13 या 14 जनवरी, कब है जनवरी 2026 की पहली एकादशी, जानिए षटतिला एकादशी की सही डेट और पूजन मुहूर्त व पारण तिथि
- Authored by: Mohit Tiwari
- Updated Jan 14, 2026, 08:58 AM IST
Shattila Ekadashi vrat 2026: माघ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को षटतिला एकादशी के नाम से जाना जाता है। यह साल 2026 की पहली एकादशी होगी। आइए जानते हैं कि साल 2026 में षटतिला एकादशी व्रत कब रखा जाएगा और इस व्रत का पारण किस दिन किया जाएगा?
साल 2026 की पहली एकादशी कब है?
Shattila Ekadashi vrat 2026: हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत बहुत पवित्र माना जाता है। यह भगवान विष्णु को समर्पित होता है और पापों से मुक्ति दिलाता है। साल 2026 की पहली एकादशी माघ मास के कृष्ण पक्ष में पड़ रही है, जिसे षटतिला एकादशी कहा जाता है। नाम 'षटतिला' इसलिए पड़ा क्योंकि इस दिन तिल (तिला) का छह तरह से उपयोग किया जाता है। इसमें तिल स्नान, उबटन, हवन, भोजन, दान और तिल से बने प्रसाद में यूज होता है।
कब है षटतिला एकादशी 2026?
वैदिक पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि की शुरुआत 13 जनवरी 2026 दिन मंगलवार दोपहर लगभग 3:17 बजे से होगी। इस तिथि का समापन 14 जनवरी 2026 बुधवार शाम लगभग 5:52 बजे तक होगी। हिंदू परंपरा में उदया तिथि मतलब सूर्योदय के समय मौजूद तिथि को महत्व दिया जाता है। एकादशी तिथि 13 जनवरी दोपहर से शुरू हो रही है और अगले दिन तक चल रही है, इसलिए एकादशी व्रत 14 जनवरी 2026 दिन बुधवार को रखा जाएगा।
यह साल की पहली एकादशी है और इस बार मकर संक्रांति के साथ दुर्लभ संयोग बन रहा है, क्योंकि दोपहर 3 बजे के बाद 14 जनवरी को सूर्य ग्रह मकर राशि में प्रवेश कर जाएंगे। इससे एकादशी का पुण्य फल कई गुना बढ़ जाएगा। इसके साथ ही इस दिन सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि जैसे शुभ योग भी बन रहे हैं।
षटतिला एकादशी का महत्व
इस व्रत से पुराने पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख, समृद्धि, धन-धान्य की प्राप्ति होती है। तिल का दान और उपयोग करने से दरिद्रता दूर होती है और लक्ष्मी कृपा बरसती है। मान्यता है कि यह व्रत मन, वाणी और कर्म की शुद्धि करता है तथा मोक्ष की ओर ले जाता है। माघ मास में किए गए दान-पुण्य का फल दोगुना मिलता है।
षटतिला एकादशी की पूजा विधि
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें, स्नान करें (तिल मिले पानी से स्नान शुभ) और पीले वस्त्र पहनें। घर में चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं, भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करें। तिल से बने लड्डू व अन्य व्यंजन बनाकर भोग लगाएं। विष्णु सहस्रनाम का पाठ, एकादशी व्रत कथा सुनें या पढ़ें और इन मंत्रों का जाप करें। इसमें ॐ नमो नारायणाय, ॐ नमो भगवते वासुदेवाय, विष्णु गायत्री मंत्र: ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् आदि शामिल करें। इस दिन जरूरतमंदों को तिल, गुड़, कंबल या भोजन दान में दें।
षटतिला एकादशी व्रत पारण का समय
व्रत का पारण 15 जनवरी 2026 (गुरुवार) को सुबह 7:15 बजे से 9:21 बजे तक करें। इस दिन द्वादशी तिथि है। पारण में फल, दूध या हल्का भोजन लें।
विष्णु जी की आरती (Vishnu Aarti) :
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥
जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय…॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥ ॐ जय…॥
तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय…॥
तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय…॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूँ दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय…॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय…॥
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय…॥
तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय…॥
जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय…॥
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी पंचांग पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।