रूस-यूक्रेन युद्ध के साढ़े चार साल बाद यूरोप एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां सवाल केवल यूक्रेन की सुरक्षा का नहीं बल्कि पूरे महाद्वीप की सुरक्षा का बन चुका है। रूस की बैलिस्टिक मिसाइलों, हाइपरसोनिक हथियारों और लंबी दूरी के हमलों ने यूरोपीय देशों को अपनी सुरक्षा रणनीति पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। इसी को देखते हुए यूक्रेन और नौ यूरोपीय देशों ने मिलकर एक नया गठबंधन बनाने की घोषणा की है,जिसका लक्ष्य पूरे यूरोप के लिए साझा बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा क्षमता तैयार करना है। ऐसे में आज हम विस्तार से जानेंगे कि बैलिस्टिक मिसाइलें आखिर इतनी खतरनाक क्यों मानी जाती हैं, इसके साथ ही यह भी आखिर वह क्या वजह है जो यूरोपीय देशों को इस पहल के लिए आगे आना पड़ा। साथ ही यह भी कि रूस की इस पर क्या प्रतिक्रिया है...
फ्रांस की राजधानी पेरिस में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की मौजूदगी में इस पहल का ऐलान किया गया है। गठबंधन में यूक्रेन के अलावा डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, नॉर्वे, स्पेन, स्वीडन और यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं। इन देशों का कहना है कि यूरोप को अब केवल पारंपरिक सैन्य खतरों से नहीं, बल्कि उन बैलिस्टिक मिसाइलों से भी बचाने की जरूरत है जिन्हें रोकना मौजूदा रक्षा प्रणालियों के लिए बेहद मुश्किल साबित हो रहा है।
आखिर यूरोप को अब इस गठबंधन की जरूरत क्यों पड़ी?
रूस ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर हमला शुरू किया था। तब से लेकर अब तक रूस ने सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें और हजारों ड्रोन यूक्रेन पर दागे हैं। इन हमलों का सबसे बड़ा निशाना ऊर्जा संयंत्र,बिजली ग्रिड, बंदरगाह, सैन्य अड्डे और नागरिक ढांचा रहे हैं।युद्ध के शुरुआती वर्षों में यूरोप इस संघर्ष को मुख्य रूप से यूक्रेन तक सीमित मान रहा था,लेकिन समय के साथ स्थिति बदलती गई। मॉस्को की बढ़ती सैन्य क्षमता और आक्रामक बयानबाजी ने यूरोपीय देशों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि अगर भविष्य में खतरा उनकी सीमाओं तक पहुंचा तो क्या वे तैयार होंगे। यही वजह है कि इन देशों को अपने भविष्य को देखते हुए आगे आना पड़ा है। इस बाबत ही पेरिस में जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि यूरोप की सुरक्षा के लिए एकीकृत मिसाइल रक्षा वास्तुकला की जरूरत है,जो भविष्य के मिसाइल खतरों को रोक सके और उन्हें निष्क्रिय कर सके।
बैलिस्टिक मिसाइलें इतनी खतरनाक क्यों मानी जाती हैं?
क्रूज मिसाइलें और ड्रोन अपेक्षाकृत कम ऊंचाई पर उड़ते हैं और उनकी गति भी सीमित होती है,लेकिन बैलिस्टिक मिसाइलें वातावरण से बाहर तक जाकर बेहद तेज गति से अपने लक्ष्य की ओर लौटती हैं। इनमें से कई मिसाइलें ध्वनि की गति से पांच से दस गुना अधिक रफ्तार से यात्रा करती हैं। रूस की इस्कंदर और किंजल जैसी मिसाइलों ने यूक्रेन में बार-बार भारी तबाही मचाई है। यही कारण है कि यूरोपीय देशों का मानना है कि केवल पारंपरिक एयर डिफेंस सिस्टम भविष्य के युद्धों के लिए पर्याप्त नहीं होंगे।यूक्रेन इस योजना का केंद्र क्यों है?
पिछले चार वर्षों में यूक्रेन दुनिया का शायद एकमात्र ऐसा देश बन गया है जिसने लगातार बैलिस्टिक मिसाइल हमलों का सामना किया है और उनसे बचाव के व्यावहारिक तरीके विकसित किए हैं। यूक्रेन ने अमेरिकी पैट्रियट,जर्मनी की आईआरआईएस-टी और अन्य पश्चिमी रक्षा प्रणालियों का इस्तेमाल करते हुए मिसाइल इंटरसेप्शन,शुरुआती चेतावनी प्रणाली और रडार नेटवर्क के संचालन में महत्वपूर्ण अनुभव हासिल किया है।
ऐसे में यूरोपीय देशों का यह मानना है कि जंग के मैदान में अर्जित यही अनुभव भविष्य के यूरोपीय मिसाइल शील्ड की नींव बन सकता है। यही वजह है कि संयुक्त बयान में यूक्रेन के "विशिष्ट अनुभव" का विशेष उल्लेख किया गया।
पुतिन ने क्या कहा?
