डायटीशियन्स और हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, नमकीन मटर को ज्यादा आकर्षक दिखाने के लिए उसमें आर्टिफिशियल कलर डालते हैं। ऐसा सब नहीं करते, मगर मुनाफे के लिए बहुत से लोग इस धंधे में लगे हैं।
डायटीशियन्स की मानें तो कृत्रिम रंगों के कारण एलर्जी जैसी परेशानी हो सकती है। इनमें त्वचा पर खुजली, रैशेज या सूजन जैसी समस्याएं शामिल हो सकती हैं। बच्चों के मामले में भी ऐसे रंगों को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
नमकीन मटर में समस्या केवल आर्टिफिशियल कलर तक सीमित नहीं है। पैकेज्ड मटर में सोडियम की मात्रा भी जरूरत से ज्यादा होती है। ये हाई ब्लड प्रेशर के साथ-साथ दिल, किडनी और स्ट्रोक से जुड़े जोखिमों को बढ़ा सकती है।
अगर आपको शक है कि नमकीन मटर में ऊपर से रंग मिलाया गया है, तो घर पर एक आसान टेस्ट किया जा सकता है। एक गिलास पानी लें और उसमें थोड़ी-सी नमकीन मटर डाल दें। इसे अच्छी तरह मिलाकर करीब 30 मिनट तक छोड़ दें।
अगर पानी का रंग हरा होने लगे, तो यह संकेत है कि मटर पर आर्टिफिशियल डाई का इस्तेमाल हुआ है।
पैकेज्ड नमकीन मटर खरीदते समय ऐसे प्रोडक्ट चुनें जिन पर ‘no artificial colours’ या प्राकृतिक सामग्री का इस्तेमाल होने की जानकारी दी गई हो। साथ ही सोडिम की मात्रा भी जरूर देखें।
एक और बेहतर विकल्प है कि सूखे मटर को घर पर भिगोकर, हल्के मसालों के साथ भुनकर कर स्नैक तैयार किया जाए। इससे आपको पता रहेगा कि इसमें क्या-क्या डाला गया है।