इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने वाले बहुत से टैक्सपेयर्स को लगता है कि केवल नौकरी से मिलने वाली सैलरी या बिजनेस की कमाई की जानकारी देना ही काफी है। इसी वजह से कई लोग म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में किए गए निवेश, एसआईपी (SIP) या म्यूचुअल फंड यूनिट्स को बेचने से हुए मुनाफे या घाटे की जानकारी रिटर्न में दर्ज करना भूल जाते हैं या जानबूझकर छिपा लेते हैं। अगर आपका भी टैक्स रिफंड अभी तक बैंक खाते में नहीं आया है, तो इसकी एक बड़ी वजह म्यूचुअल फंड के लेन-देन को आईटीआर में रिपोर्ट न करना हो सकती है।
इनकम टैक्स विभाग रखता है सारी जानकारी
आज के डिजिटल दौर में आयकर विभाग के पास आपके हर बड़े वित्तीय लेन-देन का पूरा ब्योरा पहले से मौजूद होता है। जब भी आप म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं, रिडीम (पैसा निकालते) करते हैं या स्विच करते हैं, तो फंड हाउस (AMC) इस जानकारी को टैक्स विभाग के साथ साझा करते हैं। यह सारा डेटा आपके एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और फॉर्म 26AS में अपने आप दिखने लगता है। जब टैक्सपेयर अपने आईटीआर में म्यूचुअल फंड के आंकड़ों को दर्ज नहीं करता है, तो सिस्टम में डेटा मिसमैच (Data Mismatch) की स्थिति पैदा हो जाती है।
अटक जाता है रिफंड
डेटा में अंतर आते ही आयकर विभाग का ऑटोमेटेड सिस्टम आपके ITR को प्रोसेस करने से रोक देता है, जिससे आपका रिफंड लटक जाता है। विभाग इसे जानकारी छिपाने या टैक्स चोरी की कोशिश के रूप में देख सकता है। ऐसी स्थिति में केवल रिफंड ही नहीं अटकता, बल्कि आयकर विभाग की ओर से धारा 139(9) के तहत 'डिफेक्टिव रिटर्न' का नोटिस या धारा 142(1) के तहत पूछताछ का नोटिस भी भेजा जा सकता है।
म्यूचुअल फंड के मामले में दो तरह की जानकारियों को आईटीआर में दर्ज करना अनिवार्य होता है। पहला, अगर आपने इक्विटी या डेट म्यूचुअल फंड की यूनिट्स बेची हैं, तो उससे हुए कैपिटल गेन्स (Capital Gains) यानी मुनाफे पर टैक्स नियमों के मुताबिक हिसाब देना होता है। अगर घाटा हुआ है, तो भी उसे दर्ज करना जरूरी है ताकि भविष्य में होने वाले फायदों के साथ उसे सेट-ऑफ (Set-off) किया जा सके। दूसरा, अगर आपको किसी म्यूचुअल फंड स्कीम से डिविडेंड (Dividend) मिला है, तो उसे 'इन्कम फ्रॉम अदर सोर्सेज' में दिखाकर टैक्स स्लैब के अनुसार रिपोर्ट करना होता है।
अटक जाए रिफंड तो क्या करें?
अगर आपसे भी ITR दाखिल करते समय यह चूक हो गई है और रिफंड अटका हुआ है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आप इनकम टैक्स पोर्टल पर जाकर रिवाइज्ड रिटर्न (Revised ITR) दाखिल कर सकते हैं। रिवाइज्ड आईटीआर में अपने AIS के आंकड़ों का मिलान करते हुए म्यूचुअल फंड से जुड़ी सभी पूंजीगत लाभ (Capital Gains) और डिविडेंड की सही जानकारी दर्ज करें। जैसे ही आपकी संशोधित रिटर्न सबमिट और ई-वेरीफाई होगी, आयकर विभाग डेटा का मिलान करके आपका अटका हुआ रिफंड जारी कर देगा।
