अध्यात्म

Ahoi Ashtami 2026: अहोई अष्टमी पर चंद्रमा नहीं, तारों को देखकर क्यों खोला जाता है व्रत? जानें धार्मिक कारण

Ahoi Ashtami 2026: अहोई अष्टमी पर माताएं चंद्रमा के बजाय तारों को देखकर व्रत खोलती हैं। इसके पीछे संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की धार्मिक मान्यता जुड़ी है। जानें तारों को अर्घ्य देने की परंपरा का महत्व।

Image

अहोई अष्टमी पर तारों को अर्घ्य क्यों दिया जाता है? (Photo - AI)

Ahoi Ashtami 2026: हिंदू धर्म में अहोई अष्टमी का व्रत संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखा जाता है। इस दिन माताएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को अहोई माता की पूजा-अर्चना करती हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि करवा चौथ की तरह अहोई अष्टमी का व्रत चंद्रमा को देखकर नहीं, बल्कि तारों को देखकर क्यों खोला जाता है? आखिर इस परंपरा के पीछे क्या धार्मिक मान्यता है और तारों को अर्घ्य देने का क्या महत्व है? आइए जानते हैं।

अहोई अष्टमी पर व्रत खोलने की परंपरा

अहोई अष्टमी के दिन माताएं सूर्योदय से लेकर शाम को तारों के दर्शन होने तक व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन तारों को देखकर व्रत खोलना शुभ माना जाता है। इसके पीछे एक विशेष परंपरा जुड़ी हुई है। जहां करवा चौथ का व्रत पति की लंबी आयु की कामना से रखा जाता है और चंद्रमा को अर्घ्य देकर खोला जाता है, वहीं अहोई अष्टमी का व्रत संतान की खुशहाली और दीर्घायु के लिए होता है। इसलिए इस व्रत में तारों के दर्शन को विशेष महत्व दिया गया है।

तारों को संतान की लंबी आयु का प्रतीक क्यों मानते हैं?

धार्मिक मान्यताओं में तारों को स्थिरता, प्रकाश और सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। रात के अंधेरे में भी तारों का चमकते रहना जीवन में उम्मीद और उजाले का संदेश देता है। इसी भाव से अहोई अष्टमी पर माताएं तारों के दर्शन करके अपनी संतान के सुखद और उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हैं। ऐसी मान्यता है कि तारों को अर्घ्य देने और अहोई माता से प्रार्थना करने से संतान पर उनका आशीर्वाद बना रहता है। हालांकि, यह धार्मिक आस्था और परंपरा से जुड़ा विश्वास है।

अहोई माता और तारों के बीच संबंध

अहोई अष्टमी की पूजा में अहोई माता के साथ उनके सात पुत्रों और सात बहुओं का चित्र बनाने या पूजा करने की परंपरा भी प्रचलित है। इस व्रत से जुड़ी कथा में एक साहूकार की पत्नी का उल्लेख मिलता है, जो अनजाने में मिट्टी खोदते समय साही के बच्चे की मृत्यु का कारण बन जाती है। इसके बाद उसे संतान से जुड़े दुख का सामना करना पड़ता है। अंत में अहोई माता की कृपा और श्रद्धापूर्वक पूजा से उसे संतान सुख प्राप्त होता है।

अक्सर लोगों के मन में सवाल होता है कि क्या अहोई अष्टमी पर चंद्रमा को देखना मना होता है? दरअसल, इस व्रत की मुख्य परंपरा तारों के दर्शन करके व्रत खोलने की है। करवा चौथ की तरह चंद्रमा को अर्घ्य देना इसकी अनिवार्य पूजा-विधि का हिस्सा नहीं माना जाता। इसलिए इसे चंद्रमा देखने की मनाही के बजाय तारों के दर्शन से जुड़ी विशेष व्रत परंपरा के रूप में समझना चाहिए।

अहोई अष्टमी पर तारों को अर्घ्य देने की विधि

अहोई अष्टमी के दिन शाम को शुभ समय पर अहोई माता की पूजा की जाती है। इसके बाद तारों के दिखाई देने पर उन्हें जल अर्पित किया जाता है। इसके लिए एक लोटे में स्वच्छ जल लेकर उसमें अक्षत और फूल डाल सकते हैं। फिर आकाश की ओर देखकर तारों को अर्घ्य दें और अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखद भविष्य की कामना करें। कुछ परिवारों में तारों को देखकर व्रत खोलने के बाद भोजन ग्रहण करने की परंपरा है, जबकि कुछ जगहों पर विशेष पूजा-विधि का पालन किया जाता है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं और लोककथाओं पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों में पूजा-विधि और मान्यताओं में अंतर हो सकता है। इसे धार्मिक आस्था के रूप में लें।

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

और पढ़ें
End of Article