Ashadha Shukla Chaturthi 2026: आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी भगवान श्रीगणेश की पूजा के लिए बेहद शुभ मानी जाती है। आषाढ़ शुक्ल चतुर्थी 2026 का व्रत 17 जुलाई, शुक्रवार को रखा जाएगा। चतुर्थी तिथि 18 जुलाई की सुबह तक रहेगी, इसलिए कई लोगों को तारीख को लेकर भ्रम हो रहा है। द्रिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल चतुर्थी को अनिरुद्ध चतुर्थी कहा जाता है। आइए जानते हैं 2026 के इस व्रत से जुड़ी जरूरी बातें।
अनिरुद्ध चतुर्थी 2026 कब है
द्रिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल चतुर्थी तिथि 17 जुलाई 2026 को सुबह 6:27 बजे शुरू होगी और 18 जुलाई 2026 को सुबह 4:42 बजे समाप्त होगी। 17 जुलाई को सूर्योदय 05:34 पर होगा और इस प्रकार उदयातिथि के आधार पर चतुर्थी व्रत 17 जुलाई, शुक्रवार को रखा जाएगा।
अनिरुद्ध चतुर्थी 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त
- अनिरुद्ध चतुर्थी पर गणेश पूजा का मध्याह्न मुहूर्त: सुबह 11:04 बजे से दोपहर 1:49 बजे तक
- अनिरुद्ध चतुर्थी पर पर अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:59 बजे से दोपहर 12:54 बजे तक
मान्यता है कि भगवान गणेश की पूजा मध्याह्न काल में करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

अनिरुद्ध चतुर्थी 2026 तारीख और मुहूर्त
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अनिरुद्ध चतुर्थी 2026 डेट एंड टाइम
- अनिरुद्ध चतुर्थी: 17 जुलाई 2026, शुक्रवार
- चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 17 जुलाई, सुबह 6:27 बजे
- चतुर्थी तिथि समाप्त: 18 जुलाई, सुबह 4:42 बजे
- गणेश पूजन मध्याह्न मुहूर्त: सुबह 11:04 बजे से दोपहर 1:49 बजे तक
- वर्जित चंद्र दर्शन: सुबह 8:37 बजे से रात 9:32 बजे तक
- अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:59 बजे से दोपहर 12:54 बजे तक
आषाढ़ शुक्ल चतुर्थी को अनिरुद्ध चतुर्थी क्यों कहा जाता है
अधिकांश लोग आषाढ़ शुक्ल चतुर्थी व्रत की केवल तारीख जानते हैं, लेकिन इसके नाम के पीछे भी एक रोचक पौराणिक मान्यता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण के पौत्र और प्रद्युम्न के पुत्र का नाम अनिरुद्ध था। उनका विवाह बाणासुर की पुत्री उषा से हुआ था। ज्योतिषाचार्य सुजीत महाराज के अनुसार, संस्कृत में अनिरुद्ध का अर्थ होता है- जिसे कोई रोक न सके।
इसी कारण इस दिन भगवान गणेश के उस स्वरूप की पूजा की जाती है, जो जीवन की बाधाओं को दूर कर आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजा करने वाले व्यक्ति के कार्यों में आने वाली रुकावटें धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं।
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चतुर्थी पर चंद्र दर्शन वर्जित समय जुलाई 2026
अनिरुद्ध चतुर्थी पर चंद्र दर्शन वर्जित माना गया है। 2026 में अनिरुद्ध चतुर्थी पर चंद्र दर्शन निषेध का समय सुबह 8:37 बजे से रात 9:32 बजे तक रहेगा।
चतुर्थी पर चांद क्यों नहीं देखा जाता है
श्रीमद्भागवत महापुराण के अनुसार,के अनुसार एक बार भगवान गणेश के गजानन स्वरूप को देखकर चंद्रदेव अपने सौंदर्य के अहंकार में हंस पड़े। इससे भगवान गणेश क्रोधित हो गए और उन्होंने चंद्रदेव को श्राप दिया कि चतुर्थी के दिन जो भी व्यक्ति उनके दर्शन करेगा, उस पर झूठा कलंक लग सकता है।
इसी वजह से इस दिन चंद्र दर्शन से बचने की परंपरा चली आ रही है।
चतुर्थी पर भूल से चांद दिख जाए तो क्या करें
यदि भूलवश चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन हो जाएं तो शास्त्रों में इसका उपाय भी बताया गया है। मान्यता है कि स्यमंतक मणि की कथा अथवा भगवान श्रीकृष्ण पर लगे मिथ्या कलंक की कथा सुनने या पढ़ने से दोष का प्रभाव कम होता है। इसके साथ इस मंत्र का जाप भी शुभ माना गया है—
सिंहः प्रसेनमवधीत्सिंहो जाम्बवता हतः।
सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्येष स्यमंतकः॥
चतुर्थी पर गणेश जी को दूर्वा और मोदक क्यों चढ़ाए जाते हैं
भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा और मोदक का विशेष महत्व माना गया है। इसके पीछे धार्मिक मान्यताओं के साथ व्यावहारिक कारण भी बताए जाते हैं।
दूर्वा का महत्व
आयुर्वेद में दूर्वा को शीतल प्रकृति का माना गया है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान गणेश के शरीर की उष्णता को शांत करने के लिए उन्हें दूर्वा अर्पित की गई थी। वर्षा ऋतु में यह प्रकृति की शीतलता और संतुलन का भी प्रतीक मानी जाती है।
मोदक का महत्व
मोदक केवल भगवान गणेश का प्रिय भोग ही नहीं है, बल्कि इसका आध्यात्मिक अर्थ भी बताया गया है। 'मोद' का अर्थ आनंद होता है। माना जाता है कि ज्ञान की प्राप्ति भी मोदक की तरह होती है—शुरुआत में कठिन, लेकिन अंत में अत्यंत मधुर और संतोष देने वाली।
अनिरुद्ध चतुर्थी की पूजा विधि
सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके व्रत का संकल्प लें। इसके बाद लाल वस्त्र बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। विधि-विधान से पूजा करें और दूर्वा, लाल पुष्प, मोदक तथा फल अर्पित करें।
पूजा के दौरान 'ॐ गं गणपतये नमः' या 'ॐ अनिरुद्धाय नमः' मंत्र का 108 बार जाप करना शुभ माना जाता है। शाम को आरती के बाद फलाहार करें और अगले दिन पंचमी तिथि में व्रत का पारण करें।
