जन्माष्टमी 2025 व्रत का पारण कब करें (Janmashtami Parana Time 2025): हर व्रत की तरह जन्माष्टमी के व्रत को खोलने के लिए विधिवत तरीके से पारण करना जररूी है। जानें जन्माष्टमी का व्रत कब खोला जाता है। जन्माष्टमी व्रत का पारण अष्टमी तिथि समाप्त होने पर या रोहिणी नक्षत्र समाप्त होने के बाद किया जाता है। अमूमन भक्त जन्माष्टमी की तारीख के अगले सूर्योदय के बाद व्रत को खोलते हैं। इस आधार पर जन्माष्टमी 2025 व्रत का पारण 16 अगस्त रात 9:34 बजे अष्टमी तिथि के समाप्त होने के बाद किया जा सकता है। लेकिन पूजा के लिए निशिता काल का मुहूर्त इस समय के बाद ही लगेगा। वहीं सूर्योदय के अनुसार चलने पर 17 अगस्त को सुबह 5:51 AM बजे के बाद जन्माष्टमी 2025 व्रत को खोला जा सकता है। आगे देखें जन्माष्टमी 2025 व्रत कितने बजे खोल सकते हैं, जन्माष्टमी 2025 व्रत का पारण कितने बजे है - की सटीक जानकारी।
जन्माष्टमी 2025 व्रत का पारण कितने बजे है
जन्माष्टमी 2025 व्रत का पारण इन तीन समय पर किया जा सकता है:
- 16 अगस्त रात 12:47 AM के बाद (निशिता पूजा के बाद)
- 16 अगस्त रात 9:34 PM के बाद (अष्टमी तिथि की समाप्ति के बाद)
- 17 अगस्त सुबह 5:51 AM के बाद (रोहिणी नक्षत्र समाप्ति के बाद, परंपरागत मान्यता)
जन्माष्टमी 2025 व्रत का पारण कब करना चाहिए
| व्रत और पूजा | समयकाल |
| जन्माष्टमी व्रत पारण समय 16 अगस्त को | 12:47 AM बाद या 9:34 PM बजे के बाद |
| जन्माष्टमी व्रत पारण समय 17 अगस्त | सूर्योदय के बाद या 5:51 AM पर |
| अष्टमी तिथि का आरंभ | 15 अगस्त को रात 11:49 बजे |
| अष्टमी तिथि समाप्ति | 16 अगस्त को रात 9:34 बजे |
| निशिता पूजा समय | 16 अगस्त, 12:04 AM – 12:47 AM |
| श्री कृष्ण का मध्यरात्रि जन्मकाल | लगभग 12:26 AM |
Janmashtami Vrat Ki Paran Vidhi
जन्माष्टमी व्रत पारण के लिए पूजा स्थान को साफ करें और भगवान कृष्ण को स्नान कराकर साफ वस्त्र पहनाएं। फिर पूजा की तरह भोग के लिए माखन, मिश्री, फल, दूध, पंचामृत आदि चढ़ाएं। तुलसी दल और फूलों की माला भी अवश्य रखें। दीपक जलाकर श्रीकृष्ण के भजन गाएं, मंत्र जाप करें और अंत में आरती करें। इसके बाद तुलसी-जल पिएं। पीना शुभ माना जाता है। फिर कुछ मीठा खाकर सात्विक भोजन लें। इस दिन तामसिक भोजन से परहेज करें और जरूरतमंद को दान अवश्य करें।
