं जो प्लान नहीं किए जाते। यही छोटे-छोटे पल ट्रिप को खास बना देते हैं। जैसे-
- देर रात तक दोस्तों के साथ बातें करना
- अचानक मंगवाया गया खाना
- बिना प्लान की गई हंसी-मजाक
- बालकनी में बैठकर घंटों नजारे देखना
हर ट्रिप होती है अलग
इस ट्रेंड की एक खास बात यह भी है कि कोई भी दो ट्रिप एक जैसी नहीं होती। कभी कोई ट्रिप पूरी तरह आराम वाली होती है, तो कभी हल्की-फुल्की एक्सप्लोरिंग वाली। किसी दिन बस कमरे में बैठकर खाना और मूवी, किसी दिन थोड़ी बाहर की सैर और किसी दिन सिर्फ सोना और आराम करना। यही लचीलापन इस ट्रेंड को खास बनाता है।
रूम रॉटिंग ट्रेंड (फोटो: Canva)
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भारत में रूम रॉटिंग के लिए 10 बेहतरीन जगहें
भारत में कई ऐसी जगहें हैं जहां आप बाहर घूमने के बजाय अपने कमरे, होटल या होमस्टे में बैठकर ही पूरा ट्रिप एन्जॉय कर सकते हैं। यहां 10 ऐसी जगहें दी जा रही हैं जो इस तरह के स्लो और रिलैक्स ट्रैवल के लिए बिल्कुल परफेक्ट हैं।
- माउंट आबू (राजस्थान)
- मनाली (हिमाचल प्रदेश)
- कूर्ग (कर्नाटक)
- ऋषिकेश (उत्तराखंड)
- गोवा (साउथ गोवा)
- ऊटी (तमिलनाडु)
- दार्जिलिंग (पश्चिम बंगाल)
- अलेप्पी (केरल)
- स्पीति वैली (हिमाचल प्रदेश)
- लोनावला (महाराष्ट्र)
रूम रॉटिंग का मतलब यह नहीं कि आप ट्रिप का मजा नहीं ले रहे, बल्कि इसका मतलब है कि आप अपने तरीके से आराम को प्राथमिकता दे रहे हैं। आप उन जगहों की तलाश में हैं जहां आप बिना भागदौड़ के सिर्फ सुकून महसूस कर सकें और यही ट्रैवल का नया अंदाज भी है।
