बिजनेस

Sensex 813, Nifty 203 अंक नीचे बंद, सितंबर में 9 दिन में ₹5 लाख करोड़ साफ

शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन बड़ी गिरावट आई है। बेंचमार्क इंडेक्स सेसेंक्स जहां 813 अंक लुढ़ककर बंद हुआ। वहीं, Nifty में 203 अंक की गिरावट आई है। सितंबर में 9 दिन में निवेशकों के 5 लाख करोड़ साफ।

Image

शेयर बाजार में गिरावट

Closing Bell Nifty Sensex : भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 9 सितंबर को लगातार तीसरे कारोबारी दिन गिरावट रही। Nifty 203.60 अंक यानी 0.86% टूटकर 23,431.50 पर बंद हुआ। वहीं Sensex 813.35 अंक यानी 1.08% गिरकर 74,764.23 पर बंद हुआ। दोनों प्रमुख इंडेक्स दिन के निचले स्तर के करीब बंद हुए। Nifty ने कारोबार के दौरान 23,431.50 और Sensex ने 74,764.23 का निचला स्तर बनाया। BSE पर कुल 4,588 Stocks में कारोबार हुआ। इनमें 1,886 शेयर बढ़त में, जबकि 2,485 शेयर गिरावट रही। यह बताता है कि बाजार में व्यापक बिकवाली हावी है। सितंबर में 9 दिन के भीतर निवेशकों को करीब 5 लाख करोड़ का नुकसान हुआ है।

IT और Realty ने बाजार पर बनाया दबाव

सेक्टोरल स्तर पर Nifty IT सबसे ज्यादा कमजोर रहा और 3.24% टूट गया। Realty Index में भी 2.23% की गिरावट रही। Financial Services 1.24%, Financial Services 25/50 Index 1.23% और Private Bank Index 0.95% नीचे बंद हुए। FMCG, Pharma, Media और Healthcare जैसे सेक्टरों में भी कमजोरी रही। हालांकि, Metal Stocks ने बाजार को कुछ सहारा दिया। Nifty Metal 1.79% चढ़कर दिन का सबसे मजबूत सेक्टोरल इंडेक्स रहा। इसके बावजूद IT, Financial और Realty Stocks में तेज बिकवाली के कारण बाजार की कुल तस्वीर कमजोर बनी रही।

क्रूड ऑयल ने बिगाड़ी चाल

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी संकेत बहुत मजबूत नहीं रहे। यूरोपीय बाजारों में भी कमजोरी रही और DAX करीब 1.41% नीचे दिखा। अमेरिकी बाजारों में Dow Futures भी 0.42% नीचे था। इस बीच Brent Crude 2.78% उछलकर $100.64 प्रति बैरल पहुंच गया। WTI Crude भी 2.37% बढ़कर $95.24 पर कारोबार कर रहा था। कच्चे तेल की कीमतों में इस तेजी ने भारतीय बाजार के sentiment पर दबाव बढ़ाया।

रुपया भी कमजोर

डॉलर के मुकाबले रुपया भी कमजोर रहा। USD/INR 95.11 पर पहुंच गया, जो पिछले बंद 94.83 के मुकाबले करीब 0.30% की कमजोरी है। महंगे crude और कमजोर रुपये के बीच निवेशकों की चिंता बढ़ी रही।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

और पढ़ें
End of Article