अध्यात्म

Suryadev Vrat Katha: रविवार व्रत कथा, यहां से पढ़ें सूर्येदेव की कथा, सूर्यदेव की पौराणिक कहानी

Suryadev Vrat Katha(सूर्यदेव व्रत कथा): रविवार का दिन सूर्यदेव को समर्पित होता है। इस दिन सूर्यदेव की पूजा करने से घर में सुख-शांति आती है और रोग से मुक्ति मिलती है। अगर आप सूर्यदेव का व्रत रखते हैं तो उनकी कथा जरूर पढ़नी चाहिए। यहां रविवार व्रत कथा\ सूर्यदेव की कथा मौजूद है।

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सूर्यदेव व्रत कथा (pic credit: AI)

Suryadev Vrat Katha (सूर्यदेव व्रत कथा): हर रविवार को या संक्रांति, षष्ठी व्रत, माघ या चैत्र मास में भी विशेष सूर्य व्रत रखा जाता है। सूर्यदेव का व्रत अत्यंत फलदायी और प्रभावशाली माना जाता है। यह व्रत स्वास्थ्य, तेज, नेत्रज्योति, और राज्य सम्मान प्राप्ति के लिए विशेष रूप से किया जाता है। इसे रविवार व्रत या सूर्य उपासना व्रत भी कहा जाता है। सूर्यदेव की पूजा के बाद इस खास कथा का पाठ भी जरूर किया जाता है। इससे सूर्यदेव की विशेष कृपा बरसती है। यहां से पढ़ें सूर्यदेव की कथा। रविवार व्रत कथा हिंदी में।

Ravivar Vrat Katha (रविवार व्रत कथा)-

प्राचीन काल की बात है। एक बुढ़िया थी जो नियमित तौर पर रविवार के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर नित्यकर्मों से निवृत्त होकर अपने आंगन को गोबर से लीपती थी जिससे वो स्वच्छ हो सके। इसके बाद वो सूर्य देव की पूजा-अर्चना करती थी। साथ ही रविवार की व्रत कथा भी सुनती थी। इस दिन वो एक समय भोजन करती थी और उससे पहले सूर्य देव को भोग भी लगाती थी। सूर्य देव उस बुढ़िया से बेहद प्रसन्न थे। यही कारण था कि उसे किसी भी तरह का कष्ट नहीं था और वो धन-धान्य से परिपूर्ण थी।

जब उसकी पड़ोसन ने देखा की वो बहुत सुखी है तो वो उससे जलने लगी। बढ़िया के घर में गाय नहीं थी इसलिए वो अपनी पड़ोसन के आंगन गोबर लाती थी। क्योंकि उसके यहां गाय बंधी रहती थी। पड़ोसन ने बुढ़िया को परेशान करने के लिए कुछ सोचकर गाय को घर के अंदर बांध दिया। अगले रविवार बुढ़िया को आंगन लीपने के लिए बुढ़िया को गोबर नहीं मिला। इसी के चलते उसने सूर्य देवता को भोग भी नहीं लगाया। साथ ही खुद भी भोजन नहीं किया और पूरे दिन भूखी-प्यासी रही और फिर सो गई।

अगले दिन जब वो सोकर उठी को उसने देखा की उसके आंगन में एक सुंदर गाय और एक बछड़ा बंधा था। बुढ़िया गाय को देखकर हैरान रह गई। उसने गाय को चारा खिलाया। वहीं, उसकी पड़ोसन बुढ़िया के आंगन में बंधी सुंदर गाय और बछड़े को देखकर और ज्यादा जलने की। तो वह उससे और अधिक जलने लगी। पड़ोसन ने उसकी गायब के पास सोने का गोबर पड़ा देखा तो उसने गोबर को वहां से उठाकर अपनी गाय के गोबर के पास रख दिया।

सोने के गोबर से पड़ोसन कुछ ही दिन में धनवान हो गई। ये कई दिन तक चलता रहा। कई दिनों तक बुढ़िया को सोने के गोबर के बारे में कुछ पता नहीं था। ऐसे में बुढ़िया पहले की ही तरह सूर्यदेव का व्रत करती रही। साथ ही कथा भी सुनती रही। इसके बाद जिस दिन सूर्यदेव को पड़ोसन की चालाकी का पता चला। तब उन्होंने तेज आंधी चला दी। तेज आंधी को देखकर बुढ़िया ने अपनी गाय को अंदर बांध दिया। अगले दिन जब बुढ़िया उठी तो उसने सोने का गोबर देखा। तब उसे बेहद आश्चर्य हुआ।

तब से लेकर आगे तक उसने गाय को घर के अंदर ही बांधा। कुछ दिन में ही बुढ़िया बहुत धनी हो गई। बुढ़िया की सुखी और धनी स्थिति देख पड़ोसन और जलने लगी। पड़ोसने उसने अपने पति को समझा-बुझाकर उसे नगर के राजा के पास भेजा। जब राजा ने उस सुंदर गाय को देखा तो वो बहुत खुश हुआ। सोने के गोबर को देखकर तो उसकी खुशी का ठिकाना न रहउसे नगर के राजा के पास भेज दिया। सुंदर गाय को देखकर राजा बहुत खुश हुआ। सुबह जब राजा ने सोने का गोबर देखा तो उसके आश्चर्य का ठिकाना न रहा।

वहीं, बुढ़िया भूखी-प्यासी रहकर सूर्य भगवान से प्रार्थना कर रही थी। सूर्यदेव को उस पर करुणा आई। उसी रात सूर्यदेव राजा के सपने में आए और उससे कहा कि हे राजन, बुढ़िया की गाय व बछड़ा तुरंत वापस कर दो। अगर ऐसा नहीं किया तो तुम पर परेशानियों का पहाड़ टूट पड़ेगा। सूर्यदेव के सपने ने राजा को बुरी तरह डरा दिया। इसके बाद राजा ने बुढ़िया को गाय और बछड़ा लौटा दिया।

राजा ने बुढ़िया को ढेर सारा धन दिया और क्षमा मांगी। वहीं, राजा ने पड़ोसन और उसके पति को सजा भी दी। इसके बाद राजा ने पूरे राज्य में घोषणा कराई की रविवार को हर कोई व्रत किया करे। सूर्यदेव का व्रत करने से व्यक्ति धन-धान्य से परिपूर्ण हो जाता है। साथ ही घर में खुशहाली भी आती है।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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