Gupt Navratri 2026: चैत्र और शारदीय नवरात्रि के बारे में लगभग हर श्रद्धालु जानता है, लेकिन हिंदू पंचांग में आने वाली गुप्त नवरात्रि का महत्व ज्यादतर कम लोगों को पता होता है। यह नवरात्रि साल में दो बार माघ और आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष में आती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह समय देवी शक्ति की आराधना, आत्मचिंतन, मंत्र जाप और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
हालांकि गुप्त नवरात्रि (Gupt Navratri) का नाम सुनते ही कई लोगों के मन में यह सवाल आता है कि क्या यह केवल साधकों और तांत्रिक परंपरा के लिए है? क्या सामान्य गृहस्थ भी इसकी पूजा कर सकते हैं? इन सवालों का जवाब लेने के लिए हमने बात की धर्माचार्य पंडित हेमंत शर्मा से। आइए जानते हैं उनके अनुसार इन सवालों के सटीक जवाब...
साल 2026 में गुप्त नवरात्रि कब हैं?
हर साल में 2 बार गुप्त नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इस साल माघ मास की गुप्त नवरात्रि 18 जनवरी 2026 से 26 जनवरी 2026 तक मनाई गई। जबकि आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि इस साल 15 जुलाई 2026 से 23 जुलाई 2026 तक मनाई जाएंगी।
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गुप्त नवरात्रि में किसकी पूजा की जाती है
पंडित हेमंत शर्मा के अनुसार, जहां चैत्र और शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूप (नवदुर्गा) की पूजा की जाती है, वहीं गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की विशेष आराधना का विधान बताया गया है। शाक्त परंपरा में इन्हें आदिशक्ति के दस दिव्य स्वरूप माना गया है।
| महाविद्या | प्रमुख महत्व |
| मां काली | भय और नकारात्मकता का नाश |
| मां तारा | संकट से रक्षा और मार्गदर्शन |
| मां षोडशी (त्रिपुर सुंदरी) | सौभाग्य और आध्यात्मिक उन्नति |
| मां भुवनेश्वरी | समृद्धि और संतुलन |
| मां छिन्नमस्ता | आत्मबल और त्याग |
| मां त्रिपुर भैरवी | साहस और तप |
| मां धूमावती | वैराग्य और धैर्य |
| मां बगलामुखी | वाणी पर नियंत्रण और शत्रु बाधा से रक्षा |
| मां मातंगी | ज्ञान, कला और वाणी |
| मां कमला | धन-धान्य और ऐश्वर्य |
'गुप्त' क्यों कहलाती हैं ये नवरात्रि?
पंडित हेमंत शर्मा के अनुसार, 'गुप्त' का अर्थ है जो सार्वजनिक प्रदर्शन से दूर हो। इस अवधि में की जाने वाली साधना, मंत्र जाप और अनुष्ठान को गोपनीय रखना श्रेष्ठ माना गया है। इसका उद्देश्य दिखावा नहीं, बल्कि साधक का आंतरिक विकास और एकाग्रता होता है। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं कि सामान्य श्रद्धालु पूजा नहीं कर सकते। गृहस्थ भी श्रद्धा और सात्विक भाव से माता की उपासना कर सकते हैं।
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गृहस्थों के लिए गुप्त नवरात्रि की आसान पूजा-विधि
यदि आप तांत्रिक साधना या विशेष अनुष्ठानों से परिचित नहीं हैं, तो केवल सात्विक तरीके से देवी की आराधना करना ही पर्याप्त माना जाता है। जिसमें आप इन बातों का पालन कर सकते हैं-
- सुबह स्नान के बाद कलश स्थापना और दीप प्रज्वलित करें।
- मां दुर्गा या अपने आराध्य देवी स्वरूप का ध्यान करें।
- दुर्गा चालीसा, देवी कवच या दुर्गा सप्तशती का श्रद्धापूर्वक पाठ करें।
- "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे" जैसे प्रचलित नवर्ण मंत्र का श्रद्धा के साथ जाप करें।
- सात्विक भोजन करें और क्रोध, कटु वचन तथा नकारात्मक विचारों से बचें।
क्या करें और क्या न करें
करें
- प्रतिदिन नियमित समय पर पूजा करें।
- सात्विक भोजन और संयमित दिनचर्या अपनाएं।
- मानसिक शांति के लिए ध्यान और मंत्र जाप करें।
- जरूरतमंदों की सहायता और दान-पुण्य करें।
न करें
- तामसिक भोजन और नशे से दूर रहें।
- पूजा को दिखावा या प्रतियोगिता का रूप न दें।
- बिना योग्य गुरु के जटिल तांत्रिक साधनाओं का प्रयास न करें।
- क्रोध, असत्य और नकारात्मक व्यवहार से बचें।
क्या गुप्त नवरात्रि केवल तांत्रिकों के लिए है?
यह एक आम भ्रम है कि गुप्त नवरात्रि में पूजन केवल तात्रिकों के द्वारा किया जाता है। धार्मिक परंपराओं में गुप्त नवरात्रि को विरक्त साधकों के लिए विशेष माना गया है, लेकिन सामान्य गृहस्थ भी इन दिनों में माता की उपासना, मंत्र जाप और सात्विक जीवन अपनाकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा कठिन तांत्रिक साधनाएं केवल योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही की जानी चाहिए।
