लोहड़ी की अग्नि में क्या डाला जाता है, लोहड़ी पर आप कितने फेरे लेते हैं, लोहड़ी की अग्नि के आसपास घूमते हुए क्या बोलें
- Authored by: मेधा चावला
- Updated Jan 13, 2026, 11:51 AM IST
Lohri Fire rituals: लोहड़ी का त्योहार मनाते समय शाम को सूरज डूबने के बाद अग्नि लगाई जाती है। इस अग्नि में कुछ सामग्री डाली जाती है, इसके फेरे लिए जाते हैं और इसके चक्कर लगाए जाते हैं। यहां आप जान सकते हैं कि लोहड़ी की अग्नि में क्या सामग्री डाली जाती है, लोहड़ी की अग्नि के कितने फेरे लेने चाहिए, लोहड़ी की अग्नि के आसपास घूमते हुए क्या बोलें - आदि की जानकारी।
लोहड़ी की अग्नि का महत्व: क्या डालें, कितने फेरे लें और क्या बोलें
Lohri Fire rituals: लोहड़ी उत्तर भारत का प्रमुख लोकपर्व है, जो विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा, हिमाचल और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में बड़े उत्साह से मनाया जाता है। यह पर्व शीत ऋतु के अंत, नई फसल के स्वागत और सूर्य देव के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का प्रतीक है। लोहड़ी की सबसे प्रमुख परंपरा है अग्नि प्रज्वलन, जिसके चारों ओर परिवार और समाज एकत्र होकर विधिवत रस्में निभाते हैं। यहां जानें कि लोहड़ी की अग्नि में क्या सामग्री डाली जाती है, लोहड़ी की अग्नि के कितने फेरे लेने चाहिए, लोहड़ी की अग्नि के आसपास घूमते हुए क्या बोलें।
लोहड़ी की अग्नि में क्या डाला जाता है?
लोहड़ी की अग्नि में डाली जाने वाली सामग्री समृद्धि, मिठास और शुभता का प्रतीक मानी जाती है। इसमें मुख्य रूप से तिल, गुड़, मूंगफली, रेवड़ी, पॉपकॉर्न (मक्के के दाने) और कभी-कभी खील या चावल डाले जाते हैं। तिल और गुड़ सर्दी में स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होते हैं, वहीं मूंगफली और रेवड़ी खुशहाली और मिठास का संकेत देती हैं। अग्नि में इन्हें अर्पित करना सूर्य देव और प्रकृति के प्रति धन्यवाद ज्ञापन माना जाता है।
लोहड़ी पर कितने फेरे लिए जाते हैं?
लोहड़ी की अग्नि के चारों ओर आमतौर पर तीन या सात फेरे लिए जाते हैं। तीन फेरे शरीर, मन और आत्मा की शुद्धि का प्रतीक माने जाते हैं, जबकि सात फेरे सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य, संतान, धन, शांति और दीर्घायु की कामना से जुड़े होते हैं। नए विवाह या नवजात शिशु के लिए मनाई जा रही लोहड़ी में सात फेरे लेने की परंपरा अधिक प्रचलित है।
लोहड़ी की अग्नि के चारों ओर घूमते हुए क्या बोलें?
अग्नि की परिक्रमा करते समय पारंपरिक रूप से लोहड़ी के लोकगीत और जयकारे बोले जाते हैं। जैसे
- आदर आए, दिलाथर जाए
- सुंदर मुंदरिये हो
- लोहड़ी दी लाख-लाख वधाइयां
इसके अलावा मन में सुख-समृद्धि की कामना करते हुए भगवान से प्रार्थना भी की जाती है। महिलाएं और बच्चे तालियां बजाते हुए गीत गाते हैं, जिससे वातावरण उल्लास और सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है।
इस तरह लोहड़ी की अग्नि केवल एक अलाव नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और सामूहिक खुशी का केंद्र होती है। अग्नि में अर्पण, परिक्रमा और लोकगीत - ये सभी मिलकर जीवन में नई ऊर्जा, आशा और समृद्धि का संदेश देते हैं। यही कारण है कि लोहड़ी आज भी प्रेम, एकता और कृतज्ञता का पर्व बनकर लोगों के दिलों में जीवित है।