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Muharram 2026 Date in India: भारत में कब मनाया जाएगा मुहर्रम, जानें तारीख और क्यों कहा जाता है इसे शोक का महीना

Muharram 2025 Date in India (मुहर्रम कब मनाया जाएगा 2026 में): इस्लामिक महीने मुहर्रम की शुरूआत 17 जून 2026 से हो चुकी है। आइए जानते हैं मुहर्रम का 10 वां आशूरा कब मनाया जाएगा?

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मुहर्रम कब है 2026 में

Muharram 2026 Date in India (मुहर्रम कब मनाया जाएगा 2026 में): मुहर्रम इस्लामिक हिजरी कैलेंडर का पहला महीना होता है और इसी के साथ इस्लामी नए साल की शुरुआत होती है। मुहर्रम को इस्लाम के चार पाक महीनों में गिना जाता है। साल 2026 में भारत में मुहर्रम की शुरुआत 17 जून 2026 से हो चुकी है। इसकी पुष्टि चांद दिखने के बाद ही की जाती है।

मुहर्रम का महीना केवल नए इस्लामी वर्ष (Islamic Calendar) की शुरुआत ही नहीं, बल्कि त्याग, सच्चाई और न्याय के लिए दिए गए बलिदान की याद भी दिलाता है। यही कारण है कि यह महीना विशेष रूप से श्रद्धा और शोक के साथ मनाया जाता है। आइए जानते हैं इस पाक महीने का 10वां आशूरा कब मनाया जाएगा।

मुहर्रम कब से शुरू है? - Muharram 2026 Kab Se Start Hai

  • मुहर्रम का चांद देखने की संभावना - 17 जून 2026 की शाम
  • पहला मुहर्रम 1448 हिजरी - 17 जून 2026 (बुधवार)
  • 10वां मुहर्रम (आशूरा) - 26 जून 2026 (शुक्रवार)

आपको ध्यान रखना चाहिए क्योंकि इस्लामी कैलेंडर चंद्रमा पर आधारित होता है, इसलिए अलग-अलग देशों और क्षेत्रों की तारीखों में कुछ अंतर हो सकता है।

आशूरा रोजा कब है - Ashura Roza 2026 Kab Hai?

आशूरा रोजा यानी मुहर्रम महीने का 10वां दिन इस्लामिक इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण और भावनात्मक दिन माना जाता है। भारत में आशूरा 26 जून 2026 को पड़ने की संभावना है। इस दिन करबला की ऐतिहासिक घटना हुई थी, जिसमें पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन ने सत्य और न्याय की रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी थी।

मुहर्रम को शोक का महीना क्यों कहा जाता है

मुहर्रम को सत्य, बलिदान और अन्याय के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक माना जाता है। इस्लामी इतिहास के अनुसार, हजरत इमाम हुसैन ने अत्याचारी शासक यजीद के सामने झुकने से इनकार कर दिया था। इसके बाद वे अपने परिवार और साथियों के साथ इराक की करबला नामक जगह पर पहुंचे।

करबला में इमाम हुसैन और उनके साथियों को घेर लिया गया तथा पानी तक की आपूर्ति रोक दी गई। इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। मुहर्रम महीने के 10वें दिन इमाम हुसैन और उनके कई साथी शहीद हो गए। इसी घटना की याद में दुनिया भर के मुस्लिम समुदाय, विशेषकर शिया समुदाय, मुहर्रम के दौरान मातम, मजलिस और ताजिए के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

इस्लामी नए साल की शुरूआत

दुनिया के ज्यादातर नए साल उत्सव और खुशियों के साथ मनाए जाते हैं, लेकिन इस्लामी नववर्ष का आरंभ मुहर्रम के साथ होता है, जो आत्मचिंतन, आध्यात्मिकता और इतिहास के महान बलिदान को याद करने का अवसर देता है। मुहर्रम हमें यह संदेश देता है कि सत्य और न्याय के लिए किया गया संघर्ष कभी व्यर्थ नहीं जाता। यही कारण है कि यह महीना केवल एक नया वर्ष नहीं, बल्कि सिद्धांतों, धैर्य और मानवता के प्रति समर्पण की प्रेरणा भी माना जाता है।

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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