Dauji, Balram And Balbhadra Ji Ki Aarti: हलछठ या ललही छठ का व्रत भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम जी के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। हलछठ की पूजा और व्रत कथा सुनने के बाद बलराम जी की आरती करने का विशेष महत्व माना गया है।
कहीं उन्हें बलराम कहा जाता है, कहीं बलभद्र, तो ब्रज में भक्त प्रेम से दाऊजी या बलदाऊ पुकारते हैं। हल को धारण करने के कारण उनका नाम हलधर और हलायुध भी पड़ा। नाम अलग हैं, लेकिन आराध्य एक ही हैं। यही वजह है कि बलराम जी की आरती खोजने पर कहीं ‘जय बलदेव हरे’ तो कहीं ‘ॐ जय बलभद्र हरे’ सुनाई देती है। यहां भगवान बलराम की दोनों प्रचलित आरतियां दी गई हैं।
दाऊजी महाराज की आरती- जय बलदेव हरे
जय बलदेव हरे, स्वामी जय बलदेव हरे।
हे दुःख भंजन, रोहिणी नंदन, सब दुख दूर करे।।
ॐ जय बलदेव हरे…
जय बलदेव हरे, स्वामी जय बलदेव हरे।
हे दुःख भंजन, रोहिणी नंदन, सब दुख दूर करे।।
ॐ जय बलदेव हरे…
मैं जग में भटका हूं, पार करो बाबा।
स्वामी पार करो बाबा।
अपनी शरण लगाओ, उद्धार करो बाबा।।
ॐ जय बलदेव हरे…
माथे मुकुट विराजे, सिर पंचरंग चीरा।
स्वामी सिर पंचरंग चीरा।
चंदा के सम चमके, ठोड़ी पै हीरा।।
ॐ जय बलदेव हरे…
सुंदर वस्त्र मनोहर, मन हरनी झांकी।
स्वामी मन हरनी झांकी।
अपने भक्त जनन पै, नजर करो बांकी।।
ॐ जय बलदेव हरे…
माखन-मिश्री खावें, विजया भोग धरे।
स्वामी विजया भोग धरे।
सकल मनोरथ सारे, विपदा दूर करे।।
ॐ जय बलदेव हरे…
मैया सम्मुख विराजें, सबके दुःख हरनी।
स्वामी सबके दुःख हरनी।
सबकी करें सहाई, मां मंगल करनी।।
ॐ जय बलदेव हरे…
जो नर तुमको ध्यावै, कष्ट नहीं पावै।
स्वामी कष्ट नहीं पावै।
अमर प्रेम पद पावै, भाव से तर जावै।।
ॐ जय बलदेव हरे…
सुंदर ताल बन्यो है, क्षीर सागर न्यारो।
स्वामी क्षीर सागर न्यारो।
जो स्नान करे जन, मिट जाए दुःख सारो।।
ॐ जय बलदेव हरे…
कृष्णचंद्र वृंदावन, महारास कीन्हो।
स्वामी महारास कीन्हो।
गिरि के ऊपर बैठे, सिंह रूप लीन्हो।।
ॐ जय बलदेव हरे…
अजब अनोखी लीला, है ब्रज में भारी।
स्वामी है ब्रज में भारी।
वानर द्विविद गिराया, हल-मूसल धारी।।
ॐ जय बलदेव हरे…
दाऊ बाबा की आरती, जो जन नित गावै।
स्वामी जो जन नित गावै।
मनवांछित फल पावै, मन ही मन हरषावै।।
ॐ जय बलदेव हरे…
श्री बलभद्र जी की आरती—ॐ जय बलभद्र हरे
ॐ जय बलभद्र हरे,
प्रभु जय बलभद्र हरे।
अपने कुल की रक्षा,
तू प्रभु नित्य करे।।
ॐ जय बलभद्र हरे…
जो सेवे सुख पावे,
प्रतिपल गुण गावे।
हो स्वामी प्रतिपल गुण गावे।
सुख-संपत्ति घर आवे,
