अध्यात्म

Radha Rani Vrat Vidhi: राधा रानी का व्रत कैसे किया जाता है, जानें राधाष्टमी व्रत की सरल पूजा विधि और नियम

Radha Ashtami ka vrat kaise rakhte hain (Radha Rani Vrat Vidhi): राधा रानी का व्रत कैसे किया जाता है? जानें राधाष्टमी व्रत की सरल पूजा विधि, संकल्प, भोग, मंत्र, जरूरी नियम और व्रत पारण का तरीका।

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राधाष्टमी पर व्रत कैसे करते हैं, जानें संपूर्ण व्रत विधि

Radha Rani Vrat Vidhi: राधा रानी का व्रत केवल भूखे रहने का नाम नहीं है। यह मन को शांत करने, व्यवहार में मिठास लाने और श्रीराधा-कृष्ण के प्रेम को समझने का दिन है। यह व्रत मुख्य रूप से राधाष्टमी पर रखा जाता है। मान्यता है कि भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा रानी का प्राकट्य हुआ था। इसलिए इस दिन बरसाना, वृंदावन और देशभर के राधा-कृष्ण मंदिरों में विशेष उत्सव मनाया जाता है।

राधाष्टमी का व्रत रखने वाले भक्त सुबह से पूजा और नाम जप करते हैं। कोई निर्जल व्रत रखता है तो कोई फलाहार करता है। हालांकि व्रत का स्वरूप व्यक्ति की सेहत और पारिवारिक परंपरा के अनुसार अलग हो सकता है।

जन्माष्टमी के कितने दिन बाद राधाष्टमी आती है

जन्माष्टमी भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है, जबकि राधाष्टमी शुक्ल पक्ष की अष्टमी को होती है। दोनों पर्वों की अष्टमी तिथियों के बीच एक पक्ष यानी लगभग 15 दिनों का अंतर रहता है। इसलिए इसे आम बोलचाल में जन्माष्टमी के 15 दिन बाद आने वाला पर्व कहा जाता है।

राधाष्टमी व्रत का संकल्प कैसे लें

राधाष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठें। स्नान करके साफ कपड़े पहनें। गुलाबी, पीले या हल्के रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। पूजा स्थान की सफाई करने के बाद गंगाजल छिड़क दें। अब हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर राधा रानी का ध्यान करें और व्रत रखने का संकल्प लें।

घर पर राधा रानी की पूजा कैसे करें

एक साफ चौकी पर पीला या गुलाबी कपड़ा बिछाएं। उस पर राधा-कृष्ण की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। सबसे पहले दीपक जलाएं। इसके बाद राधा रानी को चंदन, कुमकुम, अक्षत, फूल और श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें।

यदि घर में छोटी धातु की प्रतिमा है तो उसे दूध, दही, घी, शहद और जल से बने पंचामृत से स्नान करा सकते हैं। तस्वीर या मिट्टी की प्रतिमा पर पंचामृत न डालें। केवल फूल और चंदन अर्पित करना पर्याप्त है।

राधा रानी को चुनरी, चूड़ी, बिंदी या दूसरी श्रृंगार सामग्री चढ़ाई जा सकती है। श्रीकृष्ण को पीले फूल और तुलसी दल अर्पित करें। ध्यान रखें कि तुलसी श्रीकृष्ण के भोग में रखी जाती है।

राधा रानी को किस चीज का भोग लगाएं

राधाष्टमी पर दूध से बनी मिठाई, माखन-मिश्री, खीर, रबड़ी, मालपुआ, पंजीरी या मौसमी फल का भोग लगाया जा सकता है। भोग सात्विक होना चाहिए। इसमें प्याज और लहसुन का प्रयोग न करें।

पूजा के बाद 'राधे राधे' नाम का जप करें। आप 'ॐ राधिकायै नमः' मंत्र का 108 बार जाप भी कर सकते हैं। इसके बाद राधाष्टमी व्रत कथा, राधा चालीसा या राधा-कृष्ण के भजन पढ़ें। अंत में राधा-कृष्ण की आरती करके भूल-चूक के लिए क्षमा मांगें। सामान्य पूजा परंपराओं में भी कथा, चालीसा, मंत्र जप, आरती और भोग को पूजा का प्रमुख हिस्सा बताया गया है। पूजा विधि संदर्भ

राधाष्टमी व्रत में क्या खा सकते हैं

अपनी क्षमता के अनुसार निर्जल, फलाहार या एक समय का सात्विक भोजन किया जा सकता है। फलाहार में फल, दूध, दही, मखाना, नारियल पानी, साबूदाना और सेंधा नमक से बने पकवान लिए जा सकते हैं।

गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग, बच्चे, डायबिटीज के मरीज या नियमित दवा लेने वाले लोग भूखे रहने का दबाव न लें।

राधाष्टमी व्रत का पारण कब करें

कुछ परिवार दोपहर की पूजा के बाद प्रसाद लेकर व्रत खोलते हैं, जबकि कुछ भक्त शाम की आरती या अगले दिन पारण करते हैं। इसलिए पारण का समय अपनी पारिवारिक और स्थानीय परंपरा के अनुसार रखें। जिस वर्ष व्रत किया जा रहा हो, उस वर्ष की अष्टमी तिथि और स्थानीय पूजा मुहूर्त अवश्य देख लें।

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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