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भारत का अनोखा गांव , जहां नाम नहीं, सिर्फ धुनों से होती है पहचान

Kongthong Meghalaya: अगर आप यूनीक ट्रैवल डेस्टिनेशन की तलाश में हैं तो मेघालय के कोन्थोंग गांव आपकी ट्रैवल बकेटलिस्ट में शामिल हो सकता है। अपनी अनोखी परंपरा के लिए ये गांव जाना जाता है।

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भारत का अनोखा गांव

Kongthong Meghalaya: इस आर्टिकल के माध्यम से आज आप जानेंगे मेघालय में मौजूद अनोखे गांव कोन्थोंग (Kongthong) के बारे में जिसकी कहानी किसी फिल्म जैसी लगती है। इस गांव की अनोखी परंपरा है यहां लोगों के नाम शब्दों में नहीं बल्कि धुनों में होते हैं। इसलिए इस गांव को व्हिसलिंग विलेज भी कहते हैं। यहां हर इंसान की एक खास धुन होती है, जिसे उसकी मां जन्म के समय बनाती है। यहां की सादगी और अनोखी परंपरा हर यात्री को याद रह जाती है।

धुनों से बसती है पहचान

इस गांव में लोग एक-दूसरे को नाम से नहीं बुलाते, बल्कि उनकी खास धुन बजाकर पुकारते हैं। जब कोई किसी को बुलाना चाहता है, तो वह उसकी पहचान वाली धुन गुनगुनाता या सीटी में बजाता है। यहां हर व्यक्ति की एक यूनिक धुन होती है, और मजेदार बात ये है कि दो लोगों की धुन कभी एक जैसी नहीं होती। मतलब हर इंसान की पहचान पूरी तरह अलग और खास होती है।

कैसे बनती है यह धुन?

जब किसी बच्चे का जन्म होता है, तो उसकी मां एक खास धुन बनाती है। यही धुन उस बच्चे की जिंदगी भर की पहचान बन जाती है। यही वजह है कि यहां नामों से ज्यादा धुनों का महत्व होता है। आसान भाषा में समझें तो तीन तरह के नाम पहचान रूप में यहां होते हैं।

एक सरकारी/आधिकारिक नाम

एक लंबी धुन (लगभग 30 सेकंड की)

एक छोटी धुन (लगभग 10 सेकंड की), जो रोजमर्रा में इस्तेमाल होती है।

टूरिज्म और पहचान

इस गांव को 2021 में टूरिज्म के लिए काफी पहचान मिली थी और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया। यहां झाड़ू घास (broom grass) की खेती भी होती है, जो गांव की आमदनी का बड़ा हिस्सा है। यहां पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी एयरपोर्ट शिलांग (लगभग 79 किमी) है। दूसरा विकल्प रेलवे स्टेशन: गुवाहाटी (लगभग 145 किमी) है। गुवाहाटी पहुंचकर आप टैक्सी, बस या कार से बड़े आराम से यहां पहुंच सकते हैं। अगर आप सोलो ट्रिप प्लान कर रहे हैं तो ये जगह आपके लिए परफेक्ट है ही। साथ ही परिवार के साथ घूमने जाने के लिए भी ये जगह बेस्ट है जहां शहर की भीड़भाड़ से दूर कुछ पल आप सुकून से बिता सकते हैं।

prabhat sharma
प्रभात शर्माauthor

प्रभात शर्मा टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के फीचर डेस्क में कार्यरत ट्रैवल और लाइफस्टाइल राइटर हैं। यात्राओं के प्रति उनका गहरा जुनून और नई जगहों को समझने–परखने की क्षमता उनकी लेखन शैली को बेहद जीवंत और पाठकों से जोड़ने वाली बनाती है। वे ऑफबीट डेस्टिनेशन, लोकल कल्चर, हेरिटेज साइट्स, रोड ट्रिप्स, फूड जर्नी और बजट ट्रैवल जैसे विषयों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। प्रभात की स्टोरीज़ सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि यात्रा के माहौल, भाव और अनुभव को भी महसूस कराती हैं। अब तक 7,000 से अधिक कंटेंट लिख चुके प्रभात अपनी सहज भाषा, प्रामाणिक जानकारी और अनुभव-आधारित दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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