Laxmi Feet on Diwali: दिवाली की शाम घर की सफाई और सजावट के बीच एक छोटा-सा काम ऐसा भी है, जिसे कई परिवार बड़े उत्साह से करते हैं। घर के मुख्य दरवाजे से लेकर पूजा स्थल तक माता लक्ष्मी के पैरों के निशान बनाए जाते हैं। कहीं इन्हें चावल के आटे से बनाया जाता है, तो कहीं रंगोली या कुमकुम से। मान्यता है कि इन छोटे-छोटे पदचिह्नों के जरिए भक्त माता लक्ष्मी का अपने घर में स्वागत करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि इन पैरों के निशान की दिशा कैसी होनी चाहिए? क्या इन्हें बाहर से अंदर की ओर बनाना चाहिए या फिर घर से बाहर की तरफ? दरअसल, इस परंपरा के पीछे एक खास धार्मिक भावना जुड़ी है।
दिवाली पर लक्ष्मी जी के पैरों के निशान बनाते समय दिशा का ध्यान रखना शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं कि घर में माता लक्ष्मी के चरण चिह्न किस ओर बनाने चाहिए और इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताएं क्या हैं।
दिवाली पर लक्ष्मी जी के पैरों के निशान किस दिशा में बनाने चाहिए
धार्मिक मान्यता के अनुसार, दिवाली पर माता लक्ष्मी के पैरों के निशान घर के मुख्य दरवाजे से अंदर की ओर बनाने चाहिए। इन पदचिह्नों का रुख ऐसा होना चाहिए, जैसे माता लक्ष्मी घर में प्रवेश कर रही हों। यानी पैरों के निशान का मुंह घर के अंदर की तरफ होना चाहिए।
इसके पीछे मान्यता है कि भक्त माता लक्ष्मी को अपने घर आमंत्रित कर रहे हैं। जिस तरह किसी अतिथि का स्वागत घर के दरवाजे पर किया जाता है, उसी तरह दिवाली पर पदचिह्न बनाकर माता के आगमन की कामना की जाती है।
कुछ परिवार मुख्य द्वार से पूजा घर तक छोटे-छोटे चरण चिह्न बनाते हैं। इससे ऐसा प्रतीकात्मक भाव बनता है कि माता लक्ष्मी घर में प्रवेश करके पूजा स्थल तक पहुंच रही हैं।
क्या लक्ष्मी जी के पैरों के निशान बाहर की ओर बनाने चाहिए
एक सवाल ये भी आता है कि लक्ष्मी जी के पैरों के निशान बाहर की तरफ होने चाहिए या अंदर की ओर। परंपरागत मान्यता में घर के प्रवेश द्वार पर पैरों के निशान अंदर की ओर बनाए जाते हैं।
दरअसल, अंदर की ओर जाते हुए पदचिह्न माता लक्ष्मी के घर में आगमन का प्रतीक हैं। वहीं, बाहर की ओर जाते हुए पैरों के निशान को कुछ लोग माता के घर से विदा होने से जोड़कर देखते हैं। इसलिए दिवाली पर घर में लक्ष्मी जी का स्वागत करने के लिए अंदर की ओर जाते चरण चिह्न बनाने की परंपरा प्रचलित है। हालांकि, यह एक धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यता है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इसे लेकर रीति-रिवाज अलग हो सकते हैं।
घर में कहां-कहां बनाने चाहिए माता लक्ष्मी के पैरों के निशान
लक्ष्मी जी के चरण चिह्न बनाने के लिए घर का मुख्य दरवाजा सबसे खास स्थान माना जाता है। इसके अलावा कुछ जगहों पर इन्हें घर के दूसरे हिस्सों में भी बनाया जाता है-
- मुख्य प्रवेश द्वार: दरवाजे के पास से घर के अंदर की ओर जाते हुए पैरों के निशान बनाएं।
- पूजा घर: पूजा स्थल के पास माता लक्ष्मी के चरण चिह्न बनाना शुभ माना जाता है।
- तिजोरी या धन रखने का स्थान: कुछ परिवार धन रखने वाली जगह के पास भी छोटे पदचिह्न बनाते हैं।
- आंगन और रंगोली: रंगोली के साथ भी लक्ष्मी जी के चरण चिह्न बनाए जा सकते हैं।
ध्यान रखें कि पैरों के निशान बनाते समय घर में आने-जाने का रास्ता बाधित न हो।
लक्ष्मी जी के पैरों के निशान किस चीज से बनाने चाहिए
दिवाली पर माता लक्ष्मी के पैरों के निशान बनाने के लिए कई पारंपरिक तरीके अपनाए जाते हैं। आप अपनी सुविधा और घर की सजावट के अनुसार इनमें से कोई भी तरीका चुन सकते हैं।
चावल के आटे से: चावल के आटे में थोड़ा पानी मिलाकर उसका घोल तैयार करें। फिर उंगलियों या छोटी कटोरी की मदद से पैरों के निशान बनाएं। यह पारंपरिक तरीका है।
- रोली या कुमकुम से: पूजा के समय रोली या कुमकुम से भी छोटे-छोटे चरण चिह्न बनाए जा सकते हैं।
- रंगोली के रंग से: अगर आप घर के मुख्य दरवाजे को सजाना चाहते हैं, तो रंगोली के रंगों से लक्ष्मी जी के पैरों के निशान बना सकते हैं।
- हल्दी और कुमकुम से: कुछ परिवार हल्दी और कुमकुम का इस्तेमाल करके भी चरण चिह्न बनाते हैं।
दिवाली पर लक्ष्मी जी के पैरों के निशान बनाने का क्या महत्व है
हिंदू धर्म में माता लक्ष्मी को धन, वैभव, सुख और समृद्धि की देवी माना जाता है। दिवाली पर उनकी विशेष पूजा की जाती है। घर में उनके पैरों के निशान बनाना केवल सजावट का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह श्रद्धा और स्वागत का प्रतीक भी है।
इसलिए दिवाली पर जब भी आप माता लक्ष्मी के पैरों के निशान बनाएं, तो दिशा के साथ उस भावना का भी ध्यान रखें जिसके साथ यह परंपरा निभाई जाती है। आखिरकार, त्योहार की खूबसूरती केवल सजावट में नहीं, बल्कि उससे जुड़ी आस्था और परिवार की खुशियों में भी होती है।
