AI ने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी का कंप्यूटर हैक किया, लाखों की सैलरी पाने वाले हैकर्स को दी मात
- Authored by: Pradeep Pandey
- Updated Dec 14, 2025, 02:43 PM IST
ARTEMIS ने करीब 8,000 डिवाइसेज जिनमें सर्वर, कंप्यूटर और स्मार्ट सिस्टम शामिल थे, को स्कैन किया। नतीजा हैरान करने वाला रहा। ARTEMIS ने 10 में से 9 प्रोफेशनल पेनिट्रेशन टेस्टर्स से बेहतर प्रदर्शन किया और कई ऐसी कमजोरियां पकड़ लीं, जिन्हें अनुभवी मानव हैकर्स भी नजरअंदाज कर गए।
AI hacks Stanford University's computer /photo-AI
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इंसानों के बीच चल रही प्रतिस्पर्धा अब साइबर सुरक्षा के मैदान में भी साफ दिखने लगी है। अमेरिका की प्रतिष्ठित स्टैनफोर्ट यूनिवर्सिटी (Stanford University) में हुए एक चौंकाने वाले प्रयोग में एक AI एजेंट ने वह कर दिखाया, जो अब तक सिर्फ अनुभवी हैकर्स का काम माना जाता था। इस AI ने न सिर्फ स्टैनफोर्ड के कंप्यूटर नेटवर्क में छिपी कमजोरियों को खोज निकाला, बल्कि छह अंकों की सैलरी पाने वाले प्रोफेशनल हैकर्स को भी पीछे छोड़ दिया।
स्टैनफोर्ड नेटवर्क बना AI बनाम इंसान की जंग का मैदान
स्टैनफोर्ड के रिसर्चर्स द्वारा विकसित इस AI एजेंट का नाम ARTEMIS है। इसे विश्वविद्यालय के प्राइवेट और पब्लिक कंप्यूटर साइंस नेटवर्क पर 16 घंटे के लिए टेस्ट किया गया। इस दौरान ARTEMIS ने करीब 8,000 डिवाइसेज जिनमें सर्वर, कंप्यूटर और स्मार्ट सिस्टम शामिल थे, को स्कैन किया। नतीजा हैरान करने वाला रहा। ARTEMIS ने 10 में से 9 प्रोफेशनल पेनिट्रेशन टेस्टर्स से बेहतर प्रदर्शन किया और कई ऐसी कमजोरियां पकड़ लीं, जिन्हें अनुभवी मानव हैकर्स भी नजरअंदाज कर गए।
रिसर्च क्या कहती है?
इस स्टडी को स्टैनफोर्ड के शोधकर्ता जस्टिन लिन, एलियट जोन्स और डोनोवन जैस्पर ने लीड किया है। रिसर्च के मुताबिक, ARTEMIS को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वह लंबे समय तक बिना रुके, पूरी तरह ऑटोनॉमस तरीके से काम कर सके जो अब तक ज्यादातर AI सिस्टम नहीं कर पाते थे।
तुलना के लिए, 10 अनुभवी मानव हैकर्स को कम से कम 10 घंटे काम करने को कहा गया, जबकि ARTEMIS ने 16 घंटे में नेटवर्क की गहराई से जांच की। पहले 10 घंटों में ही AI ने 82% सटीकता के साथ 9 वैध सुरक्षा खामियां खोज लीं।
लागत में जमीन-आसमान का फर्क
सबसे चौंकाने वाली बात इसकी लागत है। ARTEMIS को चलाने का खर्च करीब 18 डॉलर (लगभग ₹1,630) प्रति घंटा है, वहीं एडवांस वर्जन के लिए 59 डॉलर (करीब ₹5,343) प्रति घंटा खर्च करना होगा, जबकि अमेरिका में एक प्रोफेशनल पेनिट्रेशन टेस्टर की औसत सालाना सैलरी $125,000 (करीब ₹1.13 करोड़) है। रिसर्चर्स का कहना है कि इस तरह के AI टूल्स साइबर सुरक्षा ऑडिट की लागत को ड्रामेटिकली कम कर सकते हैं।
इंसानों से आगे कैसे निकला ARTEMIS?
ARTEMIS की सबसे बड़ी ताकत उसका मल्टी-टास्किंग अप्रोच है। जैसे ही उसे नेटवर्क में कुछ संदिग्ध दिखता है, वह तुरंत छोटे-छोटे “सब-एजेंट्स” लॉन्च कर देता है, जो समानांतर रूप से जांच शुरू कर देते हैं। इंसान एक समय में ऐसा नहीं कर सकता।
एक मामले में AI ने एक पुराने सर्वर की कमजोरी पकड़ ली, जिसे मानव हैकर्स ने इसलिए छोड़ दिया था क्योंकि उनका ब्राउजर उसे खोल ही नहीं पा रहा था। ARTEMIS ने कमांड-लाइन के जरिए सिस्टम तक पहुंच बना ली।