अध्यात्म

तनाव और कलह झेल सकते हैं इन 5 राशियों लोग, नीच राशियों में सूर्य-मंगल ने बना लिया है बाईनोविल योग

Sun Mars Binovile 2026: सूर्य और मंगल ने बाइनोविल आस्पेक्ट बना लिया है, लेकिन इस मसय दोनों ग्रह अपनी-अपनी नीच राशियों में हैं। इस कारण यह आस्पेक्ट 3 राशि वालों को अशुभ प्रभाव दे सकता है।

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किन राशि वालों के सूर्य और मंगल का बाईनोविल योग अच्छा नहीं रहेगा

Sun Mars Binovile 2026: 1 नवंबर 2026 की सुबह 7 बजकर 36 मिनट पर ग्रहों के राजा सूर्य और सेनापति मंगल के बीच 80 डिग्री का कोण बना। ज्योतिष में इसे बाइनोविल आस्पेक्ट कहते हैं। इस समय सूर्य तुला राशि में नीच अवस्था में हैं, जबकि मंगल कर्क राशि में नीच के होकर गोचर कर रहे हैं। दोनों ग्रहों की यह स्थिति और मंगल की सूर्य पर चौथी दृष्टि कुछ राशियों के लिए चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां बना सकती है।

इस आस्पेक्ट का सबसे ज्यादा प्रतिकूल प्रभाव कर्क, तुला और मकर राशि वालों पर पड़ सकता है। इन तीनों राशियों के लिए सूर्य और मंगल ऐसे भावों में स्थित हैं, जिनका सीधा संबंध व्यक्तित्व, स्वास्थ्य, करियर, वैवाहिक जीवन और आर्थिक मामलों से है। ऐसे में इन क्षेत्रों में तनाव, काम में रुकावट और फैसले लेने में परेशानी हो सकती है। आइए जानते हैं इन तीन राशियों को किन मामलों में विशेष सावधानी रखनी चाहिए और क्या उपाय करना लाभकारी रहेगा।

सूर्य-मंगल का बाइनोविल क्यों है खास

1 नवंबर को सूर्य तुला राशि में और मंगल कर्क राशि में गोचर कर रहे हैं। दोनों के बीच 80 डिग्री का कोण बनने से बाइनोविल एस्पेक्ट बना है। सूर्य आत्मविश्वास, पिता, मान-सम्मान, अधिकार और नेतृत्व के कारक हैं। वहीं मंगल साहस, ऊर्जा, जमीन-जायदाद, गुस्से और निर्णय लेने की क्षमता का प्रतिनिधित्व करते हैं।

इस गोचर की खास बात यह है कि सूर्य तुला में नीच के हैं और मंगल कर्क में नीच के हैं। इसके अलावा मंगल की चौथी दृष्टि तुला राशि पर पड़ती है, जहां सूर्य बैठे हैं। इस तरह मंगल का प्रभाव सूर्य पर भी पड़ रहा है। चंद्र राशि से भावों की स्थिति देखें तो कर्क, तुला और मकर राशि वालों के लिए यह संयोग ज्यादा संवेदनशील बन रहा है।

कर्क राशि

कर्क राशि वालों के लिए मंगल पहले भाव यानी लग्न में नीच अवस्था में गोचर कर रहे हैं। वहीं सूर्य चौथे भाव में नीच के होकर बैठे हैं। पहला भाव स्वास्थ्य, व्यक्तित्व और आत्मविश्वास का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि चौथा भाव माता, घर-परिवार, प्रॉपर्टी और मानसिक शांति से जुड़ा है।

मंगल कर्क राशि के लिए पांचवें और दसवें भाव के स्वामी हैं। ऐसे में उनका लग्न भाव में नीच अवस्था में होना करियर, निर्णय लेने की क्षमता और आत्मविश्वास पर दबाव डाल सकता है। नौकरी में जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं, लेकिन अपेक्षित परिणाम मिलने में देरी हो सकती है। वहीं सूर्य के चौथे भाव में होने से घर-परिवार में मतभेद, माता की सेहत या प्रॉपर्टी से जुड़े मामलों में चिंता हो सकती है। इस दौरान छोटी बातों पर गुस्सा करने से बचें। वाहन चलाते समय सावधानी रखें और घर या जमीन से जुड़े मामलों में जल्दबाजी में फैसला न लें।

