Apricot Cherry Blossom Festival in Ladakh: जब वसंत के फूलों या अंग्रेजी में कहें तो चेरी ब्लॉसम की बात होती है, तो अक्सर जापान का जिक्र आता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि, भारत में भी आप चेरी ब्लॉसम का एक बेहद खूबसूरत नजारा देखने को मिलता है। लद्दाख के ऊंचाई वाले इलाकों में अप्रैल के दौरान खुबानी के फूल खिलते हैं, जो पूरे क्षेत्र को गुलाबी और सफेद रंगों से सजा देते हैं। यह दृश्य किसी ड्रीम डेस्टिनेशन से कम नहीं लगता। लद्दाख में खुबानी फूल महोत्सव जल्द ही शुरू होने वाला है, ऐसे में अगर आप भी इसे लुत्फ उठाना चाहते हैं। तो देखें कब से शुरू होगा खुबानी फूल महोत्सव, डेट, कैसे जाएं
लद्दाख का खुबानी फूल महोत्सव
हर साल लद्दाख पर्यटन विभाग अप्रैल महीने में खुबानी फूल महोत्सव आयोजित करता है। इस बार यह 8 से 16 अप्रैल तक कारगिल और लद्दाख जिलों में मनाया जाएगा। इस दौरान पर्यटक पारंपरिक नृत्य-संगीत का आनंद ले सकते हैं, स्थानीय व्यंजनों का स्वाद चख सकते हैं और हस्तशिल्प की झलक देख सकते हैं। यह समय लद्दाख के ग्रामीण जीवन को करीब से समझने का बेहतरीन मौका देता है।
लद्दाख खुबानी फूल महोत्व डेट 2026
लद्दाख का मशहूर खुबानी फूल उत्सव जल्द ही शुरू होने वाला है। लोकल भाषा में इस फेस्टिवल को ‘चुली मेंडोक’ कहा जाता है। जो हर साल अप्रैल में लद्दाख घाटियों को गुलाबी और सफेद फूलों से सजा देता है। वर्ष 2026 में यह खुबानी फूल महोत्सव 8 से 16 अप्रैल के बीच लेह और कारगिल के कई गांवों में मनाया जाएगा। जहां प्रकृति की खूबसूरती, स्थानीय संस्कृति और पारंपरिक व्यंजनों की खास झलक देखने को मिलती है।
खुबानी की खेती का महत्व
लद्दाख में खुबानी की खेती का खास महत्व है। यहाँ की ठंडी और शुष्क जलवायु इन पेड़ों के लिए अनुकूल होती है। स्थानीय लोग खुबानी से जैम, जूस, सूखे मेवे और तेल तैयार करते हैं, जो उनकी आजीविका का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
घूमने के बेहतरीन स्थान
अगर आप इस खूबसूरत नजारे को करीब से देखना चाहते हैं, तो शम वैली, तुर्तुक, आल्ची और सास्पोल जैसे स्थान सबसे उपयुक्त हैं। यहाँ फूल जल्दी खिलते हैं और भीड़ भी कम रहती है, जिससे आप सुकून से प्रकृति का आनंद ले सकते हैं।
यात्रा का सही समय और तैयारी
अप्रैल का महीना लद्दाख घूमने के लिए शानदार होता है, लेकिन यहाँ का मौसम तेजी से बदलता है। ऊँचाई ज्यादा होने के कारण हवा पतली होती है, इसलिए यात्रा से पहले मौसम की जानकारी और जरूरी तैयारी करना जरूरी है।
