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दुनिया के सबसे ऊंचे शिव मंदिर की यात्रा, जानिए यहां का अनुभव

Tungnath Temple: तुंगनाथ सिर्फ एक मंदिर नहीं है, ये एक फील है। यहां आकर आपको लगता है कि जिंदगी की भागदौड़ थोड़ी धीमी हो गई है। पहाड़ों की खामोशी, ठंडी हवा और बदलता मौसम आपको अंदर से रिलैक्स कर देता है। ये ट्रिप सिर्फ घूमने के लिए नहीं, बल्कि खुद से मिलने का मौका भी देती है।

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दुनिया के सबसे ऊंचे शिव मंदिर की यात्रा

Tungnath Temple: तुंगनाथ मंदिर दुनिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर माना जाता है। ये समुद्र तल से करीब 3,680 मीटर की ऊंचाई पर बना है और पंच केदार का हिस्सा है। तुंगनाथ का मतलब होता है पहाड़ों के भगवान। यहां आकर आपको ऐसा लगेगा जैसे आप सिर्फ मंदिर नहीं, बल्कि पहाड़ों की शांति और खूबसूरती के बीच पहुंच गए हैं। अगर आप सोलो ट्रिप पर कहीं जाने का प्लान कर रहे हैं या फिर दोस्त या परिवार के साथ यात्रा करना चाहते हैं तो ये यात्रा आपके लिए बेहद स्पेशल रहने वाली है।

यात्रा की तैयारी: तुंगनाथ जाने के लिए पहले आपको ऋषिकेश या हरिद्वार पहुंचना होता है। वहां से आप देवप्रयाग, रुद्रप्रयाग और उखीमठ होते हुए चोप्टा पहुंचते हैं, जो इस ट्रिप का बेस पॉइंट है। चोप्टा से तुंगनाथ तक करीब 3.5 से 5 किलोमीटर का ट्रेक है। रास्ता पत्थरों से बना हुआ है, इसलिए शुरुआत करने वालों के लिए भी ठीक है, लेकिन चढ़ाई लगातार है। आमतौर पर मंदिर तक पहुंचने में 2 से 4 घंटे लग जाते हैं।

ट्रेकिंग का मजा: तुंगनाथ का असली मजा उसके ट्रेक में है। रास्ते में घने जंगल, खुली घास के मैदान और ऊंचे-ऊंचे पहाड़ मिलते हैं। बीच-बीच में बैठने के लिए बेंच भी लगी हैं, जहां बैठकर आप नजारे एंजॉय कर सकते हैं। जैसे-जैसे आप ऊपर जाते हैं, नजारे और भी शानदार होते जाते हैं। मंदिर के पास पहुंचते-पहुंचते आपको लगेगा कि सांस थोड़ी धीमी हो गई है और आप एकदम शांत माहौल में आ गए हैं। एक अलग ही दुनिया जैसा फील आता है।

चंद्रशिला शिखर: तुंगनाथ से करीब 1.5 किलोमीटर आगे चंद्रशिला शिखर है, जिसकी ऊंचाई लगभग 4,000 मीटर है। यहां से हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियां साफ दिखाई देती हैं। हालांकि, यहां तक का रास्ता थोड़ा मुश्किल है, लेकिन ऊपर पहुंचने के बाद जो व्यू मिलता है, वो पूरी मेहनत वसूल कर देता है।

कब जाएं: तुंगनाथ जाने का सबसे बढ़िया समय मई-जून और सितंबर-अक्टूबर माना जाता है। इस समय मौसम साफ रहता है और ज्यादा भीड़ भी नहीं होती। बरसात (जुलाई से सितंबर) में रास्ते फिसलन भरे हो जाते हैं, और सर्दियों (दिसंबर से मार्च) में मंदिर बंद रहता है क्योंकि यहां भारी बर्फबारी होती है।

prabhat sharma
प्रभात शर्माauthor

प्रभात शर्मा टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के फीचर डेस्क में कार्यरत ट्रैवल और लाइफस्टाइल राइटर हैं। यात्राओं के प्रति उनका गहरा जुनून और नई जगहों को समझने–परखने की क्षमता उनकी लेखन शैली को बेहद जीवंत और पाठकों से जोड़ने वाली बनाती है। वे ऑफबीट डेस्टिनेशन, लोकल कल्चर, हेरिटेज साइट्स, रोड ट्रिप्स, फूड जर्नी और बजट ट्रैवल जैसे विषयों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। प्रभात की स्टोरीज़ सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि यात्रा के माहौल, भाव और अनुभव को भी महसूस कराती हैं। अब तक 7,000 से अधिक कंटेंट लिख चुके प्रभात अपनी सहज भाषा, प्रामाणिक जानकारी और अनुभव-आधारित दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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