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Profile: कौन हैं IIT से पढ़े अरविंद श्रीनिवास जिन्होंने गूगल क्रोम खरीदने के लिए लगा दी 3.02 लाख करोड़ रुपये की बोली

Perplexity AI May Buy Google Chrome: दुनिया भर में 3 अरब से ज्यादा यूजर्स के साथ, क्रोम सिर्फ एक ब्राउजर नहीं बल्कि गूगल के सर्च, विज्ञापन और क्लाउड सेवाओं का सबसे बड़ा हथियार है। ऐसे में महज तीन साल पुरानी एक एआई कंपनी द्वारा इसे खरीदने की पेशकश ने सभी का ध्यान खींच लिया है।

Who is Arvind Srinivas/ Photo-Linkedin

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अरविंद श्रीनिवास इन दिनों टेक जगत की सुर्खियों में हैं। उनकी कंपनी परप्लेक्सिटी एआई (Perplexity AI) ने हाल ही में गूगल के क्रोम ब्राउजर को खरीदने के लिए 34.5 अरब डॉलर (लगभग 3.02 लाख करोड़ रुपये) का अप्रत्याशित प्रस्ताव दिया है। यह आंकड़ा इसलिए चौंकाने वाला है क्योंकि यह परप्लेक्सिटी की अपनी 14 अरब डॉलर की वैल्यूएशन से भी दोगुने से अधिक है और क्रोम, गूगल के सबसे महत्वपूर्ण प्रोडक्ट्स में से एक है। दुनिया भर में 3 अरब से ज्यादा यूजर्स के साथ, क्रोम सिर्फ एक ब्राउजर नहीं बल्कि गूगल के सर्च, विज्ञापन और क्लाउड सेवाओं का सबसे बड़ा हथियार है। ऐसे में महज तीन साल पुरानी एक एआई कंपनी द्वारा इसे खरीदने की पेशकश ने सभी का ध्यान खींच लिया है।

कौन हैं Perplexity के सीईओ और को-फाउंडर अरविंद श्रीनिवास?

अरविंद श्रीनिवास का जन्म चेन्नई में हुआ। उन्होंने आईआईटी मद्रास से पढ़ाई की और इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका चले गए, जहां उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले से पढ़ाई पूरी की। अपने शुरुआती करियर में उन्होंने मशहूर एआई रिसर्चर योशुआ बेंजियो के साथ काम किया और गूगल में भी अपनी सेवाएं दी। इन अनुभवों ने उन्हें सर्च और इंटरनेट तकनीकों की गहरी समझ दी।

साल 2022 में, डेनिस याराट्स, जॉनी हो और एंडी कोनविन्स्की के साथ मिलकर उन्होंने परप्लेक्सिटी एआई की शुरुआत की। यह एआई-पावर्ड सर्च इंजन है, जो रियल-टाइम जानकारी का इस्तेमाल करके यूजर्स से सीधे चैट करता है। Perplexity का मुकाबला चैटजीपीटी, ग्रोक और गूगल जेमिनी के साथ है।

गूगल के लिए कठिन समय

Perplexity की ओर से यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब गूगल अमेरिका में एंटी-ट्रस्ट मामले में बड़ी हार का सामना कर रहा है। अमेरिकी जिला न्यायाधीश अमित पी. मेहता ने पाया कि गूगल ने अपने सर्च एकाधिकार को अवैध रूप से बनाए रखा, आंशिक रूप से डिवाइस और ब्राउजर्स पर डिफॉल्ट सर्च इंजन बने रहने के लिए भारी रकम चुकाकर। इस मामले में एक संभावित उपाय यह भी हो सकता है कि गूगल को क्रोम बेचने के लिए मजबूर किया जाए, हालांकि गूगल ने फैसले को चुनौती देने की बात कही है।

प्रस्ताव के पीछे की अटकलें

सोशल मीडिया पर कुछ लोग इस कदम को अव्यवहारिक मान रहे हैं, क्योंकि क्रोम गूगल के इकोसिस्टम से गहराई से जुड़ा हुआ है। वहीं कुछ विशेषज्ञ इसे एक पब्लिसिटी स्टंट मानते हैं, क्योंकि इस प्रस्ताव को सार्वजनिक करके परप्लेक्सिटी ने वैश्विक ध्यान आकर्षित कर लिया है और इंटरनेट प्रतिस्पर्धा के भविष्य पर हो रही चर्चा में खुद को शामिल कर लिया है।

वित्तीय चुनौतियां

परप्लेक्सिटी अब तक करीब 1 अरब डॉलर की फंडिंग जुटा चुकी है, जिसमें एनवीडिया और सॉफ्टबैंक जैसे बड़े निवेशक शामिल हैं, लेकिन 34.5 अरब डॉलर का नकद सौदा करने के लिए उसे भारी बाहरी निवेश की जरूरत होगी। प्राइवेट इक्विटी से यह संभव हो सकता है, लेकिन इसमें बड़ा कर्ज और संचालन संबंधी जोखिम होंगे और अगर खरीदारी हो भी गई, तो गूगल के इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम से बाहर क्रोम चलाना उसकी वैल्यू को कम कर सकता है।

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Pradeep Pandey
Pradeep Pandey Author

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिय... और देखें

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