Shattila Ekadashi Vrat katha: षटतिला एकादशी व्रत कथा, पढ़ें भगवान विष्णु और भक्त ब्राह्मणी की कहानी
- Authored by: Srishti
- Updated Jan 14, 2026, 08:01 AM IST
Shattila Ekadashi 2026 Katha In Hindi, Puja Vidhi Muhurat (षटतिला एकादशी व्रत कथा): आज षटतिला एकादशी का शुभ दिन है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह व्रत हर साल माघ माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन व्रत कथा जरूर पढ़ी जाती है। यहां से आप आज की एकादशी की कहानी पढ़ सकते हैं।
षटतिला एकादशी की कथा (AI Generated)
Shattila Ekadashi Vrat Katha In Hindi (षटतिला एकादशी व्रत कथा): षटतिला एकादशी की पौराणिक कथा के अनुसार किसी नगर में एक ब्राह्मणी रहती थी। वह भगवान विष्णु की बहुत बड़ी भक्ति थी। वह भगवान विष्णु के सभी व्रतों को श्रद्धा-पूर्वक करती थी। एक बार उस ब्राह्मणी ने भगवान विष्णु का व्रत एक महीना रखा। 1 महीना व्रत रखने की वजह से उसका शरीर बेहद कमजोर हो गया। लेकिन ऐसा करने से उसका तन शुद्ध हो गया। ब्राह्मणी के शुद्ध तन को देखकर भगवान विष्णु ने सोचा कि क्यों न मैं इसका मन भी शुद्ध कर दू ताकि इसे विष्णु लोक में निवास करने का सौभाग्य मिल सकें।
यह सोच कर भगवान विष्णु ब्राह्मणी के पास दान मांगने गए। लेकिन उस ब्राह्मणी ने भगवान को दान में मिट्टी का एक पिंड दे दिया। भगवान विष्णु ब्राह्मणी के दिए गए दान को लेकर वहां से चले गए। कुछ समय बाद ब्राह्मणी की मृत्यु हो गई और वह सीधे विष्णु लोक पहुंच गई। विष्णु लोक पहुंचने के बाद उसे वहां रहने के लिए एक कुटिया मिला। वह कुटिया पूरी तरह खाली थी।
खाली कुटिया को देखकर ब्राह्मणी के मन में खयाल आया कि मैंने जीवन भर भगवान विष्णु की सेवा की, लेकिन मुझे इससे क्या मिला? यही खाली कुटिया। उसकी यह सोच को सुनकर भगवान विष्णु ने कहा कि तुमने अपने मनुष्य जीवन में कभी भी अन्य धन का दान नहीं किया। इसी वजह से तुम्हें स्वर्ग लोक में खाली कुटिया मिला है। यह सुनकर ब्राह्मणी ने भगवान विष्णु से इस समस्या के समाधान के बारे में पूछा।
तब भगवान विष्णु ने ब्राह्मणी से कहा कि जब देवकन्या तुमसे मिलने आएंगी, तो तुम उनसे षटतिला एकादशी व्रत करने की विधि पूछ लेना। इस व्रत को विधिपूर्वक करना। तब ब्राह्मणी ने भगवान विष्णु की बात सुनकर वैसा ही किया। वह देव कन्याओं से षटतिला एकादशी का व्रत करने की पूरी विधि पूछ ली और श्रद्धा पूर्वक उस व्रत को करना शुऱू कर दी।
व्रत के प्रभाव से उसकी खाली कुटिया सामानों से भर गई और वह भी काफी सुंदर हो गई। शास्त्र के अनुसार षटतिला एकादशी के दिन तिल का दान करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है और दरिद्रता हमेशा के लिए दूर हो जाती हैं।