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सावन पुत्रदा एकादशी व्रत पारण विधि, कैसे और किस समय पर करें एकादशी व्रत का पारण

Sawan Putrada Ekadashi Parana Vidhi And Time 2026: सावन 2026 की आखिरी एकादशी व्रत 23 जुलाई को रखा गया है। इस व्रत का पारण 24 जुलाई को किया जाएगा। आइए जानते हैं कि पारण का शुभ समय क्या है।

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सावन पुत्रदा एकादशी व्रत की पारण विधि

Sawan Putrada Ekadashi Parana Vidhi And Time 2026: सावन महीने की पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त 2026, रविवार को रखा गया है। अब व्रत रखने वाले श्रद्धालु 24 अगस्त 2026, सोमवार को पारण करेंगे। इस बार पारण का दिन खास भी है, क्योंकि 24 अगस्त को सावन का आखिरी सोमवार पड़ रहा है। ऐसे में एक ही दिन भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा का संयोग बन रहा है।

पुत्रदा एकादशी को भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार संतान सुख, संतान की खुशहाली और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से यह व्रत रखा जाता है। एकादशी व्रत में व्रत रखने के साथ-साथ सही समय पर पारण करना भी जरूरी माना गया है।

2026 में पुत्रदा एकादशी का पारण कब होगा

सावन पुत्रदा एकादशी के व्रत का पारण 24 अगस्त 2026, सोमवार को किया जाएगा। दोपहर 1:41 बजे से शाम 4:16 बजे तक व्रत का पारण कर सकते हैं। हरि वासर सुबह 10:49 बजे तक रहेगा। वैष्णव परंपरा में हरि वासर के दौरान पारण नहीं किया जाता है। इसके चलते गृहस्थ व्रती दोपहर का समय पारण के लिए चुन सकते हैं। वहीं, अगर आपने वैष्णव परंपरा के अनुसार पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा है तो पारण का समय अलग रहेगा। वैष्णव व्रतियों के लिए 25 अगस्त 2026 को सुबह 5:55 बजे से 6:20 बजे तक पारण का समय रहेगा।

सावन के आखिरी सोमवार में होगा पारण

24 अगस्त को सावन का आखिरी सोमवार भी है। इस वजह से इस दिन शिव पूजा का भी विशेष महत्व रहेगा। ऐसे में व्रती सुबह स्नान करके पहले भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं। शिवलिंग पर जल और पूजा सामग्री अर्पित करने के बाद भगवान विष्णु का ध्यान करें। इसके बाद निर्धारित पारण समय में एकादशी व्रत खोलें।

सावन पुत्रदा एकादशी व्रत की पारण विधि

पारण का मतलब केवल खाना शुरू करना नहीं है। धार्मिक परंपरा में पारण के एक विधि बताई गई है। पारण के लिए सबसे पहले सुबह उठकर स्नान करें। भगवान विष्णु की पूजा करें और उन्हें फल, फूल, तुलसी आदि अर्पित करें। इसके बाद अपनी क्षमता के अनुसार दान करें। निर्धारित पारण समय आने पर पहले भगवान को भोग लगाएं। इसके बाद पानी या तुलसी मिला जल लेकर व्रत खोल सकते हैं। फिर हल्का और सात्विक भोजन करें। अगर आपने निर्जला व्रत रखा है तो एकदम से भारी खाना खाने से बचें। पहले पानी या हल्का पेय लें और उसके बाद सामान्य भोजन करें।

पारण में क्या खा सकते हैं

एकादशी के बाद पारण में सात्विक भोजन लेना बेहतर माना जाता है। शुरुआत फल, पानी या हल्के भोजन से की जा सकती है। इसके साथ ही आप फल, दूध या दही, हल्की खिचड़ी, साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े से बने व्यंजन,हल्की सब्जी आदि सात्विक आहार ले सकते हैं।

पारण से पहले इन बातों का रखें ध्यान

एकादशी व्रत में सबसे जरूरी बात पारण का सही समय है। बिना समय देखे व्रत खोलने से बचें। हरि वासर का ध्यान रखें। 24 अगस्त को सुबह 10:49 बजे तक हरि वासर रहेगा। वैष्णव परंपरा में इस दौरान पारण नहीं किया जाता। व्रत के बाद बहुत ज्यादा खाना न खाएं। लंबे समय तक उपवास के बाद हल्के भोजन से शुरुआत करना बेहतर रहता है। भगवान विष्णु की पूजा जरूर करें। एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है, इसलिए पारण से पहले श्रीहरि का स्मरण करना शुभ माना जाता है।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारीauthor

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।

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