CJP Protest: देश में पेपर लीक और परीक्षाओं में हो रही धांधली के खिलाफ आवाज उठा रहे छात्रों को अब देश की सर्वोच्च अदालत के वकीलों का भी मजबूत साथ मिल गया है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट परिसर में वकीलों ने एकजुट होकर संविधान की प्रस्तावना का पाठ किया। यह पूरा कार्यक्रम 'सेव डेमोक्रेसी, सेव कॉन्स्टिट्यूशन' (लोकतंत्र बचाओ, संविधान बचाओ) अभियान के तहत आयोजित किया गया था, जिसका मकसद जंतर-मंतर (Jantar Mantar Protest) पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के प्रति अपनी एकजुटता जाहिर करना और उन पर हुई पुलिस कार्रवाई का विरोध करना था।
सुप्रीम कोर्ट में दोपहर के लंच ब्रेक के दौरान कई प्रमुख वकीलों ने इसमें हिस्सा लिया। वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह और एस. मुरलीधर ने प्रस्तावना के पाठ का नेतृत्व किया। इस दौरान 'सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन' के अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील विकास सिंह भी वहां मौजूद रहे।
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'न्याय के मंदिर से छात्रों के लिए मांग रहे न्याय'
मीडिया से बातचीत करते हुए वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा कि वकील यहां अपने किसी निजी मुद्दे के लिए इकट्ठा नहीं हुए हैं, बल्कि वे छात्रों के हक और न्याय की लड़ाई में उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों के अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें न्याय दिलाना वकीलों का फर्ज है। सुप्रीम कोर्ट न्याय की चौखट है और इसी मंदिर से वे छात्रों के लिए इंसाफ की मांग कर रहे हैं।
क्या है CJP आंदोलन?
परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ शुरू हुआ CJP आंदोलन पिछले कुछ समय से काफी चर्चा में है। छात्र अपनी मांगों को लेकर जंतर-मंतर पर डटे हुए हैं। इस आंदोलन ने तब और जोर पकड़ लिया जब मशहूर पर्यावरणविद् व कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और आईसा से जुड़े छात्र संगठनों के सदस्य भी भूख हड़ताल पर बैठ गए। अब वकीलों के इस समर्थन से छात्रों के आंदोलन को और बल मिला है।
