Shawwal 2026: इस समय इस्लामी कैलेंडर का दसवां महीना शव्वाल चल रहा है, जिसकी शुरुआत ईद-उल-फितर के साथ हो चुकी है। साल 2026 में यह महीना मार्च के अंत में शुरू हुआ और अब 6 अप्रैल तक जारी है। चांद दिखने के अनुसार यह लगभग 17 या 18 अप्रैल तक रह सकता है।
यह महीना सिर्फ रमज़ान के खत्म होने के बाद आने वाला समय नहीं है, बल्कि यह इबादत को जारी रखने, अल्लाह का शुक्र अदा करने और खुद को बेहतर बनाने का मौका भी देता है। इस महीने में 6 रोजे रखने चाहिए। ये इस महीने में कभी भी रखे जा सकते हैं। अगर आपने नहीं रखे हैं तो अभी रख सकते हैं। हदीसों में भी इस महीने के बारे में खास बातें बताई गई हैं।
शव्वाल में रखें 6 रोजे (Shawwal Mei Rakhe 6 Roza)
“مَنْ صَامَ رَمَضَانَ، ثُمَّ أَتْبَعَهُ سِتًّا مِنْ شَوَّالٍ، كَانَ كَصِيَامِ الدَّهْرِ”
(सहीह मुस्लिम)
मतलब: जिसने रमज़ान के रोजे रखे और उसके बाद शव्वाल के 6 रोजे रखे, उसे पूरे साल के रोजे रखने के बराबर सवाब मिलता है। इस हदीस से साफ समझ आता है कि शव्वाल के 6 रोजे रखना कितना अधिक फायदेमंद है। ये रोजे आप लगातार भी रख सकते हैं या बीच-बीच में भी रख सकते हैं।
नियमित करें इबादत (Shawwal Mei Roj Kren Ibadat)
“أَحَبُّ الأَعْمَالِ إِلَى اللَّهِ أَدْوَمُهَا وَإِنْ قَلَّ”
(सहीह बुखारी)
मतलब: अल्लाह को सबसे ज्यादा पसंद वो काम है, जो लगातार किया जाए, चाहे वह थोड़ा ही क्यों न हो। इसका मतलब यह है कि रमज़ान खत्म होने के बाद भी नमाज़, दुआ और अच्छे कामों को जारी रखना चाहिए। थोड़ी इबादत भी अगर रोज की जाए, तो उसका असर ज्यादा होता है।
शव्वाल में क्या करना चाहिए (Shawwal Mei Kya Karna Chahiye)
शव्वाल का महीना हमें यह सिखाता है कि इबादत सिर्फ रमज़ान तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इस दौरान सबसे पहले आपको अपनी नमाज़ को नियमित रखना चाहिए। रमज़ान में जो आदत बनी है, उसे आगे भी जारी रखना जरूरी है।
इसके साथ ही कुरान पढ़ना, दुआ करना और अल्लाह को याद करना भी जारी रखें। यह समय अपने दिल को साफ रखने और अल्लाह के करीब जाने का होता है। इस महीने में जकात और सदका करने का भी बहुत महत्व है। गरीबों की मदद करना, जरूरतमंदों को खाना देना और दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार करना बहुत बड़ा नेक काम माना जाता है।
अगर आपके कुछ रोजे रमज़ान में छूट गए थे, तो उन्हें पूरा करना भी जरूरी है। कई इस्लामी विद्वानों के अनुसार पहले फर्ज रोजों को पूरा करना चाहिए, उसके बाद शव्वाल के रोजे रखने चाहिए। वैसे असली परीक्षा ईद के बाद होती है, जब इंसान यह दिखाता है कि उसने रमज़ान से क्या सीखा। अगर व्यक्ति इस महीने में भी नमाज़, रोजा और अच्छे कामों को जारी रखते हैं, तो यह आपकी जिंदगी में स्थायी बदलाव ला सकता है।
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