Surya Shani Shadashtak Yog 2026: 1 नवंबर 2026 की रात 9 बजकर 28 मिनट पर सूर्य और शनि एक-दूसरे से 150 डिग्री के कोण पर आ गए हैं। ज्योतिष में इस स्थिति को षडाष्टक संबंध कहा जाता है। सूर्य आत्मविश्वास, पिता, मान-सम्मान, सरकारी कामकाज और अधिकार का कारक ग्रह है, जबकि शनि मेहनत, अनुशासन, न्याय, नौकरी और कर्मों के फल का प्रतिनिधित्व करता है। सूर्य और शनि के बीच शत्रुता का संबंध माना जाता है। ऐसे में इनका षडाष्टक संबंध कुछ राशियों के लिए तनाव, काम में रुकावट और रिश्तों में मतभेद बढ़ा सकता है।
सूर्य-शनि षडाष्टक योग 2026 का ज्यादा प्रतिकूल असर मेष, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक और मीन राशि के लोगों पर पड़ सकता है। इन राशियों के लिए सूर्य तुला राशि में और शनि मीन राशि में अलग-अलग संवेदनशील भावों में गोचर कर रहे हैं। किसी के लिए यह स्थिति करियर और आर्थिक मामलों में दबाव बढ़ा सकती है, तो किसी को सेहत, पारिवारिक जीवन और वैवाहिक रिश्तों में सावधानी रखनी होगी। आइए जानते हैं इन छह राशियों को किन मामलों में सतर्क रहना चाहिए और क्या उपाय करने से राहत मिल सकती है।
सूर्य और शनि के बीच कैसे बन रहा है षडाष्टक योग
1 नवंबर 2026 को सूर्य तुला राशि में और शनि मीन राशि में गोचर कर रहे हैं। सूर्य तुला राशि में नीच के माने जाते हैं, जबकि शनि इस समय मीन राशि में वक्री हैं। इन दोनों ग्रहों के बीच 150 डिग्री का कोण बनने से षडाष्टक संबंध बन रहा है। राशि चक्र में तुला और मीन एक-दूसरे से छठे और आठवें स्थान पर हैं। इसी वजह से इस संबंध को षडाष्टक कहा जाता है।
ज्योतिष में सूर्य को पिता, आत्मबल, नेतृत्व, सरकारी क्षेत्र और मान-सम्मान से जोड़ा जाता है। शनि कर्म, नौकरी, मेहनत, देरी और जिम्मेदारियों के कारक हैं। दोनों ग्रहों के बीच यह संबंध बनने पर इनसे जुड़े मामलों में खींचतान की स्थिति बन सकती है। खासतौर पर जिन राशियों की कुंडली में सूर्य और शनि छठे, आठवें, बारहवें या लग्न जैसे संवेदनशील भावों में आ रहे हैं, उन्हें अपने फैसलों और व्यवहार में सावधानी रखनी चाहिए।
मेष राशि
मेष राशि वालों के लिए सूर्य सातवें भाव में और शनि बारहवें भाव में गोचर कर रहे हैं। सातवां भाव विवाह, जीवनसाथी, बिजनेस पार्टनरशिप और सार्वजनिक संबंधों का होता है। वहीं बारहवां भाव खर्च, विदेश, नींद और मानसिक तनाव से जुड़ा है। ऐसे में सूर्य-शनि का षडाष्टक संबंध वैवाहिक जीवन और पार्टनरशिप में तनाव बढ़ा सकता है।
जीवनसाथी के साथ किसी पुरानी बात को लेकर मतभेद हो सकते हैं। बिजनेस में पार्टनर के साथ पैसों या जिम्मेदारियों को लेकर बहस की स्थिति बन सकती है। नौकरीपेशा लोगों के खर्च बढ़ सकते हैं या किसी काम में अपेक्षा से ज्यादा समय लग सकता है। विदेश या दूसरे शहर से जुड़े कामों में भी देरी संभव है। इस समय गुस्से में कोई फैसला लेने से बचें और रिश्तों में बातचीत का रास्ता खुला रखें।
उपाय: शनिवार को किसी जरूरतमंद श्रमिक या बुजुर्ग को भोजन कराएं। इससे शनि से जुड़ी प्रतिकूलता कम करने की पारंपरिक मान्यता है।
सिंह राशि
सिंह राशि के स्वामी सूर्य हैं और इस समय वे तीसरे भाव में नीच राशि तुला में गोचर कर रहे हैं। वहीं शनि आठवें भाव में वक्री हैं। तीसरा भाव साहस, पराक्रम, कम्युनिकेशन और भाई-बहनों से जुड़ा है, जबकि आठवां भाव अचानक होने वाली घटनाओं, संयुक्त धन और अनिश्चितताओं का प्रतिनिधित्व करता है।
इस स्थिति में आत्मविश्वास में कमी महसूस हो सकती है। कार्यक्षेत्र में अपनी बात मनवाने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है। भाई-बहनों या करीबी लोगों के साथ मतभेद की आशंका है। पैसों के लेनदेन और निवेश से जुड़े मामलों में जल्दबाजी नुकसान पहुंचा सकती है। किसी पुराने विवाद के दोबारा सामने आने की संभावना भी रहेगी। सिंह राशि वालों को अपनी सेहत और काम के दबाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
उपाय: प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद तांबे के लोटे से सूर्यदेव को जल अर्पित करें। जल चढ़ाते समय सूर्य मंत्र का जाप करें।
कन्या राशि
कन्या राशि के लोगों के लिए सूर्य दूसरे भाव और शनि सातवें भाव में गोचर कर रहे हैं। दूसरा भाव धन, बचत, परिवार और वाणी का होता है। सातवां भाव विवाह और बिजनेस पार्टनरशिप से जुड़ा है। इन दोनों भावों के बीच षडाष्टक संबंध बनने से आर्थिक और पारिवारिक मामलों में तनाव हो सकता है।