निर्मल तन पावे।।
ॐ जय बलभद्र हरे।।1।।
तुम हलधर हो स्वामी,
सब सुख के दाता।
हो स्वामी सब सुख के दाता।
अन्न तुम्हारे हल से,
हर प्राणी पाता।।
ॐ जय बलभद्र हरे।।2।।
गंगाजल-सा पावन,
है तेरी काया।
हो स्वामी है तेरी काया।
जगत के नाथ हो देवा,
जग तेरी माया।।
ॐ जय बलभद्र हरे।।3।।
जल-थल के कण-कण में,
तुम्हें पाऊं देवा।
हो स्वामी तुम्हें पाऊं देवा।
ऐसा वर दो स्वामी,
नित्य करूं सेवा।।
ॐ जय बलभद्र हरे।।4।।
भक्तजनों के रक्षक,
दिव्य स्वरूप धरे।
हो स्वामी दिव्य स्वरूप धरे।
गौरवर्ण नीलांबर,
सबके मन मोहे।।
ॐ जय बलभद्र हरे।।5।।
विषय-विकार मिटाओ,
पाप हरो देवा।
हो स्वामी पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ,
करूं मन से सेवा।।
ॐ जय बलभद्र हरे।।6।।
वंदन हे बलदेवा,
जग के सुखदाता।
हो स्वामी जग के सुखदाता।
चरणों में अर्पित पुष्प को,
स्वीकारो दाता।।
ॐ जय बलभद्र हरे।।7।।
सभी भक्त मिल करें स्तुति,
जगदाता मेरे।
हो स्वामी जगदाता मेरे।
मुरलीधर के भैया,
सबके मन मोहे।।
ॐ जय बलभद्र हरे।।8।।
जो बलभद्र जी की आरती,
कोई जन गावे।
हो स्वामी प्रेम सहित गावे।
तन-मन सुख-संपत्ति,
मनवांछित फल पावे।।
ॐ जय बलभद्र हरे।।9।।
ॐ जय बलभद्र हरे,
प्रभु जय बलभद्र हरे।
अपने कुल की रक्षा,
तू प्रभु नित्य करे।।
ॐ जय बलभद्र हरे…
दाऊजी, बलराम और बलभद्र क्या एक ही हैं
दाऊजी, बलराम, बलदेव और बलभद्र भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई के ही अलग-अलग नाम हैं। ‘दाऊ’ शब्द बड़े भाई के लिए प्यार और सम्मान से बोला जाता है। ब्रज में आज भी भगवान बलराम को दाऊजी महाराज या बलदाऊ जी कहकर पुकारा जाता है।
बलराम नाम उनकी शक्ति और बल का संकेत देता है, जबकि बलभद्र नाम उनके कल्याणकारी और सौम्य स्वरूप को सामने लाता है। हलधर नाम खेती और धरती के साथ उनके संबंध को दर्शाता है। उनके हाथों में हल और मूसल दिखाई देते हैं। इसलिए हलछठ की पूजा में भगवान बलराम का स्मरण खास तौर पर किया जाता है।
हलछठ पर बलराम जी की आरती कैसे करें
हलछठ की पूजा पूरी करने और व्रत कथा सुनने के बाद आरती की जा सकती है। भगवान बलराम का चित्र या श्रीकृष्ण-बलराम का संयुक्त चित्र पूजा स्थान पर रखें। दीपक जलाएं और अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार भोग अर्पित करें।
इसके बाद ‘जय बलदेव हरे’ या ‘ॐ जय बलभद्र हरे’ में से कोई भी आरती पढ़ी जा सकती है। समय हो तो दोनों आरतियां भी गा सकते हैं। आरती के बाद संतान के अच्छे स्वास्थ्य, लंबी आयु और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें।
