Margshirsh Amavasya 2022: हिंदू धर्म में कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मार्गशीर्ष अमावस्या कहा जाता है। इस माह में भगवान कृष्ण की पूजा का विशेष महत्व है श्रीमद्भागवत गीता में भगवान ने स्वयं कहा है कि मासों में मैं मार्गशीर्ष मास हूं। वैसे तो यह सम्पूर्ण माह विशेष महत्व रखता है , लेकिन मार्गशीर्ष अमावस्या को पितृ पक्ष की दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। यह अमावस्या पितरों को समर्पित होती है।अपने पूर्वजों की पूजा करने से इस दिन उनकी विशेष कृपा मिलती है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान कर दान दक्षिणा देने से सभी दुख दूर होते हैं।इस दिन भजन ,कीर्तन और पितरों का तर्पण करना शुभ होता है। अगर कुंडली में पितृ दोष है तो उन्हें इस दिन व्रत रखना चहिए।
जाने इस साल कब है मार्गशीर्ष अमावस्या और क्या है शुभ मुहूर्त
अमावस्या तिथि : 23 नवंबर 2022, बुधवार
तिथि प्रारंभ : सुबह 6:56 मिनट
तिथि समाप्त: 24 नवंबर 2022, गुरुवार सुबह 04:28
स्नान मुहूर्त: सुबह 6:57 से 8:05 मिनट तक।
अमृत काल : 23 नवंबर, दोपहर 01:25 मिनट से दोपहर 3:00 बजे तक।
अमावस्या पूजन विधि:
- पितरों के तर्पण के लिए इस दिन व्रत रखना चाहिए और विधि विधान से पितरों की पूजा करनी चाहिए ।
- प्रात: काल शुभ मुहूर्त में पवित्र नदी, तालाब या कुंड में अपने पितरों को ध्यान में रखते हुए स्नान करें।
- स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य दें और गायत्री मंत्र करते हुए बहते जल में तिल प्रवाहित करें।
- भगवान कृष्ण का ध्यान लगाए और अपने कुल के अनुसार पूजा करें।
- नदी के घाट पर पितरों को तर्पण करें और मोक्ष को कामना करें ।
- पूजा करने के बाद किसी जरूरतमंद को भोजन और वस्त्र दान करें।
- कहा जाता है यह दान सीधा पितरों को समर्पित होता है।