परिवार में किसी बात को लेकर बहस हो सकती है। बातचीत के दौरान कठोर शब्दों का इस्तेमाल रिश्तों में दूरी बढ़ा सकता है। बिजनेस पार्टनर के साथ पैसों, काम के बंटवारे या भविष्य की योजना को लेकर मतभेद हो सकते हैं। निवेश और उधार के मामलों में भी सावधानी जरूरी है। नौकरीपेशा लोगों को सहकर्मियों या अधिकारियों के साथ तालमेल बनाने में अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ सकती है। किसी के कहने पर बड़ा आर्थिक फैसला न लें।
उपाय: शनिवार को काले तिल का दान करें और जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करें।
तुला राशि
तुला राशि में सूर्य नीच अवस्था में गोचर कर रहे हैं और यह आपकी चंद्र राशि से पहला भाव है। वहीं शनि छठे भाव में वक्री हैं। पहला भाव व्यक्तित्व, आत्मविश्वास और स्वास्थ्य से जुड़ा है, जबकि छठा भाव रोग, कर्ज, नौकरी और विरोधियों का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में सूर्य-शनि का षडाष्टक संबंध तुला राशि वालों के लिए विशेष सावधानी का संकेत दे रहा है।
इस दौरान काम का दबाव बढ़ सकता है। छोटी-छोटी बातों पर तनाव महसूस हो सकता है और आत्मविश्वास में उतार-चढ़ाव आ सकता है। नौकरी में सहकर्मियों के साथ मतभेद या किसी जिम्मेदारी को लेकर परेशानी हो सकती है। पुराने कर्ज और विवादों को निपटाने में समय लग सकता है। स्वास्थ्य के मामले में लापरवाही न करें और पर्याप्त आराम लें। किसी भी विवाद में आवेश में प्रतिक्रिया देने से बचना बेहतर रहेगा।
उपाय: रविवार को सूर्योदय के समय सूर्यदेव को जल में लाल पुष्प डालकर अर्घ्य दें।
वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशि वालों के लिए सूर्य बारहवें भाव और शनि पांचवें भाव में गोचर कर रहे हैं। सूर्य आपके कर्म भाव के स्वामी होकर बारहवें भाव में हैं। इससे नौकरी और बिजनेस में मेहनत के बावजूद अपेक्षित पहचान मिलने में देरी हो सकती है। कार्यक्षेत्र से जुड़े खर्च बढ़ सकते हैं और किसी महत्वपूर्ण योजना को पूरा करने में बाधाएं आ सकती हैं।
पांचवें भाव में वक्री शनि की स्थिति शिक्षा, संतान और प्रेम संबंधों से जुड़े मामलों में जिम्मेदारियां बढ़ा सकती है। विद्यार्थियों को पढ़ाई में ज्यादा अनुशासन की जरूरत होगी। संतान की शिक्षा या भविष्य को लेकर चिंता हो सकती है। प्रेम संबंधों में अपनी बात थोपने के बजाय सामने वाले की भावनाओं को समझें। इस समय करियर से जुड़ा कोई बड़ा फैसला जल्दबाजी में न लें।
उपाय: रविवार को जरूरतमंद व्यक्ति को गेहूं या गुड़ का दान करें और सूर्यदेव को जल अर्पित करें।
मीन राशि
मीन राशि के लोगों के लिए शनि पहले भाव यानी लग्न में वक्री हैं और सूर्य आठवें भाव में गोचर कर रहे हैं। पहला भाव स्वास्थ्य, व्यक्तित्व और आत्मविश्वास से जुड़ा है, जबकि आठवां भाव अचानक बदलाव, अनिश्चितता और पुराने मामलों का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में यह षडाष्टक संबंध मीन राशि वालों के लिए मानसिक दबाव और कामकाज में रुकावट का कारण बन सकता है।
इस दौरान थकान, सुस्ती या काम को लेकर असमंजस महसूस हो सकता है। नौकरी में जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं और किसी पुराने काम को दोबारा पूरा करना पड़ सकता है। आर्थिक मामलों में अचानक खर्च सामने आ सकते हैं। किसी भी तरह के विवाद, कर्ज या लेनदेन में सावधानी रखें। हालांकि आठवें भाव में सूर्य होने से कुछ पुराने अटके मामलों का समाधान भी निकल सकता है, लेकिन इसके लिए धैर्य रखना होगा। अपनी दिनचर्या और सेहत पर ध्यान देना जरूरी है।
उपाय: शनिवार को 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' मंत्र का 108 बार जाप करें।
कब तक रहेगा सूर्य-शनि के षडाष्टक संबंध का प्रभाव
सूर्य और शनि के बीच 150 डिग्री का सटीक कोण 1 नवंबर 2026 की रात 9 बजकर 28 मिनट पर बना है। सूर्य तुला राशि में रहने तक राशि के आधार पर दोनों ग्रहों का छठे-आठवें का संबंध बना रहेगा। सूर्य के 16 नवंबर को वृश्चिक राशि में प्रवेश करने के बाद यह राशि-आधारित षडाष्टक संबंध समाप्त हो जाएगा। हालांकि शनि मीन राशि में वक्री रहेंगे और अपने गोचर के अनुसार अलग-अलग राशियों को प्रभावित करते रहेंगे। इस अवधि में मेष, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक और मीन राशि के लोगों को खासतौर पर रिश्तों, आर्थिक फैसलों, नौकरी और स्वास्थ्य के मामलों में धैर्य रखना चाहिए।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
