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EVM के दौर में भी क्यों जिंदा है 'बैलेट पेपर'? भारत में आज भी इन चुनावों में पुराने तरीके से होती है वोटिंग

भारत में चुनाव को एक पर्व की तरह माना जाता, पर क्या आपने सोचा कि EVM के दौर में भी भारत में कई चुनाव में बैलेट पेपर का इस्तेमाल क्यों होता है? जानिए इसकी वजह क्या है...

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EVM के दौर में भी क्यों जिंदा है 'बैलेट पेपर'? भारत में आज भी इन चुनावों में पुराने तरीके से होती है वोटिंग
Authored by: रवि वैश्य
Updated Oct 30, 2026, 12:53 IST
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भारत में लोकसभा और विधानसभा चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) का इस्तेमाल आम हो चुका है, लेकिन बैलेट पेपर ( Ballot Paper) की व्यवस्था पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति, MLC चुनाव में आज भी मतदाता बैलेट पेपर के जरिए अपना वोट डालते हैं। इसके अलावा पंचायत और नगर निकायों के चुनाव में भी अलग-अलग राज्यों के नियमों के मुताबिक बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया जाता है।

आखिर इन चुनावों में EVM की जगह बैलेट पेपर क्यों इस्तेमाल होता है? क्या इसकी वजह चुनाव की अलग प्रक्रिया है या कोई कानूनी व्यवस्था? आइए जानते हैं...

क्या पूरी तरह खत्म हो गया बैलेट पेपर?

लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मतदान के लिए EVM और VVPAT का इस्तेमाल होता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इन चुनावों में कागजी मतपत्र का इस्तेमाल पूरी तरह खत्म हो गया है। कुछ श्रेणियों के मतदाताओं को पोस्टल बैलेट की सुविधा भी दी जाती है। इसमें पात्र सेवा मतदाता, चुनाव ड्यूटी में तैनात कर्मचारी और निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित अन्य श्रेणियों के मतदाता शामिल हो सकते हैं। निर्धारित नियमों के तहत पात्र वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग मतदाताओं को भी पोस्टल बैलेट की सुविधा मिल सकती है।

ईवीएम बनाम बैलेट पेपर

ईवीएम बनाम बैलेट पेपर

राष्ट्रपति चुनाव में आज भी बैलेट पेपर से वोटिंग

भारत में राष्ट्रपति का चुनाव आम जनता सीधे नहीं करती। इसमें निर्वाचित सांसद और राज्यों तथा दिल्ली-पुडुचेरी सहित संबंधित विधानसभाओं के निर्वाचित विधायक हिस्सा लेते हैं। इस चुनाव में EVM का इस्तेमाल नहीं होता, बल्कि बैलेट पेपर के जरिए मतदान कराया जाता है। इसकी सबसे बड़ी वजह चुनाव की अलग मतदान प्रणाली है।

वोटर अपनी पसंद के उम्मीदवार के सामने पहली पसंद के लिए '1' लिखता है

मतदाता अपनी पसंद के उम्मीदवार के सामने पहली पसंद के लिए '1' लिखता है। इसके बाद वह चाहे तो दूसरे उम्मीदवार के सामने '2' और तीसरे के सामने '3' लिख सकता है। राष्ट्रपति चुनाव की वरीयता आधारित मतगणना की प्रक्रिया इससे अलग है। इसलिए इस चुनाव में बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया जाता है।

भारत में चुनाव बड़ा पर्व माना जाता है

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राज्यसभा और विधान परिषद (MLC) चुनाव

राज्यसभा और विधान परिषद (MLC) चुनाव यहां भी विधायक वोट देते हैं और Single Transferable Vote सिस्टम है। इसलिए कागज पर ही वोटिंग होती है। हाल ही में अक्टूबर 2026 में देश के कुछ राज्यों (जैसे उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, बिहार और महाराष्ट्र) में विधान परिषद की 28 सीटों पर चुनाव हुए, जो पूरी तरह से बैलेट पेपर के जरिए कराए गए।

पंचायत और नगर निकाय चुनावों में भी बैलेट पेपर

पंचायत और नगर निकाय चुनाव संबंधित राज्यों के राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission) कराते हैं। इन स्थानीय चुनावों में मतदान का तरीका पूरे देश में एक जैसा नहीं है। अलग-अलग राज्यों में स्थानीय निकाय चुनावों के लिए अलग नियम और व्यवस्थाएं हैं। कहीं EVM का इस्तेमाल होता है तो कहीं बैलेट पेपर से मतदान कराया जाता है।

भारत में कब शुरू हुआ EVM का इस्तेमाल?

भारत में पहले चुनाव 1951-52 में बैलेट पेपर के जरिए कराए गए थे। उस समय मतदान की प्रक्रिया आज के मुकाबले काफी अलग थी। शुरुआती दो आम चुनावों में प्रत्येक उम्मीदवार के लिए अलग-अलग मतपेटियां रखी जाती थीं। बाद में मतपत्र पर निशान लगाकर वोट डालने की व्यवस्था शुरू हुई। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का प्रयोग पहली बार मई 1982 में केरल के परूर विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में किया गया था। साल 2004 के लोकसभा चुनाव में पहली बार देशभर की सभी 543 लोकसभा सीटों पर EVM से मतदान कराया गया। इसके बाद आम चुनावों में बैलेट पेपर की जगह EVM ने ले ली।

आखिर क्यों जरूरी है बैलेट पेपर की व्यवस्था?

आखिर क्यों जरूरी है बैलेट पेपर की व्यवस्था?

आखिर क्यों जरूरी है बैलेट पेपर की व्यवस्था?

भारत में सभी चुनाव एक ही तरीके से नहीं होते। लोकसभा और विधानसभा चुनावों में उम्मीदवार को सबसे ज्यादा वोट मिलने पर जीत मिलती है, जबकि राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनावों में वरीयता आधारित मतदान प्रणाली अपनाई जाती है। इसी तरह स्थानीय निकाय चुनावों की व्यवस्था राज्य के कानूनों और नियमों पर निर्भर करती है। इसलिए हर चुनाव में EVM का इस्तेमाल अनिवार्य नहीं है। बैलेट पेपर आज भी भारतीय चुनाव व्यवस्था का हिस्सा है, क्योंकि देश में अलग-अलग संवैधानिक पदों और संस्थाओं के चुनाव के लिए अलग-अलग मतदान प्रणालियां निर्धारित हैं।

क्या बैलेट पेपर वापस आएगा?

सुप्रीम कोर्ट में कई बार बैलेट पेपर की मांग वाली याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं। चुनाव आयोग का कहना है EVM पूरी तरह सुरक्षित है और VVPAT से पर्ची भी मिलती है। कानून के अनुसार जब तक चुनाव प्रणाली में Preference Marking (1,2,3) की जरूरत है, तब तक बैलेट पेपर खत्म नहीं होगा।

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