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बस में कैसी-कैसी चीजें भूल जाते हैं इंडियन ट्रैवलर्स, सामने आई मजेदार रिपोर्ट

नई दिल्ली के यात्रियों ने सबसे ज्यादा सामान बस में छोड़ा, जिसके बाद बेंगलुरु का नंबर आता है। अधिकांश सामान रात के सफर में छूटता है।

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बसों में सबसे ज्यादा कौन सी चीजें भूलते हैं लोग (Photo: iStock)

सफर के दौरान बस या ट्रेन में लोगों का सामान छुट जाना आम है। आमतौर पर पानी की बोतलें, रूमाल या चार्जर छूटने की बातें सामने आती हैं, लेकिन हाल ही में फ्लिक्सबस इंडिया द्वारा जारी 'लॉस्ट एंड फाउंड' रिपोर्ट में कुछ बेहद अनोखी और हैरान कर देने वाली चीजों का खुलासा हुआ है। साल 2026 के शुरुआती छह महीनों (जनवरी से जून) के आंकड़ों के आधार पर तैयार इस रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय यात्रियों ने बसों में प्लेस्टेशन 5 (PS5) से लेकर पके हुए तरबूज तक छोड़ दिए।

बस में छूटीं बेहद अजीबोगरीब चीजें

रिपोर्ट में दर्ज असामान्य चीजों की सूची किसी को भी चौंका सकती है। यात्रियों द्वारा बस में छोड़े गए सबसे अजीब सामानों में शामिल हैं:

- प्लेस्टेशन 5 (PS5) और रिमोट कंट्रोल ड्रोन

- ताजे व पके हुए तरबूज

- ऑक्सीजन पंप वाला चलता हुआ फिश टैंक (एक्वेरियम)

- डमी/मैनक्विन का सिर (Mannequin Head)

- एक सीवी (CV) की 13 प्रिंटेड कॉपियां

- केदारनाथ से लाया गया 10-10 लीटर गंगाजल का केन

- इंडक्शन कुकटॉप, प्रेशर कुकर, मोमबत्तियों के साथ बर्थडे केक और मैचा व्हिस्क

सबसे ज्यादा क्या भूलते हैं लोग?

रिपोर्ट के मुताबिक, यात्री सबसे ज्यादा फोन चार्जर और केबल भूलते हैं। दिलचस्प बात यह है कि मोबाइल फोन की तुलना में चार्जर छूटने की दर 8 गुना अधिक पाई गई। इसके अलावा ईयरफोन, नेक पिलो, बैकपैक, छाता, कंबल और स्टील के टिफिन भी अक्सर सीटों पर ही छूट जाते हैं।

शहरों की बात करें तो नई दिल्ली के यात्रियों ने सबसे ज्यादा सामान बस में छोड़ा, जिसके बाद बेंगलुरु का नंबर आता है। अधिकांश सामान रात की यात्राओं (ओवरनाइट जर्नी) के दौरान सुबह 4 बजे से 6 बजे के बीच छूटता है, जब यात्री नींद में बस से उतरते हैं।

खाने के डिब्बे और धार्मिक आस्था का सामान

भारतीयों की यात्रा बिना घर के खाने और पूजा-पाठ के अधूरी है, और यह बात इस रिपोर्ट से भी साबित होती है:

क्षेत्रीय व्यंजन: दक्षिण भारत के रूटों पर यात्री अक्सर फिल्टर कॉफी के फ्लास्क, मुरुक्कू के डिब्बे और मिठाई भूल गए। वहीं, उत्तर भारत के रूटों पर पराठे के पार्सल, अचार के जार, ड्राई फ्रूट्स के डिब्बे और थर्मस सबसे ज्यादा छूटे।

धार्मिक वस्तुएं: तीर्थ स्थलों वाले रूटों पर करीब 40% छूटने वाला सामान पूजा-पाठ से जुड़ा था। दक्षिण भारत में प्रसादम, नारियल, पीतल के दीपक और पूजा की थाली छूटी, तो उत्तर भारत में गंगाजल, रुद्राक्ष की माला और पूजा सामग्री बस में ही रह गई।

खोया हुआ सामान वापस कैसे मिलता है?

सामान भले ही बस में छूट जाए, लेकिन अधिकांश चीजें सुरक्षित उनके मालिकों तक पहुंच जाती हैं। फ़्लिक्सबस इंडिया की कस्टमर सपोर्ट, बस पार्टनर्स और ऑन-बोर्ड क्रू की टीम ने इस अवधि के दौरान 600 से अधिक लॉस्ट आइटम शिकायतों का समाधान कर सामान उनके सही मालिकों तक पहुंचाया।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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