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Mahakal Lok Ujjain in Hindi: कई चमत्कारों के साक्षी हैं कालों के काल 'महाकाल'

  • Agency by: Agency
  • Updated Oct 10, 2022, 02:48 PM IST

Mahakal Lok Ujjain in Hindi:उज्जैन का महाकाल मंदिर कई चमत्कारों की गाथा कहता है। इस मंदिर से जुड़े ऐसे कई पौराणिक घटनाएं और तथ्य है जो इस मंदिर के लिए कौतूहल का सबब बनते हैं।

Mahakal Lok Ujjain in Hindi: मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन का सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व रहा है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है कालों के काल 'महाकाल' का विश्व प्रसिद्ध मंदिर है, जहां दर्शन करने के लिए देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया से श्रद्धालु आते हैं । देश भर के 12 ज्योतर्लिंग में से एक महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का अपना अलग ही महत्व है। ऐसी मान्यता है कि जो भक्त उज्जैन में महाकाल का दर्शन करने से पहले बाबा काल भैरव का दर्शन करते हैं तो उनके जीवन के सारे पाप मिट जाते हैं और उनकी हर मनोकामना पूर्ण होती है वहीं जो भक्त काल भैरव के दर्शन के बिना महाकाल की पूजा करते हैं तो उनकी पूजा अधूरी मानी जाती है। अकाल मृत्यु से बचने और जीवन को मंगलमय करने के लिए उनकी उपासना सदियों से की जा रही है।देश -दुनिया तक फैली है महाकाल की ख्याति

प्राचीन भारत में अवंती नाम की एक नगरी थी , जो भगवान शिव के मन को बहुत भाती थी । इसी नगरी में एक ज्ञानी ब्राह्मण रहते थे, जो शिवभक्त होने के साथ ही और कर्मकांडी थे। वह प्रतिदिन पार्थिव शिवलिंग बनाकर उसकी आराधना किया करते थे। शिवभक्त ब्राह्मण का नाम वेद प्रिय था, जो हमेशा वेद के ज्ञान अर्जित करने में लगे रहते थे जिसके कारण ब्राह्मण को आराधना का पूर्ण फल प्राप्त हुआ।

रत्नमाल पर्वत पर दूषण नामक राक्षस रहता था। इस राक्षस को ब्रह्मा जी से एक वरदान मिला था। इसी वरदान के चलते वह धार्मिक व्यक्तियों पर आक्रमण करने लगा था। उसने अवंती नगर के ब्राह्मणों पर आक्रमण करने का विचार बना लिया। इसी वजह से उसने अवंती नगर के ब्राह्मणों को अपनी हरकतों से परेशान करना शुरू कर दिया। उसने ब्राह्मणों को कर्मकांड करने से मना करने लगा। धर्म-कर्म का कार्य रोकने के लिए कहा, लेकिन ब्राह्मणों ने उसकी इस बात को नहीं ध्यान दिया। इससे निजात पाने के लिए ब्राह्मणों को शिव से अपनी रक्षा के लिए अनुनय विनय करनी पड़ी ।

ब्राह्मणों के विनय पर भगवान शिव ने राक्षस के अत्याचार को रोकने से पहले उन्हें चेतावनी दी। एक दिन राक्षसों ने हमला कर दिया। भगवान शिव धरती फाड़कर महाकाल के रूप में प्रकट हुए। नाराज शिव ने अपनी एक हुंकार से ही दूषण राक्षस को भस्म कर दिया। भक्तों की वहीं रूकने की मांग से अभीभूत होकर भगवान वहां विराजमान हो गए। इसी वजह से इस स्थान का नाम महाकाल पड़ा।

भैरव की निराली है महिमा

भैरव शब्द का अर्थ ही होता है भरण-पोषण करने वाला, जो भरण शब्द से बना है। काल भैरव की चर्चा रुद्रयामल तंत्र और जैन आगमों में भी विस्तारपूर्वक की गई है। शास्त्रों के अनुसार कलियुग में काल भैरव की उपासना शीघ्र फल देने वाली होती है। उनके दर्शन मात्र से शनि और राहु जैसे क्रूर ग्रहों का भी कुप्रभाव समाप्त हो जाता है। काल भैरव की सात्त्विक, राजसिक और तामसी तीनों विधियों में उपासना की जाती है।

