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Baglamukhi Chalisa: दूर होंगे सारे संकट और जीवन में आएगी सुख-शांति, करें बगलामुखी चालीसा का पाठ, यहां देखें लिरिक्स हिंदी में

Baglamukhi Chalisa In Hindi (बगलामुखी चालीसा) Maa Baglamukhi Chalisa Chalisa Lyrics: मां बगलामुखी की कृपा पाने के लिए चालीसा का पाठ बहुत प्रभावशाली माना जाता है। यहां पढ़ें बगलामुखी चालीसा के लिरिक्स, सही पाठ विधि और फायदे, जिससे जीवन की बाधाएं और नकारात्मक ऊर्जा दूर करने में मदद मिलती है।

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बगलामुखी चालीसा का पूरा पाठ हिंदी लिरिक्स के साथ, फायदे और विधि

Baglamukhi Chalisa In Hindi (बगलामुखी चालीसा) Maa Baglamukhi Chalisa Chalisa Lyrics: हिंदू धर्म में मां बगलामुखी को शक्ति और संरक्षण की देवी माना जाता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से मां बगलामुखी की उपासना करता है, उसके जीवन से डर, बाधाएं और शत्रु बाधा धीरे-धीरे खत्म होने लगती है। बगलामुखी चालीसा का नियमित पाठ मानसिक शांति देने के साथ आत्मबल भी बढ़ाता है। खासकर जब जीवन में किसी तरह का विवाद, तनाव या विरोध का सामना हो, तब यह चालीसा एक मजबूत सहारा बन सकती है। इस लेख में हम आपको बगलामुखी चालीसा के लिरिक्स, इसे पढ़ने का सही तरीका और इससे मिलने वाले फायदों को आसान और समझने योग्य भाषा में बताएंगे।

बगलामुखी चालीसा (Baglamukhi chalisa lyrics)

