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Radha Ashtami 2026 : राधा अष्टमी 2026 कब है?, जानिए क्या है इस दिन का पूजा मुहूर्त

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  • Updated Sep 3, 2026, 01:49 PM IST

Radha Ashtami 2026: भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा रानी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। आइए जानते हैं कि साल 2026 में यह किस दिन है।

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राधा अष्टमी कब है

Radha Ashtami 2026: भगवान श्रीकृष्ण की प्रिय राधा रानी के जन्मोत्सव का पर्व राधा अष्टमी हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। साल 2026 में राधा अष्टमी शनिवार, 19 सितंबर को मनाई जाएगी। यह पर्व कृष्ण जन्माष्टमी के ठीक 15 दिन बाद आता है।

राधा अष्टमी पर बरसाना, वृंदावन, मथुरा और नंदगांव के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होती है। राधा रानी का पंचामृत से अभिषेक, श्रृंगार, भोग, आरती और संकीर्तन किया जाता है। घरों में भी राधा-कृष्ण की पूजा करके भक्त व्रत रखते हैं।

राधा अष्टमी 2026 कब है

साल 2026 में राधा अष्टमी 19 सितंबर, शनिवार को है। अष्टमी तिथि का प्रारंभ 18 सितंबर को दोपहर 1:00 बजे होगा और इसका समापन 19 सितंबर को दोपहर 3:26 बजे होगा। राधा रानी की पूजा के लिए मध्याह्न का समय सबसे खास माना जाता है। 19 सितंबर को मध्याह्न पूजा मुहूर्त सुबह 11:01 बजे से दोपहर 1:28 बजे तक रहेगा। यही वह समय है जब राधा रानी की विशेष पूजा, अभिषेक और आरती की जा सकती है।

राधा अष्टमी क्यों मनाई जाती है

राधा अष्टमी राधा रानी के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाई जाती है। यह पर्व राधा-कृष्ण भक्ति का प्रमुख उत्सव है। भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को राधा रानी की पूजा करने के साथ व्रत रखा जाता है और राधा-कृष्ण के नाम का संकीर्तन किया जाता है। ब्रज क्षेत्र में इस दिन का महत्व सबसे अधिक दिखाई देता है। बरसाना को राधा रानी की नगरी के रूप में विशेष स्थान प्राप्त है। वृंदावन, मथुरा और नंदगांव के मंदिरों में भी राधा अष्टमी पर विशेष उत्सव आयोजित होते हैं।

राधा अष्टमी पर क्या करें

राधा अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। घर के पूजा स्थान की सफाई करके राधा-कृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें। पूजा के दौरान राधा रानी और श्रीकृष्ण का पंचामृत से अभिषेक करें। इसके बाद साफ वस्त्र और आभूषणों से श्रृंगार करें। राधा रानी को फूल, फल, मिठाई और पंजीरी का भोग लगाएं। मध्याह्न पूजा के समय राधा रानी की आरती करें। राधा-कृष्ण मंत्रों का जाप, भजन और कीर्तन करें। दिनभर भगवान का स्मरण करते हुए व्रत रखें।

राधा अष्टमी पूजा विधि

राधा अष्टमी की पूजा घर पर भी विधि-विधान से की जा सकती है। सबसे पहले पूजा स्थान को साफ करें और वहां चौकी पर साफ कपड़ा बिछाएं। इसके बाद राधा-कृष्ण की प्रतिमा स्थापित करें। गंगाजल से शुद्धिकरण के बाद पंचामृत से अभिषेक करें। अभिषेक के बाद भगवान को नए वस्त्र पहनाएं और फूलों से श्रृंगार करें। राधा रानी को फूलों की माला अर्पित करें। फल, मिठाई और पंजीरी का भोग लगाएं। इसके बाद राधा रानी और श्रीकृष्ण की पूजा करें। राधा अष्टमी की कथा पढ़ें या सुनें। अंत में घी के दीपक से आरती करें और प्रसाद बांटें।

राधा अष्टमी व्रत कैसे रखें

राधा अष्टमी पर व्रत रखने वाले भक्त सुबह स्नान करके संकल्प लेते हैं। व्रत की विधि परिवार और परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है। व्रत के दौरान राधा-कृष्ण की पूजा, भजन, कीर्तन और मंत्र जाप किया जाता है। फलाहार या अपनी परंपरा के अनुसार व्रत रखा जा सकता है। व्रत पूरा करने का समय भी अलग-अलग परंपराओं में अलग हो सकता है। अपने स्थानीय पंचांग और परिवार की परंपरा के अनुसार पारण करें।

राधा अष्टमी व्रत कथा

राधा रानी का जन्म ब्रजभूमि में वृषभानु जी और कीर्ति देवी के घर हुआ। बरसाना राधा रानी की बाल लीलाओं से जुड़ा प्रमुख स्थान है। बचपन से ही राधा का कृष्ण के साथ गहरा प्रेम और आत्मिक संबंध रहा। राधा और कृष्ण की पहली मुलाकात को लेकर ब्रज में अलग-अलग कथाएं प्रचलित हैं। एक कथा में उनका मिलन गोकुल के बाल्यकाल से जोड़ा जाता है, जबकि दूसरी परंपरा में संकेत तीर्थ को उनके मिलन का स्थान बताया गया है। कृष्ण के मथुरा चले जाने के बाद राधा और कृष्ण का वियोग हुआ। कृष्ण आगे चलकर द्वारका चले गए, लेकिन राधा का प्रेम कृष्ण से कभी अलग नहीं हुआ।

कुरुक्षेत्र में भी दोनों का मिलन हुआ, जब कृष्ण द्वारका से और राधा ब्रज से वहां पहुंचीं। एक अन्य कथा में राधा के द्वारका पहुंचने का प्रसंग आता है। राधा वहां से एक वन क्षेत्र में चली गईं। जीवन के अंतिम समय में कृष्ण उनके सामने पहुंचे। कृष्ण ने राधा से अंतिम इच्छा पूछी तो उन्होंने उनसे एक बार फिर बांसुरी सुनाने की इच्छा जताई। कृष्ण ने बांसुरी बजाई और राधा उस मधुर धुन को सुनते हुए कृष्ण में लीन हो गईं। राधा-कृष्ण की यह कथा प्रेम, समर्पण और भक्ति का भाव सामने रखती है।

राधा अष्टमी पर राधा रानी को क्या चढ़ाएं

राधा अष्टमी पर राधा रानी को ताजे फूल, फूलों की माला, फल, मिठाई और पंजीरी का भोग लगाया जाता है। पूजा में पंचामृत से अभिषेक करने के बाद वस्त्र और आभूषण अर्पित किए जाते हैं। राधा रानी को अरबी की सब्जी बहुत अधिक पसंद है। राधा रानी को गुलाब और अन्य सुगंधित फूल विशेष रूप से अर्पित किए जा सकते हैं। पूजा के अंत में भोग लगाकर आरती करें और प्रसाद वितरित करें।

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