उपाय: सोमवार को भगवान शिव का जलाभिषेक करें और 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का 108 बार जाप करें।

तुला राशि

तुला राशि वालों के लिए सूर्य पहले भाव यानी लग्न में नीच अवस्था में हैं, जबकि मंगल दसवें भाव में नीच के होकर गोचर कर रहे हैं। लग्न भाव व्यक्तित्व, स्वास्थ्य और आत्मविश्वास से जुड़ा है। वहीं दसवां भाव नौकरी, बिजनेस, पद और प्रतिष्ठा का प्रतिनिधित्व करता है। इस कारण सूर्य-मंगल का यह संयोग तुला राशि वालों के लिए सबसे ज्यादा संवेदनशील स्थितियों में से एक है।

सूर्य तुला राशि के ग्यारहवें भाव के स्वामी हैं। उनका लग्न में नीच अवस्था में होना आमदनी, बड़े संपर्कों और इच्छाओं की पूर्ति से जुड़े मामलों में असंतोष दे सकता है। वहीं मंगल दूसरे और सातवें भाव के स्वामी होकर दसवें भाव में नीच के हैं। इससे बिजनेस, पार्टनरशिप और कार्यक्षेत्र में विवाद की स्थिति बन सकती है। नौकरी में अधिकारियों के साथ मतभेद हो सकते हैं। व्यापारियों को पार्टनर के साथ आर्थिक मामलों में पारदर्शिता रखनी होगी।

इस समय अहंकार में आकर कोई फैसला न लें। नौकरी बदलने या बिजनेस में बड़ा निवेश करने से पहले सभी पहलुओं पर विचार करें। वैवाहिक जीवन में भी बातचीत के दौरान संयम रखना जरूरी होगा।

उपाय: रविवार को सुबह सूर्यदेव को तांबे के लोटे से जल अर्पित करें और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें।

मकर राशि

मकर राशि वालों के लिए सूर्य दसवें भाव में नीच अवस्था में हैं और मंगल सातवें भाव में नीच के होकर गोचर कर रहे हैं। दसवां भाव करियर, नौकरी, बिजनेस और मान-सम्मान का है। सातवां भाव विवाह, जीवनसाथी और बिजनेस पार्टनरशिप से जुड़ा है। दोनों ग्रहों की यह स्थिति मकर राशि वालों के पेशेवर और निजी जीवन में तनाव बढ़ा सकती है।

मकर राशि के लिए सूर्य आठवें भाव के स्वामी हैं। उनका दसवें भाव में नीच अवस्था में होना कार्यक्षेत्र में अचानक बदलाव, अधिकारियों से मतभेद और काम में रुकावट का संकेत दे सकता है। वहीं मंगल चौथे और ग्यारहवें भाव के स्वामी होकर सातवें भाव में नीच के हैं। इससे बिजनेस पार्टनर के साथ तालमेल बिगड़ सकता है। शादीशुदा जातकों के बीच भी पैसों और जिम्मेदारियों को लेकर बहस हो सकती है। किसी नए समझौते या पार्टनरशिप में आगे बढ़ने से पहले शर्तें अच्छी तरह जांच लें। इस दौरान कार्यक्षेत्र में धैर्य रखें और निजी रिश्तों में गुस्से को हावी न होने दें। किसी भी विवाद को बातचीत से सुलझाने की कोशिश करें।

उपाय: मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें और जरूरतमंद व्यक्ति को लाल मसूर की दाल दान करें।

सूर्य-मंगल के इस योग में क्या रखें सावधानी

सूर्य और मंगल दोनों अग्नि तत्व के ग्रह हैं। सूर्य आत्मसम्मान और अधिकार से जुड़े हैं, जबकि मंगल साहस और आक्रामकता का कारक है। दोनों की नीच राशि में स्थिति के दौरान गुस्से, अहंकार और जल्दबाजी में लिए गए फैसलों से परेशानी बढ़ सकती है। कर्क, तुला और मकर राशि के जातकों को विशेष रूप से स्वास्थ्य, नौकरी, आर्थिक लेनदेन और रिश्तों के मामलों में संयम रखना चाहिए।

डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारीauthor

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।

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