Tiger Gemstone Benefti: रत्न बहुत प्रभावशाली होते हैं। इनको धारण करने से कुंडली में बैठे बुरे ग्रह अपना बुरा प्रभाव छोड़ कर अच्छा प्रभाव देने लगते हैं। पुराने समय में बड़े - बड़े राजा महाराजा बेशकीमती रत्नों का उपयोग किया करते थे। रत्नों की चमक हर व्यक्ति को अपनी ओर आकर्षित करती है। ऐसा ही यह टाइगर रत्न है। यह अपने नाम की तरह काम भी करता है। टाइगर रत्न सबसे अधिक प्रभावी और शीघ्र फल प्रदान करने वाला रत्न है। इसे टाइगर आई भी कहते हैं। इस रत्न पर टाइगर के समान पीली एवं काली धारियां होने के कारण इसे टाइगर स्टोन कहा जाता है। यह प्रभाव में भी टाइगर यानी चीता के समान लक्षण उत्पन्न करता है। इसे धारण करने से तुरंत लाभ मिलता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जो व्यक्ति आत्मविश्वास की कमी के कारण बार- बार व्यापार एवं अन्य कार्यों में असफल होता हो। दुखी जीवन व्यतीत कर रहा हो। उस व्यक्ति को टाइगर स्टोन गजब का आत्म विश्वास प्रदान करता है। इसे धारण करने से पूर्ण सफलता मिलती है। व्यक्ति साहसी एवं पुरुषार्थी बन जाता है। शेर जैसा आत्मबल साहस भी यह रत्न प्रदान करने में सक्षम है। डरपोक, उदासीन व्यक्तियों का यह स्टोन अदृश्य साथी माना जाता है। ऐसे व्यक्तियों में टाइगर रत्न पहनने से जागरूकता उत्पन्न होती है।
टाइगर स्टोन की यह खूबियां होती हैं
टाइगर रत्न सबसे अधिक प्रभावी तथा शीघ्र फल प्रदान करने वाला रत्न है। अल्प समय में यह अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर देता है। रत्न जो कि ऊर्जा से लबरेज चमकीले प्रभावशाली पत्थर होते हैं। रत्नों के द्वारा विभिन्न ग्रहों की रश्मियों व तरंगों द्वारा मानव के शरीर में पहुंच कर स्थायी उपाय किया जाता है। इसे रत्न ज्योतिष विज्ञान कहते हैं। ज्योतिष में फलित के बाद उपाय का स्थान सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। उपायों में एक है रश्मि विज्ञान जिसे रत्न ज्योतिष विज्ञान कहते हैं। रत्न विज्ञान के आधार पर ज्योतिष में कई पद्धतियां उपाय के लिए रत्न धारण की आज्ञा प्रदान करती हैं। परंतु सिद्ध एवं प्राण प्रतिष्ठा किए बिना रत्न धारण करना विशेष सफल या चमत्कारी फलदायी नहीं होता। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार डरपोक उदासीन व्यक्तियों का यह स्टोन अदृश्य साथी माना जाता है। ऐसे व्यक्तियों में टाइगर रत्न पहनने से जागरूकता उत्पन्न होती है। साहस में वृद्धि होती है। मानसिक तनाव कम होता है। यह रत्न उन व्यक्तियों के लिए भी शुभ फल प्रदान करता है, जिनका भाग्य सोया हुआ है।
मृत भाग्य जीवित हो जाता है
सोए भाग्य से आशय है कि व्यक्ति अपने प्रयासों का पूर्णत: लाभ नहीं ले पा रहा है। मेहनत का फल बराबर नहीं मिल पा रहा है। उस व्यक्ति को जीवन में हर कदम पर विभिन्न परेशानियों एवं संघर्षों का सामना करना पड़ता है। जीवन में मृत्यु तुल्य दुख भोग रहा हो अनहोनी होती हो समस्याएं निरंतर बढ़ती जा रही हो यश कीर्ति तो कभी सामने आती ही न हो। दुश्मनों से परेशान हो। ऐसी स्थिति में टाइगर स्टोन वरदान सिद्ध होता है। इसे प्राण प्रतिष्ठा करा कर मध्यमा उंगली में शनिवार के दिन प्रात: धारण करना चाहिए। सोए हुए भाग्य को यह टाइगर रत्न जगा देगा।
इस रत्न को पहनने से ये सभी ग्रह एक दम सीधे चलेंगे
सूर्य ग्रह के लिए रविवार के दिन अनामिका उंगली में इस रत्न को धारण करना चाहिए। इससे आपका सूर्य बलवान होने के साथ आपको अनुकूल फल प्रदान करेगा। अगर आप अपने चंद्रमा को मजबूत करना चाहते हैं। अनुकूल फल लेना चाहते हैं। तो सोमवार के दिन अनामिका उंगली में आपको यह टाइगर स्टोन धारण कर लेना चाहिए।
मंगल ग्रह को मजबूत करने के लिए मंगलवार के दिन तर्जनी उंगली में इस पत्थर को धारण करने से अप्रत्याशित लाभों की प्राप्ति होती है। बुध ग्रह को मजबूत करने के लिए बुधवार के दिन कनिष्ठा उंगली में इस रत्न को धारण कर लेना चाहिए। गुरु ग्रह से लाभ प्राप्त करने के लिए इसको वीरवार के दिन तर्जनी उंगली में पहनने से जीवन मे बहुत लाभ प्राप्त होंगे। जो लोग शुक्र को मजबूत करने के लिए कई तरह के उपाय करते है। वह शुक्रवार के दिन इस पत्थर को गले में धारण करें सभी बिगड़े काम बहुत जल्दी बनते दिखाई देंगे। न्याय के देवता शनि ग्रह की कृपा प्राप्त करने में यह रत्न बहुत ही उपयोगी माना गया है। शनिवार के दिन मध्यमा उंगली में यह धारण कर लिया तो शनिदेव की पूर्ण कृपा प्राप्त होगी। दुष्ट ग्रह राहू के प्रकोप से बचने के लिए बुधवार के दिन दाएं हाथ में इस रत्न को धारण करने से मनोकामनाओं की पूर्ति होगी।
एक कहावत है। केत छुड़ावै खेत यानी जिस पर केतु का बुरा प्रभाव हो उस व्यक्ति को केतु ग्रह ना घर का रहने देता है ना घाट का। जमीन से भी वंचित कर देता है घर परिवार त्यागना पड़ जाता है। उस स्थिति में यह रत्न टाइगर स्टोन बहुत कामयाब माना गया है। बुधवार के दिन बाएं हाथ में इसको पहनने से केतु अपना बुरा प्रभाव नहीं दिखा पाता।
( डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)

