अध्यात्म

क्यों धारण करते हैं पूजा पाठ में पीतांबर, पीले रंग का महत्व जान रह जाएंगे दंग

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jan 1, 2023, 08:03 AM IST

पूजा पाठ में रेशमी और गर्म वस्त्रों काे धारण करने स एकाग्रता बढ़ती है। मन शांत रहता है। नारायण को प्रिय है पीत वस्त्र। पीला वस्त्र धारण करने से प्रसन्न होते हैं गुरु ग्रह बृहस्पति। मिलता है पूजा, अनुष्ठान का पूर्ण फल। देव कार्यों या पितृ कार्यों में वस्त्रों का रखा जाता विशेष ध्यान।

Image

पूजा करते में पहनते हैं पीतांबर

KEY HIGHLIGHTS
  • पीतांबर धारण करने से होते हैं बृहस्पति प्रसन्न
  • स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूजा करने से मिलता शुभ फल
  • पीतांबर धारण कर पूजा करने से एकाग्रता बढ़ती

Importance Of Yellow Colour: गणवेश की कल्पना देश के विविध क्षेत्रों में प्रचलित है। जैसे ब्रज में पूजा के समय पीत वस्त्र यानी पीला वस्त्र धारण करने की परंपरा है, जिसे दूसरों शब्दों में पीतांबर धारण करना भी कहते हैं। तो वहीं दक्षिण भारत में श्वेत वस्त्र को हर अवसर पर सबसे शुभ माना जाता है। बात यहां हम करते हैं सनातन धर्म में पीतांबर गणवेश की। वातावरण निर्माण के लिए विशिष्ट पोशाक की आवश्यकता होती है। देव कार्य जैसे पूजा, होम और नित्य आन्हिक कार्य एवं पितृकार्य− श्राद्ध या अन्य धार्मिक प्रसंगों के समय अन्य दिनों की भांति वस्त धारण करना अनुचित माना जाता है। इसके पीछे धार्मिक ही नहीं वैज्ञानिक कारण भी निहित है।

शुद्ध वस्त्र- शुद्ध बुद्धि

जहां धार्मिक अवसर पर पुण्याह वाचन किया जाता है, वहां रसोइघर या बाहर छूआ छूत की संभावना भी नहीं होती है। लेकिन विवाहदि धार्मिक कार्यां में मंत्रोच्चारण का अधिकाधिक परिणाम शरीर, मन और बुद्धि पर होना अपेक्षित होता है। एेसे में पहना हुआ औरर कुसंस्कारों से युक्त वस्त्र कितना ही स्वच्छ क्यों न दिखे फिर भी उसका उपयोग नहीं करना चाहिए। इसके विपरीत अन्य स्वच्छ कपड़े पहनने पर उस व्यक्ति से संपर्क साधने की क्रिया आपने आप मंद हो जाती है और उसका ध्यान पूर्ण रूप से धार्मिक कार्यों में ही लगता है।

प्राचीन काल की मान्यता

प्राचीन काल में यह माना जाता था कि अस्वच्छ वस्त्र पहनकर किए गए धार्मिक कार्य का फल राक्षस ले जाते हैं। संगणक कक्ष या आपरेशन थिएटर में पैरों में जूते चप्पल पहनकर नहीं जाने दिया जाता क्योंकि वहां सच्चे अर्थ में छुआछूत का पालन किया जाता है। फिर पीतांबर जैसा वस्त्र पहनकर धार्मिक कार्य करने की शास्त्राज्ञा हो तो इसमें क्या गलत है। रेशमी या गर्म वस्त्र धार्मिक कार्य के लिए अधिक शुभ एवं लाभदायक होते हैं। धार्मिक कार्य के समय मंत्रोच्चारण से उठने वाले स्पंदन एवं विद्य़त लहरों का पूरे शरीर पर प्रभाव हो, इसके लिए रेशमी या गर्म वस्त्र उपयोगी सिद्ध होते हैं।

इन्हें साफ करने में भी सुविधा रहती है। पूजा, जप, तप, संस्कार, अनुष्ठान एवं पुरश्चरण आदि धार्मिक कार्यों के आरंभ में पीतांबर, गर्म वस्त्र या साफ धोया वस्त्र पहनकर शरीर पर उपवस्त्र डाल लेना चाहिए। वहीं पीला रंग स्वयं नारायण काे प्रिय है। ज्योतिष में पीला वस्त्र धारण करने से गुरु ग्रह बृहस्पति फल देते हैं।

डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्‍स नाउ नवभारत इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है।

टाइम्स नाउ नवभारत
टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटलauthor

अक्टूबर 2017 में डिजिटल न्यूज़ की दुनिया में कदम रखने वाला टाइम्स नाउ नवभारत अपनी एक अलग पहचान बना चुका है। अपने न्यूज चैनल टाइम्स नाउ नवभारत की सोच एवं नजरिए के साथ आगे बढ़ते हुए यह न्यूज़ प्लेटफॉर्म आम लोगों से जुड़े मुद्दों का गहराई से विश्लेषण एवं उसे आसान भाषा में पेश करता आया है। राजनीति से लेकर खेल, मनोरंजन, कारोबार और आम लोगों के जीवन पर असर डालने वालीं खबरों का मायने समझाते हुए यह डिजिटल प्लेटफॉर्म लोगों के भरोसे पर खरा उतरा है। \n\nसाथ ही यह अपने न्यूज़ चैनल पर दिखाए जाने वाली खबरों, शोज, स्पशेल कार्यक्रमों एवं रिपोर्टों को पेश करता है। चैनल के ये कार्यक्रम एवं शोज देश-दुनिया के घटनाक्रमों पर एक नया एवं विश्वसनीय नजरिया देते हैं। अपनी खबरों एवं विश्लेषण के चलते पसंदीदा न्यूज़ प्लेटफॉर्म बन चुका टाइम्स नाउ नवभारत, डिजिटल लोगों के भरोसे को लगातार मजबूत कर रहा है।

और पढ़ें
End of Article