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खतरनाक भी, खूबसूरत भी: 'अमर लोगों के पुल' की अनोखी दास्तान, हमेशा याद रखेंगे Bridge of the immortals का सफर

Bridge of the immortals ऊंचे ग्रेनाइट पहाड़ों के बीच एक संकरी घाटी के ऊपर बना है। पुल तक पहुंचने के लिए कार से सीधे वहां नहीं पहुंचा जा सकता। पर्यटकों को पहाड़ी रास्तों से होकर ट्रेक करना पड़ता है।

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जानिए अमर लोगों का पुल क्यों कहलाता है ये ब्रिज? जीवन भीर याद रहता है सफर (Photo: Pinterest)

Bridge of the immortals: इस धरती पर एक ऐसा पुल है, जिसे देखकर पहली नजर में यकीन करना मुश्किल हो सकता है कि यह वास्तव में किसी पहाड़ का हिस्सा है या किसी कल्पना की दुनिया का दृश्य। चारों तरफ ऊंची ग्रेनाइट की चट्टानें, नीचे हजारों फीट गहराई में तैरते बादल और चट्टानों के बीच उगे पुराने चीड़ के पेड़। इसी अद्भुत नजारे के बीच मौजूद है ‘ब्रिज ऑफ द इम्मॉर्टल्स’ यानी अमर लोगों का पुल।

इसे बुशियान ब्रिज और फेयरी ब्रिज के नाम से भी जाना जाता है। यह पुल पूर्वी चीन के अनहुई प्रांत में स्थित प्रसिद्ध हुआंगशान पर्वत यानी येलो माउंटेन्स में है। यहां पहुंचना अपने आप में एक रोमांचक अनुभव है। हर साल बड़ी तादाद में पर्यटक यहां पहुंचते हैं।

पहाड़ों और बादलों के बीच चलता रास्ता

ब्रिज ऑफ द इम्मॉर्टल्स हुआंगशान के ऊंचे ग्रेनाइट पहाड़ों के बीच एक संकरी घाटी के ऊपर बना है। पुल तक पहुंचने के लिए कार से सीधे वहां नहीं पहुंचा जा सकता। पर्यटकों को पहाड़ी रास्तों से होकर ट्रेक करना पड़ता है।

यह रास्ता आसान नहीं है। कई जगह चढ़ाई काफी खड़ी है और रास्ते में बड़ी संख्या में सीढ़ियां हैं। वैसे शायद यही कठिन सफर इस जगह को और खास बना देता है। रास्ते में कभी सामने ऊंची चट्टान की दीवार दिखाई देती है, तो अगले ही पल बादल हटते हैं और दूर तक फैले पहाड़ नजर आने लगते हैं।

आखिर ‘अमर लोगों का पुल’ नाम क्यों?

इस पुल के नाम के पीछे चीन की पुरानी मान्यताओं और हुआंगशान से जुड़ी अमरत्व की कहानियां हैं। यूनेस्को के अनुसार, साल 747 की तांग राजवंश काल की एक कहानी में हुआंगशान को अमरत्व की औषधि की खोज से जोड़ा गया था।

यही वजह है कि बादलों के बीच ऊंचे पहाड़ों पर बना यह पुल भी अमरत्व की कल्पना से जुड़ गया। दूर से देखने पर ऐसा लगता है जैसे पुल सीधे बादलों की दुनिया में जा रहा हो।

सिर्फ पुल नहीं, पूरा हुआंगशान है खास

ब्रिज ऑफ द इम्मॉर्टल्स को देखने आने वाले पर्यटकों के लिए सिर्फ यह पुल ही आकर्षण नहीं है। हुआंगशान का पूरा इलाका अपने अनोखे प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है।

यहां ऊंची ग्रेनाइट चोटियां, अजीब आकार की चट्टानें, झरने, खड़ी पहाड़ी दीवारें और बादलों का समुद्र दिखाई देता है। कई बार पहाड़ों की चोटियां बादलों से इस तरह बाहर निकलती हैं, जैसे वे आसमान में तैर रही हों। यूनेस्को ने भी हुआंगशान के इस विशिष्ट प्राकृतिक परिदृश्य को उसकी खास पहचान माना है।

Bridge of immortals (Photo: Pinterest)

Bridge of immortals (Photo: Pinterest)

चट्टानों पर उगे हैं पेड़

हुआंगशान के चीड़ के पेड़ भी इस इलाके की खूबसूरती का अहम हिस्सा हैं। ये पेड़ सामान्य जमीन पर नहीं, बेहद कठिन चट्टानी जगहों पर उगे दिखाई देते हैं।

इन पेड़ों, ग्रेनाइट की चोटियों और बादलों से ढके पहाड़ों का मेल इतना खूबसूरत है कि हुआंगशान सदियों से चीनी कलाकारों और कवियों को आकर्षित करता रहा है। यूनेस्को के मुताबिक, इस पहाड़ी क्षेत्र ने चीन की पारंपरिक ‘शानशुई’ यानी ‘पहाड़ और पानी’ वाली लैंडस्केप पेंटिंग शैली के विकास को भी प्रभावित किया।

मौसम बदलते ही बदल जाता है नजारा

ब्रिज ऑफ द इम्मॉर्टल्स की खूबसूरती का एक और पहलू मौसम है। साफ मौसम में ग्रेनाइट की चोटियां दूर तक दिखाई देती हैं। वहीं जब पहाड़ों पर धुंध और बादल छा जाते हैं, तो पूरा इलाका किसी रहस्यमयी दुनिया जैसा लगने लगता है।

यही वजह है कि इस पुल को जो एक बार देखता है वो सालों तक यहां का नजारा चाहकर भी नहीं भूल पाता। ये पहाड़, बादल, चीड़ के पेड़, लोककथाओं और चीनी कला-संस्कृति से होकर गुजरने वाला ऐसा अनुभव है जो ताउम्र साथ रहता है।

इसी कारण ‘ब्रिज ऑफ द इम्मॉर्टल्स’ नाम इस छोटे से पुल पर बिल्कुल सटीक बैठता है। यह प्रकृति और कल्पना के बीच बना ऐसा पुल है, जहां पहुंचकर धरती और आसमान के बीच की दूरी कुछ कम सी महसूस होती है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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