Baglamukhi Jayanti 2026: सनातन धर्म में मां बगलामुखी शत्रुओं का नाश करने वाले देवी के रूप में जानी जाती हैं। देवी बगलामुखी को देवी पीताम्बरा, बगला और ब्रह्मास्त्र विद्या के नाम से भी जाना जाता है। कहते हैं जो कोई माता की सच्चे मन से पूजा-अर्चना करता है उसे जीवन की सभी बाधाओं से मुक्ति मिल जाती है। मां बगलामुखी शत्रु बाधा से मुक्ति दिलाने वाली देवी के रूप में पूजी जाती हैं। साल 2026 में बगलामुखी जयंती कब और किस दिन है, इसकी डेट को लेकर जरा कंफ्यूजन है। यहां से आप बगलामुखी जयंती की तिथि, मुहूर्त और साथ- साथ मंत्रों के बारे में विस्तार से जान सकते हैं। यहां बगलामुखी जयंती पर कैसे पूजा करनी है, इसके बारे में भी बताया गया है।
मां बगलामुखी कब है?
पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि का आरंभ 23 अप्रैल, गुरुवार के दिन रात में 8 बजकर 50 मिनट पर होगा। वहीं, अगले दिन यानी 24 अप्रैल, शुक्रवार के दिन शाम को 7 बजकर 22 मिनट तक अष्टमी तिथि व्याप्त रहेगी। इसके उपरांत नवमी तिथि का आरंभ हो जाएगा। ऐसे में उदया तिथि की गणना के अनुसार, 24 अप्रैल को ही बगलामुखी जयंती मनाई जाएगी।
मां बगलामुखी 2026 शुभ मुहूर्त-
- ब्रह्म मुहूर्त- 04:19 से 05:03
- अभिजित मुहूर्त- 11:53 से 12:46
- गोधूलि मुहूर्त- 18:51 से 19:13
- अमृत काल- 14:01 से 15:35
- विजय मुहूर्त - 14:30 से 15:23
- सायाह्न सन्ध्या- 18:52 से 19:57
मां बगलामुखी के मंत्र-
- एकाग्रता बढ़ाने हेतु इस मंत्र का करें जाप - जिह्वाग्रमादाय करेण देवीं, वामेन शत्रून् परि-पीडयन्तीम् । गदाभिघातेन च दक्षिणेन, पीताम्बराढ्यां द्विभुजां नमामि ।।
- दरिद्रता नाश हेतु इस मंत्र का करें जाप - श्री हृीं ऐं भगवती बगले मे श्रियं देहि-देहि स्वाहा।।
- भय नाशक मंत्र - ॐ ह्लीं ह्लीं ह्लीं बगले सर्व भयं हन।।
- शत्रुनाशक मंत्र - ॐ बगलामुखी देव्यै ह्लीं ह्रीं क्लीं शत्रु नाशं कुरु।।
- परीक्षा में अच्छे परिणाम के लिए इस मंत्र का करें जाप - ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं बगामुखी देव्यै ह्लीं साफल्यं देहि देहि स्वाहा:।।
मां बगलामुखी पूजा विधि-
माता बगलामुखी की साधना करते वक्त पीले रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए। साथ ही आपका आसन भी पीले रंग का होना चाहिए। पूजा स्थल में मां बगलामुखी की प्रतिमा या तस्वीर रखें। इसके बाद माता के सामने दीपक जलाकर रखें और कलश भी स्थापित करें। फिर माता को पीले फूल अर्पित करें और उन्हें पीले रंग के ही भोज्य पदार्थों का भोग लगाएं। इसके बाद माता की विधि विधान पूजा अर्चना करें और उनके मंत्र का जाप भी करें। अंत में माता की आरती करके प्रसाद सभी में बांट दें।