॥ दोहा ॥

सिर नवाइ बगलामुखी,

लिखूं चालीसा आज ॥

कृपा करहु मोपर सदा,

पूरन हो मम काज ॥

॥ चौपाई ॥

जय जय जय श्री बगला माता ।

आदिशक्ति सब जग की त्राता ॥

बगला सम तब आनन माता ।

एहि ते भयउ नाम विख्याता ॥

शशि ललाट कुण्डल छवि न्यारी ।

असतुति करहिं देव नर-नारी ॥

पीतवसन तन पर तव राजै ।

हाथहिं मुद्गर गदा विराजै ॥ 4 ॥

तीन नयन गल चम्पक माला ।

अमित तेज प्रकटत है भाला ॥

रत्न-जटित सिंहासन सोहै ।

शोभा निरखि सकल जन मोहै ॥

आसन पीतवर्ण महारानी ।

भक्तन की तुम हो वरदानी ॥

पीताभूषण पीतहिं चन्दन ।

सुर नर नाग करत सब वन्दन ॥ 8 ॥

एहि विधि ध्यान हृदय में राखै ।

वेद पुराण संत अस भाखै ॥

अब पूजा विधि करौं प्रकाशा ।

जाके किये होत दुख-नाशा ॥

प्रथमहिं पीत ध्वजा फहरावै ।

पीतवसन देवी पहिरावै ॥

कुंकुम अक्षत मोदक बेसन ।

अबिर गुलाल सुपारी चन्दन ॥ 12 ॥

माल्य हरिद्रा अरु फल पाना ।

सबहिं चढ़इ धरै उर ध्याना ॥

धूप दीप कर्पूर की बाती ।

प्रेम-सहित तब करै आरती ॥

अस्तुति करै हाथ दोउ जोरे ।

पुरवहु मातु मनोरथ मोरे ॥

मातु भगति तब सब सुख खानी ।

करहुं कृपा मोपर जनजानी ॥ 16 ॥

त्रिविध ताप सब दुख नशावहु ।

तिमिर मिटाकर ज्ञान बढ़ावहु ॥

बार-बार मैं बिनवहुं तोहीं ।

अविरल भगति ज्ञान दो मोहीं ॥

पूजनांत में हवन करावै ।

सा नर मनवांछित फल पावै ॥

सर्षप होम करै जो कोई ।

ताके वश सचराचर होई ॥ 20 ॥

तिल तण्डुल संग क्षीर मिरावै ।

भक्ति प्रेम से हवन करावै ॥

दुख दरिद्र व्यापै नहिं सोई ।

निश्चय सुख-सम्पत्ति सब होई ॥

फूल अशोक हवन जो करई ।

ताके गृह सुख-सम्पत्ति भरई ॥

फल सेमर का होम करीजै ।

निश्चय वाको रिपु सब छीजै ॥ 24 ॥

गुग्गुल घृत होमै जो कोई ।

तेहि के वश में राजा होई ॥

गुग्गुल तिल संग होम करावै ।

ताको सकल बंध कट जावै ॥

बीलाक्षर का पाठ जो करहीं ।

बीज मंत्र तुम्हरो उच्चरहीं ॥

एक मास निशि जो कर जापा ।

तेहि कर मिटत सकल संतापा ॥ 28 ॥

घर की शुद्ध भूमि जहं होई ।

साध्का जाप करै तहं सोई ॥

सेइ इच्छित फल निश्चय पावै ।

यामै नहिं कदु संशय लावै ॥

अथवा तीर नदी के जाई ।

साधक जाप करै मन लाई ॥

दस सहस्र जप करै जो कोई ।

सक काज तेहि कर सिधि होई ॥ 32 ॥

जाप करै जो लक्षहिं बारा ।

ताकर होय सुयशविस्तारा ॥

जो तव नाम जपै मन लाई ।

अल्पकाल महं रिपुहिं नसाई ॥

सप्तरात्रि जो पापहिं नामा ।

वाको पूरन हो सब कामा ॥

नव दिन जाप करे जो कोई ।

व्याधि रहित ताकर तन होई ॥ 36 ॥

ध्यान करै जो बन्ध्या नारी ।

पावै पुत्रादिक फल चारी ॥

प्रातः सायं अरु मध्याना ।

धरे ध्यान होवैकल्याना ॥

कहं लगि महिमा कहौं तिहारी ।

नाम सदा शुभ मंगलकारी ॥

पाठ करै जो नित्या चालीसा ।

तेहि पर कृपा करहिं गौरीशा ॥ 40 ॥

॥ दोहा ॥

सन्तशरण को तनय हूं,

कुलपति मिश्र सुनाम ।

हरिद्वार मण्डल बसूं ,

धाम हरिपुर ग्राम ॥

उन्नीस सौ पिचानबे सन् की,

श्रावण शुक्ला मास ।

चालीसा रचना कियौ,

तव चरणन को दास ॥

बगलामुखी चालीसा के फायदे (Baglamukhi Chalisa Benefits)

  • शत्रु और विरोध से राहत मिलती है - मान्यता है कि नियमित पाठ से विरोधियों की नकारात्मकता कम होती है और आपको अंदर से मजबूत महसूस होता है।
  • आत्मविश्वास और हिम्मत बढ़ती है - जब आप रोज चालीसा पढ़ते हैं, तो धीरे-धीरे डर और घबराहट कम होने लगती है और मन में साहस आता है।
  • विवाद और तनाव में सहारा मिलता है - चाहे पारिवारिक तनाव हो या कानूनी मामला, यह पाठ मन को शांत रखकर सही सोचने की ताकत देता है।
  • नकारात्मक ऊर्जा से बचाव होता है - ऐसा माना जाता है कि मां बगलामुखी का स्मरण करने से आसपास की नकारात्मकता कम होती है और सकारात्मक माहौल बनता है।
  • मन शांत और फोकस बेहतर होता है - नियमित पाठ करने से मन भटकता नहीं है और एकाग्रता धीरे-धीरे मजबूत होती है।

बगलामुखी चालीसा पाठ विधि (Baglamukhi Chalisa Path Vidhi)

बगलामुखी चालीसा का पाठ करने के लिए सबसे पहले समय का ध्यान रखना जरूरी है। कोशिश करें कि सुबह जल्दी या रात के शांत माहौल में इसे पढ़ें, ताकि मन पूरी तरह एकाग्र रह सके। पाठ शुरू करने से पहले स्नान कर लें और साफ-सुथरे कपड़े पहनें। पूजा स्थान भी साफ और व्यवस्थित होना चाहिए, क्योंकि साफ माहौल मन को स्थिर करता है।

अपने सामने मां बगलामुखी की तस्वीर या मूर्ति रखें और एक दीपक या अगरबत्ती जलाकर पूजा की शुरुआत करें। मां को पीला रंग बेहद प्रिय माना जाता है, इसलिए पीले फूल या पीले वस्त्र का उपयोग करना शुभ माना जाता है। इसके बाद शांति से बैठकर चालीसा का पाठ करें और हर शब्द को समझते हुए पढ़ने की कोशिश करें।

सबसे जरूरी बात है नियमितता। अगर रोज पाठ कर सकें तो बेहतर है, नहीं तो कम से कम मंगलवार या गुरुवार को जरूर पढ़ें। सच्चे मन और श्रद्धा के साथ किया गया पाठ ही सबसे ज्यादा प्रभावी माना जाता है।

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

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