प्राचीन कथा के अनुसार एक बार साधुओं ने सभी त्रिदेव और देवताओं से पूछा कि आपमें सबसे श्रेष्ठ कौन है? देवी-देवताओं ने फिर सभा की सबसे श्रेष्ठ कौन है? वेदों से पूछा तो सभी ने एक साथ कहा कि भगवान शिव के समान कोई नहीं है वे ही सर्वशक्तिशाली और सबके पूजनीय हैं।एक बार ब्रह्मा जी के पांचवें मुख ने शिव निंदा की उसी समय की बात हैं शिवलिंग में से दिव्य ज्योति उत्पन्न हुई जिससे से एक बालक का प्राकट्य हुआ। वो बालक जन्म होते ही जोर-जोर से रोने करने लगा। भगवान ब्रह्मा को अज्ञानवश लगा कि उनके तेज से ही यह बालक उत्पन्न हुआ है।

तब भगवान शिव ने इस संशय को दूर किया और कहा अधिक रोने के कारण मैंने ही तुम्हारा नाम रूद्र रखा लेकिन तुम मुझसे उत्पन्न हुए हो। साथ ही तुम भरण पोषण करने वाले होगे हो, इसलिए जगत तुम्हें भैरव के नाम से जानेगा।कथा के अनुसार एक बार देवताओं की सभा हुई थी। उसमें ब्रह्मा जी के मुख से शंकर भगवान के प्रति कुछ अपमानजनक शब्द निकल गए। तब शंकर भगवान ने क्रोध में हुंकार भरी और उस हुंकार से काल भैरव प्रकट हुए और ब्रह्मा जी के उस सिर को काट दिया जिससे ब्रह्मा जी ने शंकर भगवान की निंदा की थी। काल भैरव को ब्रह्म हत्या दोष लगने और काशी में वास करने तक की आगे की कथा पहली कथा जैसी ही है।

यह भी मान्यता है कि धर्म की मर्यादा बनाएं रखने के लिए भगवान शिव ने अपने ही अवतार काल भैरव को आदेश दिया था कि भैरव, तुमने ब्रह्माजी के पांचवें सिर को काटकर ब्रह्म हत्या का जो पाप किया है, उसके प्रायश्चित के लिए तुम्हें पृथ्वी पर जाकर माया जाल में फंसना होगा और विश्व भ्रमण करना होगा। जब ब्रह्मा जी का कटा हुआ सिर तुम्हारे हाथ से गिर जाएगा, उसी समय तुम ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्त हो जाओगे और उसी स्थान पर स्थापित हो जाओगे। काल भैरव की यह यात्रा काशी में समाप्त हुई थी। बाबा काल भैरव शत्रुओं का नाश करते हैं और अपने भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं। कालभैरव को ये वरदान है कि भगवान शिव के पूजा के पहले काल भरैव की पूजा होगी। जो भक्त काल भैरव के दर्शन किए बिना महाकाल का दर्शन करते हैं उनकी पूजा अधूरी मानी जाती है।

बाबा भैरवनाथ शहर के कोतवाल

भगवान शिव के पांचवें स्वरूप श्री भैरवनाथ जी, बाबा महाकाल और काल भैरव के नाम से भी जाने जाते हैं। भोलेनाथ शिव-शंकर की पूजा से पहले काल भैरव की पूजा की जाती है। ऐसा वरदान काल भैरवनाथ को भगवान भोलेनाथ ने दिया है। इनको उग्र देव भी माना जाता है। बाबा भैरवनाथ इतने दयालु हैं, कि इनकी सेवा अगर कोई कर ले तो वह जल्द ही प्रसन्न हो जाते हैं, जिसकी वजह यह कोतवाल भी माने जाते हैं। बाबा भैरव दयालु होने के साथ भक्त वत्सल भी हैं। जो अपने भक्तों की पुकार सुनकर उनकी हर मनोकामना पूरी करते हैं। भैरव शिव का स्वरूप होने के कारण जल्द ही प्रसन्न हो जाते हैं। इनके दरबार से कोई निराश होकर नहीं जाता। बाबा भक्त को प्रसन्न होकर मनचाहा वरदान दे देते हैं।

बाबा भैरवनाथ के मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है, कि यहां भगवान कालभैरव की मूर्ति को शराब का भोग लगाया जाता है। आश्चर्य की बात तो यह है कि देखते ही देखते वह पात्र जिसमें मदिरा का भोग लगाया जाता है, खाली हो जाता है। यह शराब कहां जाती है, ये रहस्य आज तक किसी को नहीं पता। यहां हर दिन भक्तों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है और इस चमत्कार को अपनी आंखों से भी देखती है।

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