Maha Shivratri Kab Hai 2026 Mein: 14 या 15 फरवरी, 2026 में महाशिवरात्रि कब है? महाशिवरात्रि चार पहर की पूजा का समय क्या है?
- Authored by: Srishti
- Updated Jan 30, 2026, 09:33 AM IST
Maha Shivratri Kab Hai 2026 Mein: साल 2026 में महाशिवरात्रि किस दिन है? इसकी डेट को लेकर काफी ज्यादा कंफ्यूजन है। यहां से आप महाशिवरात्रि की सही तारीख के साथ-साथ चार पहर की पूजा का शुभ मुहूर्त भी जान सकते हैं।
2026 में महाशिवरात्रि कब है? (pc: canva)
Maha Shivratri Kab Hai 2026 Mein: हिंदू धर्म में फाल्गुन मास के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी तिथि पर की जाने वाली महाशिवरात्रि की पूजा का काफी ज्यादा महत्व है। महाशिवरात्रि का भक्त सालभर इंतजार करते हैं और फिर इस दिन भक्त उपवास रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की विधि- विधान पूजा करते हैं। साल 2026 में महाशिवरात्रि कब है, इसकी सही तारीख क्या है, ये आप यहां से जान सकते हैं। यहां महाशिवरात्रि की सही डेट के साथ पूजा का मुहूर्त भी बताया गया है। महाशिवरात्रि की चार पहर की पूजा का समय और साथ ही पूजा की विधि की भी यहां चर्चा है।
2026 में महाशिवरात्रि कब है?
पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी, रविवार की शाम 05:05 PM पर शुरू होकर अगले दिन 16 फरवरी, सोमवार को शाम 05:35 PM पर व्याप्त होगी। शास्त्रों के अनुसार, जिस रात में निशीथ काल में चतुर्दशी तिथि का संयोग बनता है उसी दिन शिवरात्रि मनाई जाती है। ऐसे में महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी।
महाशिवरात्रि पूजा मुहूर्त 2026-
महाशिवरात्रि पर निशीथ काल की पूजा का समय 15 फरवरी 2026 की रात को 11:52 से लेकर 16 फरवरी 2026 को पूर्वाह्न 12:42 बजे तक रहेगा। इस तरह शिवभक्तों को महादेव की पूजा के लिए तकरीबन 50 मिनट मिलेंगे।
महाशिवरात्रि चार पहर की पूजा का समय-
महाशिवरात्रि की पूजा रात्रि के समय एक बार या चार बार की जा सकती है। रात्रि के चार प्रहर होते हैं और हर प्रहर में भगवान शिव की पूजा करना फलदायी होता है।
- रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय - 06:39 PM से 09:45 PM
- रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय - 09:45 PM से 12:52 PM, फरवरी 16
- रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय - 12:52 AM से 03:59 AM, फरवरी 16
- रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय - 03:59 AM से 07:06 AM, फरवरी 16
महाशिवरात्रि पूजा विधि
महाशिवरात्रि के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें और व्रत-संकल्प लें। इसके बाद घर के मंदिर में विधि विधान शिव-पार्वती की पूजा करें। इसके बाद मंदिर में जाकर शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, भांग, धतूरा, चंदन इत्यादि चीजें चढ़ाएं। इस दिन रात्रि की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इसलिए रात में पूजा करने से पहले फिर से स्नान करें। इसके बाद आप अपनी सुविधानुसार रात्रि के किसी भी प्रहर में या फिर चारों प्रहर में शिव जी की पूजा करें। इस दौरान भोलेनाथ को दही, घी, दूध, शक्कर, शहद इत्यादि चीजों से स्नान कराएं। आप चाहें तो गन्ने के रस से शिवलिंग का अभिषेक कर सकते हैं। पूजा के समय शिवरात्रि की व्रत कथा भी जरूर सुनें। इसके अलावा शिव जी के मंत्रों और चालीसा का पाठ भी जरूर करें। फिर परिवार सहित शिव भगवान की आरती करें। भोग लगाएं और अपने व्रत का पारण करें।