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एंड्रॉयड स्मार्टफोन के ये इन 3 फीचर्स का कभी था खूब बोलबाला, आज भी लोग करते हैं मिस

बेशक आज हमारे हाथ में प्रीमियम दिखने वाले फोन हैं, लेकिन सच तो यह है कि यूजर्स आज भी उन पुराने, काम के फीचर्स को शिद्दत से मिस करते हैं। आइए आपको तीन ऐसे फीचर के बारे में बताते हैं जो जिनकी आज भी जरूरत है लेकिन अब इनका मिलना लगभग मुश्किल है

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स्मार्टफोन कंपनियों ने अब कई सारे फीचर्स को हटा दिया है। (फोटो क्रेडिट-iStock)

अब स्मार्टफोन्स काफी ज्यादा एडवांस हो चुके हैं। अब आपको पहले से कहीं ज्यादा बड़ी स्टोरेज, बड़ी बैटरी, पावरफुल चिपसेट और साथ ही दमदार कैमरा सेटअप मिलने लगा है। स्मार्टफोन ने हमारी डेली रूटीन लाइफ को बेहद आसान बना दिया है। अब आपको पहले की तुलना में कहीं अधिक एडवांस कनेक्टिविटी फीचर्स भी देखने को मिलते हैं। टेक्नोलॉजी के बदलते दौर में स्मार्टफोन्स काफी ज्यादा आगे निकल चुके हैं। बेहतर बनाने की होड़ में कुछ बुनियादी और जरूरी फीचर जो कभी बहुत जरूरी हुआ करते थे उनकी बलि चढ़ गई है। हालांकि आज भी इन फीचर्स को लोग मिस करते हैं।

बेशक आज हमारे हाथ में प्रीमियम दिखने वाले फोन हैं, लेकिन सच तो यह है कि यूजर्स आज भी उन पुराने, काम के फीचर्स को शिद्दत से मिस करते हैं। आइए आपको तीन ऐसे फीचर के बारे में बताते हैं जो जिनकी आज भी जरूरत है लेकिन अब इनका मिलना लगभग मुश्किल है।

3.5mm हेडफोन जैक

एक दौर था जब फोन के ऊपर या नीचे मिलने वाला यह छोटा सा छेद सबसे बड़ा हमसफर होता था। बिना चार्जिंग की चिंता किए, जब मर्जी आए इयरफोन प्लग करो और अपना फेवरेट म्यूजिक का आननंद लो। 3.5 जैक को हटाने की शुरुआत सबसे पहले एप्पल की तरफ से की गई है। जब कंपनी ने आईफोन से इसे हटाया तो देखा-देखी में दूसरी कंपनियों ने भी इसे हटाना शुरू कर दिया। कंपनियों ने इसके पीछे वजह दी कि इसे हटाने से फोन को पतला बनाने और बड़ी बैटरी देने में मदद मिलती है।

ब्लूटूथ इयरबड्स को बार-बार चार्ज करने का झंझट रहता है। साथ ही, गेमिंग या वीडियो एडिटिंग के दौरान जो 'जीरो लेटेंसी' वायर्ड इयरफोन में मिलती है, वो आज भी बजट वायरलेस बड्स में नहीं मिलती।

रिमूवेबल बैटरी

पुराने समय में अगर फोन हैंग हो जाता था, तो लोग बिना सोचे-समझे बैक पैनल खोलकर बैटरी बाहर निकाल देते थे और फोन मिनटों में चकाचक हो जाता था। अगर बैटरी खराब हुई, तो नई बैटरी लाकर खुद ही बदल लो, सर्विस सेंटर जाने का कोई झंझट ही नहीं था।

स्मार्टफोन को वाटरप्रूफ बनाने और प्रीमियम ग्लास या मेटल यूनिबॉडी डिजाइन देने के लिए कंपनियों ने बैटरी को अंदर ही फिक्स (Non-removable) कर दिया। आज अगर आपके फोन की बैटरी खराब हो जाए या बैक पैनल फूल जाए, तो आपको हजारों रुपये खर्च करके सर्विस सेंटर जाना पड़ता है। इसके अलावा, लंबी यात्राओं पर लोग एक एक्स्ट्रा चार्ज्ड बैटरी साथ रखते थे, जिससे पावरबैंक ले जाने की जरूरत ही नहीं पड़ती थी।

नोटिफिकेशन एलईडी लाइट

यह एक छोटा लेकिन बेहद जादुई फीचर था। फोन की स्क्रीन बंद होने पर भी एक छोटी सी टिमटिमाती लाइट आपको बता देती थी कि आपके फोन में क्या चल रहा है। मिसकॉल के लिए अलग लाल रंग, वॉट्सऐप मैसेज के लिए अलग हरा रंग और चार्जिंग के लिए अलग रंग की लाइट ब्लिंक करती थी।

क्यों हुआ गायब? बेजल्स को पूरी तरह खत्म करने और 'बेजल-लेस' या 'पंच-होल' डिस्प्ले लाने के चक्कर में इस छोटी सी एलईडी लाइट को स्क्रीन पर जगह नहीं मिल पाई। कंपनियों ने इसकी जगह 'ऑलवेज ऑन डिस्प्ले' (Always-On Display) का विकल्प दे दिया।

ऑलवेज ऑन डिस्प्ले बहुत ज्यादा बैटरी कंज्यूम करता है। वहीं, नोटिफिकेशन एलईडी बिना स्क्रीन ऑन किए और बिना बैटरी खर्च किए दूर से ही बता देती थी कि फोन छूने की जरूरत है या नहीं।

Gaurav Tiwari
गौरव तिवारीauthor

गौरव तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट को कवर करते हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 9 वर्षों के अनुभव के साथ, गौरव तकनीकी दुनिया की तेजी से बदलती जानकारियो को सरल और समझने योग्य भाषा में पेश करने के लिए जाने जाते हैं। वह गैजेट रिव्यू, टेलिकॉम अपडेट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर क्राइम, टिप्स एंड ट्रिक्स, ई-कॉमर्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर की महत्वपूर्ण खबरों पर लगातार काम करते हैं। गौरव अब तक 10,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। उनकी स्टोरीज न सिर्फ टेक-सेवी पाठकों के लिए उपयोगी होती हैं, बल्कि आम यूजर्स को भी नई तकनीक समझने और अपनाने में मदद करती हैं।

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