महंगाई बढ़ने और डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने से पहले ही खाने-पीने की चीजों और पेट्रोल-डीज़ल जैसी ज़रूरी चीजें महंगी हो चुकी हैं। अब लोगों की परेशानी और बढ़ गई है, क्योंकि स्मार्टफोन और लैपटॉप भी लगातार महंगे होते जा रहे हैं। इसमें Apple के iPhone, Samsung की Galaxy सीरीज़, और Dell व ASUS के लैपटॉप शामिल हैं। जानकार अनुमान लगा रहे हैं कि साल के दूसरे हिस्से में स्मार्टफोन, लैपटॉप, वीडियो गेम कंसोल, एक्सटर्नल स्टोरेज और यहां तक कि टीवी की कीमतें और भी बढ़ सकती हैं।
टेक कंपनियां अब ज्यादा AI डेटा सेंटर बना रही हैं और ChatGPT, Claude और Gemini जैसी AI सेवाओं की बढ़ती मांग को पूरा करने में लगी हैं। इसके लिए ज्यादा मेमोरी और दूसरे जरूरी पार्ट्स की जरूरत पड़ रही है। इसका असर स्मार्टफोन, लैपटॉप और टीवी जैसे रोज इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की सप्लाई पर पड़ रहा है, जिससे उनकी उपलब्धता और कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है।
अब AI को सिर्फ नौकरियां कम करने के लिए ही नहीं, बल्कि स्मार्टफोन और रोज़मर्रा में इस्तेमाल होने वाले जरूरी इलेक्ट्रॉनिक सामान की बढ़ती कीमतों के लिए भी जिम्मेदार माना जा रहा है। AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, इसलिए RAM और मेमोरी चिप्स की मांग भी लगातार बढ़ेगी। इससे ये पार्ट्स महंगे और कम उपलब्ध हो सकते हैं। इसका असर अभी से सप्लाई पर दिखने लगा है, जिससे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की कीमतें बढ़ने का खतरा बढ़ गया है।
बेशक, दुनिया की सबसे बड़ी मेमोरी बनाने वाली कंपनियां – Samsung, SK Hynix और Micron इस मौके का फायदा उठा रही हैं। वे आम इस्तेमाल के प्रोडक्ट से अपने संसाधन हटाकर AI कंपनियों के साथ बड़े-बड़े सौदे कर रही हैं।
RAM और इसका महत्व
Random Access Memory, या RAM, हर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का एक बहुत जरूरी हिस्सा है। असल में, यह आपके स्मार्टफोन और लैपटॉप का एक बहुत ही अहम पार्ट है, क्योंकि Central Processing Unit (CPU) इसका इस्तेमाल उस जानकारी को स्टोर करने के लिए करता है जिसे तुरंत एक्सेस करने की जरूरत होती है। आपके PC और स्मार्टफ़ोन की परफॉर्मेंस इस बात पर निर्भर करती है कि RAM और CPU एक-दूसरे के साथ कितनी अच्छी तरह से तालमेल बिठाते हैं। अगर आपके पास काफी RAM नहीं है, तो परफॉर्मेंस कमजोर होगी।
RAM किसी भी कंप्यूटर या स्मार्टफोन के लिए बहुत जरूरी होती है, क्योंकि यही ऑपरेटिंग सिस्टम और ऐप्स को सही तरीके से चलाने में मदद करती है। हर ऐप को काम करने के लिए थोड़ी मेमोरी चाहिए होती है। अगर आपके PC या फोन में पर्याप्त RAM नहीं होती, तो ऐप्स धीमे चलने लगते हैं या कई बार बिल्कुल काम नहीं करते। इसी वजह से OpenAI, Anthropic, Google और Meta जैसी AI कंपनियां भी अपने बड़े डेटा सेंटर और सर्वर चलाने के लिए भारी मात्रा में RAM का इस्तेमाल कर रही हैं।
जैसे-जैसे टेक कंपनियां AI डेटा सेंटर्स पर अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं और कंज्यूमर्स और एंटरप्राइजेज दोनों के लिए AI टूल्स को पावर देने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर बना रही हैं, कंप्यूटर मेमोरी की बढ़ती कीमत भी एक ऐसा फैक्टर है जो टेक दिग्गजों के खर्च को बढ़ा रहा है।
एप्पल प्रोडक्ट के भी बढ़ सकते हैं दाम
हालांकि Apple, Google और Meta की तरह AI डेटा सेंटर्स नहीं बना रहा है, फिर भी उसे दूसरे टेक दिग्गजों जितनी ही मेमोरी चिप्स की ज़रूरत है - डेटा सेंटर्स के लिए नहीं, बल्कि अपने iPhones, Macs और iPads के लिए। Apple के CEO टिम कुक ने पिछले हफ्ते अपनी कंपनी की अर्निंग्स कॉल के Q&A सेशन के दौरान कहा, "हमारा मानना है कि मेमोरी की कीमतों का हमारे बिजनेस पर बढ़ता असर पड़ेगा।"
कुक ने माना कि कंपनी के प्रोडक्ट्स पर लगातार महंगी हो रही RAM का असर सचमुच पड़ रहा है। Apple जैसी बड़ी और ताकतवर कंपनी के सप्लायर्स के साथ लंबे समय के डील्स होते हैं और आमतौर पर RAM, स्क्रीन्स और दूसरे कंपोनेंट्स पर उसे पहली प्राथमिकता मिलती है, लेकिन इन डील्स को फिर से एडजस्ट करना पड़ता है और कीमतों पर फिर से बातचीत करनी पड़ती है। आखिरकार, Apple की RAM सप्लाई खत्म हो जाएगी, और कंपनी को कुछ प्रोडक्ट्स के लिए ज़्यादा कीमत वसूलने पर मजबूर होना पड़ेगा। मानें या न मानें, Apple कभी भी अपने मुनाफे पर चोट नहीं आने देगा, और आखिर में यह बढ़ा हुआ खर्च कंज्यूमर्स को ही उठाना पड़ेगा।
सैमसंग को 49 गुना ज्यादा मुनाफा
बिक्री के मामले में दुनिया की सबसे बड़ी मेमोरी चिप बनाने वाली कंपनी Samsung ने पिछले हफ्ते रिकॉर्ड तिमाही मुनाफा दर्ज किया, जिसकी वजह चिप से होने वाली कमाई में 49 गुना की जबरदस्त बढ़ोतरी थी। कंपनी ने कहा कि उसे उम्मीद है कि अगले साल सप्लाई की भारी कमी और भी गहरी हो जाएगी, क्योंकि उसके कस्टमर्स AI पर खर्च बढ़ा रहे हैं, जिससे उसकी मेमोरी चिप्स की कीमतें और बढ़ जाएंगी।
