अध्यात्म

Radha Rani Ki Aarti Lyrics in Hindi: राधा रानी की आरती लिरिक्स इन हिंदी, यहां पढ़ें श्रीराधा रानी जी की आरती

Radha Rani Ki Aarti Lyrics in Hindi: राधा रानी भगवान श्रीकृष्ण की सबसे बड़ी भक्त और प्रियतमा थीं। माना जाता है कि राधा रानी पूजा के बाद उनकी आरती करना आवश्यक होता है।

Image

राधा रानी जी की आरती (Image AI Generated and Newsroom Verified)

Radha Rani Ki Aarti Lyrics in Hindi: राधा रानी की पूजा में आरती का विशेष महत्व माना जाता है। पूजा के अंत में श्रद्धा और भक्ति के साथ राधा रानी की आरती करनी चाहिए। बिना आरती के पूजा अधूरी मानी जाती है। श्री राधा रानी की आरती को ‘आरती श्री वृषभानुसुता की’ के नाम से जाना जाता है। इसमें राधा रानी के स्वरूप, उनके प्रेम, श्रीकृष्ण के साथ उनके संबंध और उनकी दिव्य शक्ति का वर्णन मिलता है। दरअसल वृषभानु जी राधा रानी के पिता थे।

इस कारण उनका वृषभानुदुलारी, वृषभानुसुता नाम से जाना जाता है। राधा रानी की भक्ति को भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति का अभिन्न हिस्सा माना जाता है। ब्रज की भक्ति परंपरा में श्रीराधा को प्रेम, करुणा और समर्पण की प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। राधा रानी की आरती में उनके स्वरूप, प्रेम, शक्ति और भगवान कृष्ण के साथ उनके दिव्य संबंध का वर्णन मिलता है। आइए जानते हैं कि राधा रानी की आरती क्या है।

राधा रानी की आरती

राधा रानी की आरती में उन्हें वृषभानु की पुत्री और भगवान श्रीकृष्ण की प्रिय शक्ति के रूप में नमन किया गया है। आरती के माध्यम से भक्त उनके दिव्य स्वरूप, प्रेम और कृपा का स्मरण करते हैं।

आरती श्री वृषभानुसुता की,

मंजुल मूर्ति मोहन ममता की।

त्रिविध तापयुत संसृति नाशिनि,

विमल विवेकविराग विकासिनि।

पावन प्रभु पद प्रीति प्रकाशिनि,

सुन्दरतम छवि सुन्दरता की॥

॥ आरती श्री वृषभानुसुता की॥

मुनि मन मोहन मोहन मोहनि,

मधुर मनोहर मूरति सोहनि।

अविरल प्रेम अमिय रस दोहनि,

प्रिय अति सदा सखी ललिता की॥

॥ आरती श्री वृषभानुसुता की॥

संतत सेव्य सत मुनि जनकी,

आकर अमित दिव्यगुण गनकी।

आकर्षिणी कृष्ण तन मनकी,

अति अमूल्य सम्पति समता की॥

॥ आरती श्री वृषभानुसुता की॥

कृष्णात्मिका, कृष्ण सहचारिणि,

चिन्मय वृन्दा विपिन विहारिणि।

जगजननि जग दुखनिवारिणि,

आदि अनादिशक्ति विभुता की॥

॥ आरती श्री वृषभानुसुता की॥

आरती श्री वृषभानुसुता की,

मंजुल मूर्ति मोहन ममता की॥

क्यों खास है राधा रानी की आरती

राधा रानी की आरती में उन्हें भगवान कृष्ण की आत्मस्वरूप शक्ति और उनकी सहचारिणी के रूप में स्मरण किया गया है। आरती के पदों में उनके दिव्य सौंदर्य, प्रेम और भक्तों के दुख दूर करने वाली शक्ति का गुणगान मिलता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार राधा रानी की आराधना करने से भक्त के मन में प्रेम, श्रद्धा और भक्ति की भावना मजबूत होती है। इस कारण उनकी पूजा के अंत में आरती अवश्य करनी चाहिए। ब्रज परंपरा में राधा-कृष्ण की संयुक्त पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारीauthor

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।

और पढ़ें
End of Article