अध्यात्म

इस मंदिर में भंडारा कराने के लिए होती है सालों की वेटिंग, जानिए क्यों खास है ये महावीर हनुमान का ये धाम

Siddhbali Hanuman Temple: उत्तराखंड के कोटद्वार शहर के पास मौजूद सिद्धबली हनुमान मंदिर के दर्शन के लिए दूर-दूर से आते हैं। इस मंदिर में भंडारे के लिए सालों पहले नंबर लगाना होता है। आइए जानते हैं क्यों खास है महावीर हनुमान का ये मंदिर...

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सिद्धबली हनुमान मंदिर, कोटद्वार

Siddhbali Hanuman Temple: सुबह के ठीक 9 बजे कार ने शहर की सड़कों को पीछे छोड़ना शुरू किया। मंजिल थी उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के कोटद्वार में स्थित सिद्धबली हनुमान मंदिर। करीब 250-300 किलोमीटर का सफर तय करना था। रास्ते में बदलते मौसम, खेत, जंगल और फिर शिवालिक की पहाड़ियों की पहली झलक यह एहसास दिला रही थी कि यह यात्रा सिर्फ एक धार्मिक स्थल तक पहुंचने की नहीं, बल्कि आस्था और प्रकृति के संग बिताए जाने वाले एक खास दिन की होने वाली है।

करीब पांच घंटे के सफर के बाद जैसे ही कोटद्वार शहर में प्रवेश हुआ, हवा में एक अलग-सी ताजगी महसूस हुई। शहर के बीचों-बीच बहती खोह नदी और उसके किनारे पहाड़ी पर विराजमान सिद्धबली धाम (Siddhbali Dham) दूर से ही दिखाई देने लगा। सड़क किनारे लगी दुकानों पर प्रसाद, सिंदूर, नारियल और बजरंगबली के लाल ध्वज बिक रहे थे। मंदिर की ओर बढ़ते श्रद्धालुओं के चेहरों पर उत्साह साफ झलक रहा था। आज हम आपको अपनी सिद्धबली हनुमान की दर्शन यात्रा से रूबरू कराएंगे। इसके साथ ही इस मंदिर के बारे में विस्तार से जानेंगे।

नदी किनारे बसा आस्था का धाम

इस प्राचीन मंदिर तक पहुंचने के लिए कुछ सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। हर सीढ़ी के साथ बाबा के दर्शन की ललक और तेज होती जाती है और 'जय श्री राम' व 'जय बजरंगबली' के जयकारे कानों में गूंजने लगते हैं। ऊपर पहुंचते ही सामने भगवान हनुमान की भव्य प्रतिमा और चारों ओर फैली हरियाली मन को सुकून देती है। वहीं नीचे बहती खोह नदी और दूर-दूर तक फैली पहाड़ियां इस मंदिर की खूबसूरती को और भी दिव्य बना देती हैं। यही वजह है कि यहां आने वाले कई श्रद्धालु दर्शन के बाद कुछ देर मंदिर परिसर में बैठकर ध्यान लगाते हैं। इसके साथ ही लोग यहां प्राकृतिक नजारों का आनंद लेते हैं।

सिद्धबली धाम नाम क्यों पड़ा

इस मंदिर के 'सिद्धबली' नाम के पीछे भी एक रोचक मान्यता है। कहा जाता है कि इस स्थान पर प्राचीन समय में कई सिद्ध महात्माओं ने तपस्या की थी। बाद में यहां भगवान हनुमान की प्रतिमा की स्थापना हुई और यह स्थान सिद्धबली धाम के नाम से प्रसिद्ध हो गया। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना बजरंगबली अवश्य पूरी करते हैं।

इतिहास से जुड़े कई संदर्भ बताते हैं कि गढ़वाल क्षेत्र के लोगों की इस मंदिर में गहरी आस्था रही है। यही कारण है कि उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान से भी हजारों श्रद्धालु हर सप्ताह यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

भंडारे के लिए सालों की वेटिंग

इस मंदिर में दर्शन का प्लान है तो आपको दर्शन तो तुरंत हो जाएंगे, लेकिन अगर भंडारा कराने की सोच रहे हैं, तो तारीख मिलने में कई साल लग सकते हैं।पहले तो इस बात पर यकीन करना मुश्किल लगा, लेकिन मंदिर से जुड़े लोगों ने बताया कि यहां रोज बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन होता है। जिन भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं, वे बजरंगबली का आभार व्यक्त करने के लिए भंडारा कराने का संकल्प लेते हैं। श्रद्धालुओं की संख्या इतनी अधिक है कि भंडारे की बुकिंग सालों पहले की जाती है।

आस्था और विश्वास का केंद्र है सिद्धबली

मंदिर परिसर में कुछ देर बैठने के दौरान अलग-अलग राज्यों से आए श्रद्धालुओं से बातचीत हुई। किसी ने बताया कि वर्षों पहले यहां मांगी गई नौकरी की मनोकामना पूरी हुई, तो कोई संतान प्राप्ति की खुशी में परिवार सहित दर्शन करने आया था। कई लोग हर साल बिना किसी विशेष कारण के सिर्फ बजरंगबली का आशीर्वाद लेने यहां पहुंचते हैं। यही आस्था इस मंदिर को बाकी धार्मिक स्थलों से अलग बनाती है। यहां भीड़ जरूर रहती है, लेकिन श्रद्धालुओं के चेहरे पर धैर्य और विश्वास साफ दिखाई देता है।

सिर्फ दर्शन तक सीमित नहीं रही यात्रा

मंदिर में दर्शन करते हुए शाम ढलने लगी थी। पहाड़ियों के पीछे सूरज धीरे-धीरे ओझल हो रहा था और मंदिर की घंटियां लगातार गूंज रही थीं। वापसी के लिए कदम बढ़े तो महसूस हुआ कि सुबह 7 बजे शुरू हुआ यह सफर सिर्फ एक मंदिर देखने का नहीं था। यह यात्रा उस आस्था को करीब से समझने की थी, जिसके कारण लोग वर्षों तक भंडारे की अपनी बारी का इंतजार करते हैं।

यदि आप उत्तराखंड की यात्रा पर जा रहे हैं और किसी ऐसे धार्मिक स्थल की तलाश में हैं जहां आध्यात्मिक शांति, प्राकृतिक सुंदरता और लोगों की अटूट श्रद्धा एक साथ देखने को मिले, तो कोटद्वार का सिद्धबली हनुमान मंदिर आपकी यात्रा का अहम पड़ाव जरूर होना चाहिए।

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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