पेरिस में यूरोपीय नेता जहां मिसाइल रक्षा की रणनीति पर चर्चा कर रहे थे, वहीं मॉस्को में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन को कड़ी चेतावनी दी। पुतिन ने कहा कि रूस की धरती पर होने वाले हर हमले का जवाब "कई गुना अधिक ताकत" के साथ दिया जाएगा। हाल के हफ्तों में यूक्रेन ने रूस की तेल रिफाइनरियों, ईंधन टर्मिनलों और टैंकरों पर कई लंबी दूरी के हमले किए हैं, जिनकी वजह से कुछ क्षेत्रों में ईंधन संकट पैदा हुआ है। रूसी राष्ट्रपति ने भी माना कि यूक्रेनी हमलों का असर रूस की ईंधन आपूर्ति पर पड़ा है, लेकिन साथ ही दावा किया कि स्थिति जल्द सामान्य हो जाएगी।
क्या ड्रोन युद्ध ने बदल दिया है पूरा समीकरण?
रूस-यूक्रेन युद्ध को अक्सर दुनिया का पहला बड़े पैमाने का ड्रोन युद्ध कहा जाता है। हाल के महीनों में यूक्रेन ने अपनी स्वदेशी लंबी दूरी की ड्रोन तकनीक के जरिए रूस के भीतर कई महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया है। यूक्रेन का दावा है कि उसने केवल आठ दिनों में क्रीमिया के आसपास आजोव सागर क्षेत्र में 105 रूसी जहाजों और नौसैनिक लक्ष्यों पर हमला किया।इनमें टैंकर, मालवाहक जहाज, फेरी और टगबोट शामिल थे। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन पश्चिमी सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि यूक्रेन के ड्रोन अभियान ने रूस की सैन्य आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है।
दूसरी ओर रूस भी पीछे नहीं है। मॉस्को के अनुसार, केवल एक रात में रूसी वायु रक्षा प्रणालियों ने राजधानी की ओर बढ़ रहे 350 यूक्रेनी ड्रोन को मार गिराया, जिनमें से 50 मॉस्को के आसपास थे।
टाइम्स नाउ नवभारत पर इसे भी पढ़ें- अंटार्कटिक सागर से पूरी तरह से गायब हुआ गोवा से भी बड़ा आइसबर्ग, वैज्ञानिकों को सता रही ये चिंता
ट्रंप की पैट्रियट योजना कितनी अहम है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में यूक्रेन को पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम के निर्माण का लाइसेंस देने की घोषणा की थी। यदि यह योजना लागू होती है तो यूक्रेन पहली बार अपनी धरती पर उन्नत मिसाइल रोधी प्रणाली का उत्पादन कर सकेगा।
हालांकि रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी तकनीक विकसित करने और उत्पादन शुरू करने में वर्षों लग सकते हैं। यही वजह है कि यूरोप फिलहाल अपने स्तर पर एक साझा सुरक्षा ढांचा खड़ा करने की कोशिश कर रहा है।
क्या यह रूस के खिलाफ नया सैन्य मोर्चा है?
क्रेमलिन इस गठबंधन को अलग नजरिए से देख रहा है। रूसी राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इसे "युद्ध को बढ़ावा देने वाले देशों का गठबंधन" करार दिया है। पेस्कोव ने कहा कि ये देश इस भ्रम में हैं कि वे रूस को रणनीतिक रूप से पराजित कर सकते हैं। मॉस्को का मानना है कि पश्चिमी देश यूक्रेन को हथियार और तकनीक देकर युद्ध को लंबा खींच रहे हैं। हालांकि यूरोपीय देशों का तर्क है कि यह हमला करने के लिए नहीं बल्कि बचाव के लिए तैयार किया जा रहा सुरक्षा ढांचा है।
क्या यूरोप अपना "आयरन डोम" बनाना चाहता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना भविष्य में यूरोप के लिए एक तरह का महाद्वीपीय "मिसाइल शील्ड" बन सकती है, जिसमें विभिन्न देशों के रडार, सैटेलाइट, इंटरसेप्टर मिसाइलें और कमांड सेंटर एक साझा नेटवर्क से जुड़े होंगे। इसका उद्देश्य किसी भी मिसाइल हमले का शुरुआती चरण में पता लगाना और कुछ ही मिनटों में प्रतिक्रिया देना होगा। यह प्रणाली नाटो की मौजूदा व्यवस्था से अलग और अधिक एकीकृत हो सकती है।
टाइम्स नाउ नवभारत पर इसे भी पढ़ें- ईरान नहीं अब 'होर्मुज' पर कब्जे की जंग, आखिर इस पर फतह कर क्या हासिल करना चाहते हैं ट्रंप?
आगे क्या होगा?
फिलहाल इस परियोजना की कोई समयसीमा तय नहीं की गई है और यह भी साफ नहीं है कि इसकी लागत कितनी होगी या कौन-कौन सी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। हालांकि यह योजना अन्य देशों के लिए भी खुली रखी गई है। लेकिन एक बात साफ है कि रूस-यूक्रेन युद्ध अब केवल पूर्वी यूरोप का संघर्ष नहीं रह गया है। पेरिस में बनी यह नई पहल इस बात का संकेत है कि यूरोप आने वाले वर्षों में अपनी सुरक्षा का जिम्मा पहले से कहीं ज्यादा खुद उठाने के लिए तैयार हो रहा है। ऐसे में यदि यह परियोजना सफल होती है,तो आने वाले दशक में यूरोप दुनिया के सबसे बड़े और सबसे उन्नत एकीकृत मिसाइल रक्षा नेटवर्क में से एक का मालिक बन सकता है।