केंद्र सरकार देश में रोजगार के नए अवसर पैदा करने और लोगों के आवागमन को आसान बनाने के लिए बाइक टैक्सी सेवाओं को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि निजी दोपहिया वाहन मालिकों को यात्रियों को बाइक टैक्सी के जरिए ले जाने की अनुमति दी जा सकती है। उन्होंने राज्य सरकारों से अपने-अपने राज्यों में बाइक टैक्सी सेवाओं को मंजूरी देने की अपील की है।
परिवहन राज्य का विषय, राज्यों को लेना होगा फैसला
नितिन गडकरी के मुताबिक, निजी दोपहिया वाहन मालिकों को बाइक टैक्सी के तौर पर यात्रियों को ले जाने की अनुमति देने का प्रावधान मौजूद है, लेकिन कुछ राज्य फिलहाल ऐसी सेवाओं को मंजूरी नहीं दे रहे हैं। उन्होंने राज्यों से इस दिशा में आगे बढ़ने की अपील की। गडकरी ने स्पष्ट किया कि परिवहन राज्य का विषय है, इसलिए बाइक टैक्सी सेवाओं को लागू करने और उनके संचालन से जुड़े नियम तय करने का अधिकार संबंधित राज्य सरकारों के पास होगा।
उन्होंने कहा कि बाइक टैक्सी का विस्तार खासकर ग्रामीण और छोटे शहरों के इलाकों में लोगों के लिए कमाई का नया जरिया बन सकता है। हालांकि, अलग-अलग राज्यों में बाइक टैक्सी के लिए परमिट, बीमा, लाइसेंस और अन्य जरूरी नियम अलग हो सकते हैं। ऐसे में मंत्री के बयान का यह मतलब नहीं है कि देश के हर राज्य में निजी बाइक से तुरंत व्यावसायिक बाइक टैक्सी सेवा शुरू की जा सकती है।
8 करोड़ लोगों को रोजगार मिलने का दावा
गडकरी ने दावा किया कि अगर बाइक टैक्सी सेवाओं को बड़े स्तर पर बढ़ावा मिलता है तो करीब 8 करोड़ लोगों के लिए आजीविका के अवसर पैदा हो सकते हैं। इसका फायदा खास तौर पर उन क्षेत्रों और वर्गों को मिल सकता है, जहां रोजगार के विकल्प सीमित हैं। बाइक टैक्सी से लोगों को कम लागत में स्थानीय परिवहन उपलब्ध कराने के साथ-साथ दोपहिया वाहन मालिकों के लिए अतिरिक्त कमाई का अवसर मिल सकता है।
हालांकि, इस संभावित रोजगार के आंकड़े को मंत्री का अनुमान या दावा माना जाना चाहिए। वास्तविक रोजगार के अवसर इस बात पर निर्भर करेंगे कि कितने राज्य बाइक टैक्सी सेवाओं को मंजूरी देते हैं और वहां इनके संचालन के लिए किस तरह की व्यवस्था लागू की जाती है।
ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर कसेगा शिकंजा
सड़क सुरक्षा को लेकर भी नितिन गडकरी ने बड़ा अपडेट दिया है। उन्होंने बताया कि सरकार मोटर व्हीकल्स एक्ट में बदलाव की तैयारी कर रही है। इसके तहत बार-बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले ड्राइवरों के लिए नेगेटिव पॉइंट सिस्टम लागू करने का प्रस्ताव हो सकता है।
इस व्यवस्था के तहत ड्राइवर द्वारा किए गए प्रत्येक ट्रैफिक उल्लंघन पर नेगेटिव अंक दिए जा सकते हैं। अगर किसी चालक के अंक एक तय सीमा तक पहुंच जाते हैं तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित या रद्द किया जा सकता है। इसका उद्देश्य बार-बार नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों पर प्रभावी कार्रवाई करना और सड़क सुरक्षा को मजबूत करना है।
ड्राइवरों की सेहत पर भी सरकार का फोकस
गडकरी ने सड़क सुरक्षा से जुड़े कर्मचारियों और ड्राइवरों की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ‘सुरक्षा’ नाम से एक पायलट कार्यक्रम भी शुरू किया है। इस पहल के तहत ड्राइवरों, निर्माण श्रमिकों और हाईवे व माइनिंग प्रोजेक्ट से जुड़े जोखिम वाले कर्मचारियों को मुफ्त मेडिकल जांच और काउंसलिंग उपलब्ध कराई जाएगी।
शुरुआत में यह कार्यक्रम महाराष्ट्र के नागपुर-कामठी NH-44 सेक्शन और चंद्रपुर के माइनिंग क्षेत्र में करीब 150 किलोमीटर के दायरे में लागू किया जाएगा। इस पहल के जरिए करीब 10,000 लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है।
आंखों की जांच को बताया अहम
गडकरी ने कहा कि सड़क सुरक्षा के लिए ड्राइवरों की सेहत पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। खास तौर पर ड्राइवरों की आंखों की नियमित जांच महत्वपूर्ण है, क्योंकि नजर से जुड़ी समस्या सड़क दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ा सकती है। ‘सुरक्षा’ कार्यक्रम के जरिए स्वास्थ्य जांच और काउंसलिंग उपलब्ध कराने का उद्देश्य ड्राइवरों और अन्य जोखिम वाले कर्मचारियों की कार्यक्षमता के साथ-साथ सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाना है।
