Remedies for Early Marriage: हिंदू धर्म में बताए गए सोलह संस्कार में से विवाह संस्कार को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। शादी न होना या बहुत देर से शादी करना आजकल एक आम समस्या है। सामाजिक-आर्थिक कारणों के साथ-साथ ज्योतिषीय योग भी विवाह में देरी का एक बड़ा कारण माना जाता है, इसलिए हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अन्य सभी उपायों के साथ-साथ किसी अनुभवी ज्योतिषी का मार्गदर्शन लेकर विवाह संबंधी बाधाओं को दूर करें और सुखी वैवाहिक जीवन जीने की दिशा में आगे बढ़ें।
प्रयागराज के ज्योतिषाचार्य प्रणव ओझा ने बताया कि कई बार कुंडली में ग्रह-नक्षत्रों की खराब स्थिति का असर भी वैवाहिक जीवन पर पड़ता है। कुछ लोगों की शादी में काफी देरी का सामना करना पड़ता है तो कुछ लोगों की शादी में बार-बार रुकावटें आती हैं। कुछ लोगों को कुंडली के दोषों के कारण शादी के बाद भी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कुछ लोगों की कुंडली में ऐसे योग भी होते हैं जिनके कारण विवाह में दिक्कतें आती हैं।
आपको बता दें कि यदि कुंडली के पहले, चौथे, सातवें, आठवें, बारहवें भाव में मंगल स्थित हो तो कुंडली में मांगलिक योग होता है और यह विवाह में देरी का एक सामान्य कारण बन जाता है। वहीं अगर जन्म कुंडली के सातवें घर में चंद्रमा स्थित हो तो भी शादी के दौरान या शादी के बाद परेशानियां आती हैं।
इसके अलावा यदि जन्म कुंडली में सप्तम भाव में बृहस्पति की स्थिति हो तो भी विवाह में देरी होती है। साथ ही जन्म कुंडली में शुक्र के सातवें घर में स्थित होने से भी वैवाहिक समस्याएं उत्पन्न होती हैं। यदि शनि सप्तम भाव में नीच राशि में या वक्री या सिंह राशि में स्थित हो या सप्तम भाव में सूर्य अपनी नीच राशि में या कुंभ या मकर राशि में हो तो यह स्थिति भी विवाह में देरी का कारण बनती है।
शीघ्र विवाह के अचूक ज्योतिषीय उपाय - Astrological remedies for quick marriage shadi ke upay in hindi.
सप्तम भाव में गुरु दोष से मुक्ति के लिए गुरुवार या त्रयोदशी के दिन शिव सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए और भगवान शिव का अभिषेक व विधि-विधान से पूजन करना चाहिए। पाराशर ऋषि ने सप्तम भाव में स्थित बृहस्पति, चंद्रमा और शुक्र को केंद्र दोष की संज्ञा दी है। अत: इन तीनों के विद्यमान होने पर गुरु, शुक्र तथा चंद्रमा की अलग-अलग प्रकार से पूजा करनी चाहिए।
अगर जन्म कुंडली के सप्तम भाव में शुक्र स्थित हो तो शुक्रवार के दिन कच्चे दूध में जल मिलाकर भगवती दुर्गा या महालक्ष्मी स्वरूप का अभिषेक करना चाहिए तथा देवी अथर्वशीर्ष स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। मंगल के शुभ प्रभाव के लिए उज्जैन स्थित मंगलनाथ मंदिर में जाकर 'शांति भात पूजा' करानी चाहिए। इसके अलावा मंगलवार के दिन किसी प्राचीन हनुमान मंदिर में जाकर चोला चढ़ाने से भी मांगलिक बाधाएं दूर होती हैं। साथ ही सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा करने से लाभ मिलता है। भगवान शिव का दूध मिश्रित जल से अभिषेक करने से सप्तम भाव में स्थित चंद्रमा की शांति होती है और विवाह संबंधी बाधाएं दूर होती हैं।
शनि ग्रह द्वारा उत्पन्न बाधाओं से मुक्ति के लिए शीघ्र विवाह का संकल्प लेकर सरसों के तेल में केसर मिलाकर शनिवार और अमावस्या के दिन शनिदेव को दीपदान करना चाहिए। सूर्य द्वारा उत्पन्न विवाह बाधा की शांति के लिए रविवार को भगवान विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए और सप्तम भाव में स्थित ग्रह का एनलिसिस करके संबंधित ग्रह की पूजा करनी चाहिए।
