मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी INDIA गठबंधन ने शनिवार को एक अनूठा राजनीतिक आयोजन किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर आयोजित इस कार्यक्रम को ‘पब्लिक इम्पीचमेंट’ यानी सार्वजनिक महाभियोग का नाम दिया गया। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने इस प्रतीकात्मक कार्यवाही की अध्यक्षता की, जबकि राहुल गांधी ने कार्यक्रम के समापन पर ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा। हालांकि, यह संवैधानिक प्रक्रिया के तहत महाभियोग या मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की औपचारिक कार्यवाही नहीं थी।
इस आयोजन को लेकर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक खास तस्वीर और संदेश साझा किया। उन्होंने बताया कि जिस कुर्सी पर बैठकर मीरा कुमार ने इस कार्यक्रम की अध्यक्षता की, वह कभी देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की कुर्सी हुआ करती थी। पवन खेड़ा के मुताबिक, नेहरू अपने पूरे प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान इसी कुर्सी पर बैठते थे। उन्होंने लिखा कि इस कुर्सी ने देश के इतिहास के कई महत्वपूर्ण फैसलों को देखा है और यह नेहरू की विरासत का प्रतीक है।
खेड़ा ने आगे लिखा कि उसी कुर्सी पर बैठकर मीरा कुमार ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार गुप्ता को पद पर बने रहने के अयोग्य घोषित किया। उन्होंने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार को देश की जनता ने खारिज कर दिया है और उनका पद छोड़ना अब केवल समय की बात है।
राहुल गांधी ने भी साधा निशाना
राहुल गांधी ने कार्यक्रम में कहा कि मीरा कुमार ने जिस कुर्सी पर बैठकर यह प्रतीकात्मक कार्यवाही की, वह नेहरू की विरासत से जुड़ी है। उन्होंने ज्ञानेश कुमार को पद पर बने रहने के अयोग्य बताए जाने की बात कही। पवन खेड़ा ने अपने पोस्ट में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का उल्लेख करते हुए इस कुर्सी के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया।कार्रवाई के दौरान खड़गे ने लगाए छह आरोप
कार्यक्रम में मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ छह आरोप रखे। विपक्ष का आरोप है कि उन्होंने चुनावों को प्रभावित करने और मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाने की साजिश की। INDIA गठबंधन ने दावा किया कि देशभर में 13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए।
विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि संसद की मंजूरी के बिना फॉर्म-6 में बदलाव किए गए, ECINET के जरिए मतदाता सूची पर नियंत्रण स्थापित किया गया और चुनाव आयुक्तों के बीच फैसले लेने की प्रक्रिया में अन्य दो चुनाव आयुक्तों को शामिल नहीं किया गया। इसके अलावा, गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया।
ये सभी विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोप हैं। कार्यक्रम में इन्हें प्रतीकात्मक सार्वजनिक महाभियोग के आरोपों के तौर पर पेश किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष के राजनीतिक विरोध को सार्वजनिक मंच देना था।
पहले संसद में भी हटाने का प्रस्ताव लाया गया था
इससे पहले विपक्षी सांसदों ने संसद में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए नोटिस दिया था। राज्यसभा के 63 सदस्यों ने इस संबंध में नोटिस सौंपा था। हालांकि, 6 अप्रैल को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के सभापति ने हटाने के नोटिस को खारिज कर दिया था।
शनिवार को आयोजित ‘पब्लिक इम्पीचमेंट’ इसी राजनीतिक विरोध की अगली कड़ी के तौर पर सामने आया। यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी संवैधानिक पदाधिकारी के खिलाफ इस तरह का प्रतीकात्मक सार्वजनिक आयोजन उसे पद से हटाने की कानूनी या संवैधानिक प्रक्रिया नहीं है।
