Joe Root: इंग्लैंड के टेस्ट कप्तान जो रूट इस समय अपने करियर के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। इस समय उनका बल्ला पूरी तरह से खामोश है। उन्होंने पूरे घरेलू सीजन में सिर्फ दो बार 50 रन का आंकड़ा छुआ है और उनका औसत गिरकर 29.44 पर आ गया है। यह उनके 14 साल के इंटरनेशनल करियर में दूसरा सबसे कम घरेलू औसत है। सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात उनका बार-बार LBW आउट होना है। वह पिछले 7 टेस्ट मैचों में 9 बार LBW आउट हुए हैं।
जो रूट को नहीं फॉर्म की चिंता
जो रूट ने लॉर्ड्स टेस्ट में पाकिस्तान के खिलाफ 194 रन से जीत के बाद अपनी फॉर्म पर बात की है। उन्होंने कहा कि उन्हें फॉर्म की कोई चिंता नहीं है। रूट का कहना है कि उन्होंने ऐसे ही टेस्ट क्रिकेट में 14 हजार रन पूरे नहीं किए हैं। उनका कहना है, "मैंने यह खेल बहुत लंबे समय तक खेला है। मैंने हमेशा मुश्किलों का हल निकाला है और मुझे भरोसा है कि इस बार भी निकाल लूंगा। मैंने ऐसे ही 14 हजार रन नहीं बनाए हैं। 15 साल तक इस लेवल पर खेलने की कोई वजह तो होगी।"
किस्मत पर फोड़ा खराब फॉर्म का ठीकरा
इसके साथ ही उन्होंन अपनी खराब फॉर्म का ठीकरा किस्मत पर भी फोड़ा। रूट ने अपनी LBW की समस्या पर खुलकर बात करते हुए कहा कि इसमें किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया। यह थोड़ा निराशाजनक जरूर है कि एक ही तरह से आउट हो रहा हूं। लेकिन इसमें 4 बार अंपायर्स कॉल मेरे खिलाफ गया है, जो मेरे पक्ष में भी जा सकता था। इस साल गेंद पहले से कहीं ज्यादा स्विंग हो रही है, इसलिए बल्लेबाजों के लिए मुश्किल हो रही है।" रूट ने इस मुश्किल पिच और हालात के लिए ड्यूक्स गेंद को भी जिम्मेदार ठहराया।
लाल गेंदों को भी बताया जिम्मेदार
उन्होंने कहा कि इस साल गेंद में बदलाव किया गया है। रूट ने कहा, "इस समर गेंदें अलग हैं। मुझे लगता है कि गेंद पर अलग लैकर लगाया गया है। पिछले साल गेंद जल्दी खराब हो जाती थी, इसलिए इस बार कंपनी ने उसे ज्यादा हार्ड बनाया है। अब गेंद पिच पर ज्यादा गड्ढे बना रही है और ज्यादा हिल रही है। पिछले साल इंग्लैंड और भारत की सीरीज में तो कई बार गेंद बदलनी पड़ी थी।" गौरतलब है कि रूट अभी सचिन तेंदुलकर के 15,921 टेस्ट रनों के रिकॉर्ड का पीछा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि टेस्ट क्रिकेट में रन बनाना कभी आसान नहीं होता।
