Flowers Are Dear To Lord Shiva: सावन का महीना शुरू होने वाला है। इस साल 14 जुलाई से सावन का महीने की शुरुआत होने वाली है, जो 12 अगस्त रहेगा। इस साल सावन के चार सोमवार पड़ेंगे और यह चारों सोमवार काफी शुभ है। सावन का महीना भगवान शिव को अति प्रिय है। भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए शिव भक्त विधि विधान से पूजा आराधना में लीन रहते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव एकमात्र ऐसे देवता जो अपने भक्तों की पूजा पाठ से बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। सावन के महीने में भक्त भगवान शिव को भांग, धतूरा, बेलपत्र चढ़ाते हैं। इसके अलावा भगवान शिव को ऐसे पांच फूल है जो काफी प्रिय हैं। ऐसी मान्यता है कि यह पांच फूल भगवान शिव को चढ़ाने से भगवान शिव हर मनोकामना भक्तों की पूरी करते हैं। आइए जानते हैं इन फूलों के बारे में और इनके फायदे...
धतूरा
धतूरा भगवान शिव को सबसे ज्यादा प्रिय हैं। ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव को धतूरा चढ़ाने से व्यक्ति को संतान सुख की प्राप्ति होती है। धतूरे के बीजों से औषधि बनाने के लिए एल्कोलाड निकाला जाता है। इसका सेवन बवासीर, मिर्गी व दमा जैसी कई समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए किया जाता है।
मदार
मदार भी भगवान शिव को काफी प्रिय हैं। भगवान शिव की मूर्ति में मदार के फूलों की माला चढ़ाने से हर मनोकामना पूरी होती है। मदार सफेद व नीले रंग का फूल होता है। मदार के फूल से बनी माला भगवान शिव को चढ़ाने से भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं। मदार का फूल कई औषधीय गुणों से भरपूर होता है। यह डायबिटीज, अस्थमा, बवासीर जैसी बीमारियों के लिए फायदेमंद होता है।
गुड़हल
इसके अलावा गुड़हल का फूल भी भगवान शिव को पसंद है। शिव की पूजा करते वक्त लाल और सफेद गुड़हल का फूल जरूर चढ़ाना चाहिए। इसका विशेष महत्व होता है। गुड़हल जड़ी बूटी के रूप में भी जाना जाता है। बालों से जुड़ी समस्या के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है।
मोगरा
सफेद रंग के मोगरा से बनी माला भगवान शिव को चढ़ाने से हर मनोकामना पूरी होती हैं। मोगरा बेहद मनमोहक फूल है। इसकी खुशबू मन को शांति प्रदान करती है। यह फूल त्वचा के लिए भी काफी फायदेमंद होता है।
नील कमल
नील कमल का फूल भगवान शिव को सबसे ज्यादा प्रिय है। ऐसी मान्यता है कि हजार कनेर के फूल चढ़ाने से जो पुण्य मिलता है उतना ही पुण्य नीलकमल का एकमात्र फूल चढ़ाने से मिलता है। नील कमल के फूल से दिमाग तेज होता है और मस्तिष्क का विकास भी होता है।
(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)

