अध्यात्म

हरिद्रा गणेश कौन हैं, क्यों मां बगलामुखी के साथ की जाती है इनकी पूजा

Haridra Ganesh: गणेश जी के कई स्वरूपों में हरिद्रा स्वरूप बहुत महत्व रखता है। उनके इस रूप की पूजा खासतौर पर मां बगलामुखी के साथ होती है। जानें कौन हैं हरिद्रा गणेश।

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गणेश जी का हरिद्रा स्वरूप क्या है, क्यों है विशेष

Haridra Ganesh: सनातन परंपरा में शक्ति उपासना का एक अत्यंत रहस्यमय और प्रभावशाली स्वरूप दश महाविद्या साधना माना जाता है। तंत्र शास्त्र के अनुसार माता के प्रत्येक महाविद्या रूप के साथ एक विशेष भैरव और एक विशिष्ट गणेश स्वरूप जुड़े होते हैं। ये स्वरूप साधना की पूर्णता, सुरक्षा और सिद्धि के प्रतीक माने जाते हैं। इसी क्रम में माता बगलामुखी (bagalamukhi mata) की साधना में गणेश जी (Ganesh Ji) के जिस स्वरूप की पूजा होती है, वो है हरिद्रा गणेश।

क्यों विशेष हैं हरिद्रा गणेश

'हरिद्रा' का अर्थ है हल्दी। श्री हरिद्रा गणेश का स्वरूप पूर्णतः हल्दी से निर्मित या हल्दी के रंग जैसा पीत वर्ण होता है। पीला रंग स्वयं माता बगलामुखी का प्रिय रंग माना जाता है, इसलिए उनकी साधना में हरिद्रा गणेश का महत्व अत्यंत बढ़ जाता है।

धार्मिक मान्यता है कि जिस प्रकार किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है, उसी प्रकार बगलामुखी साधना में सबसे पहले हरिद्रा गणेश को प्रसन्न किया जाता है। वे साधक के मार्ग में आने वाली बाधाओं, भय और मानसिक अस्थिरता को दूर करते हैं।

बगलामुखी साधना में हरिद्रा गणेश की भूमिका

तांत्रिक परंपराओं में माता बगलामुखी को शत्रु स्तंभन, वाक् विजय और न्याय की देवी माना गया है। उनकी साधना अत्यंत शक्तिशाली मानी जाती है, इसलिए बिना गणेश कृपा के यह साधना अधूरी मानी जाती है।

हरिद्रा गणेश साधक की ऊर्जा को संतुलित करते हैं और साधना के दौरान उत्पन्न होने वाली नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करते हैं। मान्यता है कि उनकी पूजा करने से शत्रु का क्रोध शांत होता है, विरोधी व्यक्ति का मन परिवर्तित होता है और परिस्थितियां साधक के पक्ष में आने लगती हैं।

बता दें कि यहां 'वशीकरण' का अर्थ किसी पर अनुचित नियंत्रण नहीं, बल्कि विरोध और शत्रुता को समाप्त कर सकारात्मकता स्थापित करना माना गया है।

हल्दी से जुड़ी पूजा का आध्यात्मिक रहस्य

हल्दी को भारतीय संस्कृति में मंगल, पवित्रता और संरक्षण का प्रतीक माना जाता है। आयुर्वेद और आध्यात्मिक विज्ञान दोनों में हल्दी को ऊर्जा शुद्ध करने वाला तत्व माना गया है। इसलिए हरिद्रा गणेश की पूजा में हल्दी की माला, हल्दी का तिलक और पीले पुष्पों का विशेष महत्व होता है।

साधक प्रायः हल्दी की गांठ से गणेश प्रतिमा बनाकर या हरिद्रा गणेश की मूर्ति स्थापित कर पूजा करते हैं। पीले वस्त्र धारण करना, पीले आसन पर बैठना और पीले नैवेद्य अर्पित करना इस साधना की प्रमुख विशेषताएं मानी जाती हैं।

हरिद्रा गणेश की पूजा कब और कैसे करें

हरिद्रा गणेश की पूजा विशेष रूप से बगलामुखी जयंती, गुरुवार, अष्टमी तिथि या किसी महत्वपूर्ण साधना आरंभ से पहले की जाती है। पूजा में गणेश मंत्र, हरिद्रा गणेश मंत्र या गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ किया जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा, संयम और सकारात्मक उद्देश्य के साथ की गई पूजा साधक को आत्मबल, आत्मविश्वास और निर्णय शक्ति प्रदान करती है।

हरिद्रा गणेश की साधना का मूल संदेश

हरिद्रा गणेश और माता बगलामुखी की संयुक्त उपासना केवल बाहरी शत्रुओं को शांत करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह भीतर के भय, क्रोध और अस्थिरता को भी नियंत्रित करने की साधना है। जब मन स्थिर होता है, तब जीवन की कठिन परिस्थितियां भी सहज रूप से संभलने लगती हैं।

इसी कारण तंत्र साधना परंपरा में कहा गया है- पहले गणपति, फिर शक्ति। मान्यता है कि हरिद्रा गणेश की कृपा से ही माता बगलामुखी की साधना सिद्धि की ओर अग्रसर होती है और साधक को आंतरिक तथा बाह्य दोनों स्तरों पर विजय प्राप्त होती है।

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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