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Google Doodle Today: गूगल ने 200 साल पुराने इस म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट को किया सलाम, बनाया खास गूगल डूडल

Google Doodle Today: गूगल आज के डूडल में अकॉर्डियन (google doodle Accordion) को सलाम कर रहा है। इसकी विशेषता के बारे में बात करते हुए गूगल ने कहा, "शुरुआती अकॉर्डियन में सिर्फ एक तरफ बटन होते थे, और इनमें से प्रत्येक बटन पूरे कॉर्ड की ध्वनि उत्पन्न करता था। इसकी एक और प्रभावशाली विशेषता यह है कि एक ही बटन दो कॉर्ड उत्पन्न कर सकता था।

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Google Doodle Today

Google Doodle Today: गूगल आज म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट अकॉर्डियन की सालगिरह मना रहा है, जिसका पेटेंट आज ही के दिन 1829 में यानी करीब 200 साल पहले किया गया था। इस इंस्ट्रूमेंट का नाम जर्मन शब्द "अकोर्ड" से आया है, जिसका अर्थ है कॉर्ड। गूगल डूडल की मदद से खास अंदाज में फ्री-रीड इंस्ट्रूमेंट को श्रद्धांजलि दे रहा है। अकॉर्डियन (Google Doodle Accordion) न सिर्फ यूरोप बल्कि दुनियाभर में लोकप्रियता हुआ। 200 साल बाद भी यह दुनियाभर के जर्मन समारोहों में सुना जा सकता है।

क्या है अकॉर्डियन?

गूगल डूडल में अकॉर्डियन को बजाते हुए दिखाया गया है। बता दें कि अकॉर्डियन पॉप, जैज, लोक और शास्त्रीय सहित विभिन्न संगीत शैलियों पर अपने महत्वपूर्ण प्रभाव के लिए जाना जाता है। इस वर्सेटाइल इंस्ट्रूमेंट ने संगीत जगत पर अमिट छाप छोड़ी है। गूगल ने इसे एनिमेटेड डूडल के जरिए पेश किया है। अकॉर्डियन के इतिहास पर बोलते हुए, गूगल डूडल कहता है, "1800 के दशक के अंत में यूरोप भर में लोक संगीतकारों के बीच इसकी लोकप्रियता के कारण जर्मनी में निर्माताओं ने अपने अकॉर्डियन प्रोडक्शन में वृद्धि की थी।"

गूगल डूडल में क्या है खास?

गूगल आज के डूडल में अकॉर्डियन को सलाम कर रहा है। इसकी विशेषता के बारे में बात करते हुए गूगल ने कहा, "शुरुआती अकॉर्डियन में सिर्फ एक तरफ बटन होते थे, और इनमें से प्रत्येक बटन पूरे कॉर्ड की ध्वनि उत्पन्न करता था। इसकी एक और प्रभावशाली विशेषता यह है कि एक ही बटन दो कॉर्ड उत्पन्न कर सकता था। अकॉर्डियन न सिर्फ यूरोप बल्कि दुनियाभर में लोकप्रियता हुआ। आज यानी 200 साल बाद भी यह जर्मन समारोहों में सुना जा सकता है।

Vishal Maithil
Vishal Mathelauthor

विशाल मैथिल टाइम्स नाऊ नवभारत में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर 2023 से जुड़े हुए हैं। पत्रकारिता में 6+ वर्षों के अनुभव के साथ वह टेक्नोलॉजी, सोशल मीडिया, गैजेट्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषयों पर गहरी समझ रखते हैं। वे ऑटोमोबाइल, बिजनेस, यूटिलिटी और हाइपरलोकल से लेकर एजुकेशन और इंटरनेशनल बीट्स पर भी काम कर चुके हैं। भोपाल से ताल्लुक रखने वाले विशाल ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से मीडिया रिसर्च में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। रिसर्च के क्षेत्र में उनके कई पेपर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने दैनिक भास्कर, अमर उजाला, मासिक पत्रिका "संदेश" और सोशल मीडिया फर्म में भी काम किया है। टेक-यूटिलिटी और बिजनेस से जुड़ी खबरों को आसान और काम की भाषा में समझाना विशाल को खूब आता है। वो कोशिश करते हैं कि कम शब्दों में ज्यादा और साफ-सुथरी जानकारी मिल जाए। किताबें पढ़ना और संगीत सुनना उनका पसंदीदा काम है। आप इनसे Vishal.mathel@timesgroup.com पर संपर्क कर सकते हैं।

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